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एक कागज के कारण उड़ने से बच गई सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस, काजीपेट में धमाके की आतंकियों ने रची थी साजिश

132 किलोमीटर दूर काजीपेट जंक्शन इसका पहला स्टॉपेज था। ये ट्रेन रात 12:38 में सामान्यतः वहाँ पहुँचती है। वहीं से निकलने के बाद ब्लास्ट हो, ऐसी आतंकियों की मंशा थी।

बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन पर जून 17, 2021 को दोपहर 3:25 बजे एक पार्सल में रखा बम फटने से विस्फोट हुआ था। अब पता चला है कि आतंकियों की मंशा उसे कहीं और किसी और समय पर फोड़ने की थी, ताकि बड़ी तबाही मचाई जा सके। आतंकियों की मुख्य साजिश सिकंदराबाद से दरभंगा के बीच चलने वाली 07007 डाउन स्पेशल ट्रेन को निशाना बनाने की थी, जिससे सैकड़ों यात्री आवागमन करते हैं।

आतंकियों की साजिश थी कि इस ट्रेन में एक भी व्यक्ति ज़िंदा न बच पाए। ‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, धमाके के लिए रखे नाइट्रिक और सल्फ्यूरिक एसिड में आतंकियों के सोचे समय पर रिएक्शन नहीं हुआ, जिससे एक बड़ी तबाही टल गई। पार्सल में रखे बम में ब्लास्ट तब हुआ, जब ट्रेन दरभंगा स्टेशन पहुँच चुकी थी। इस ब्लास्ट में जानमाल की क्षति नहीं हुई, लेकिन बम पहले फटता तो ट्रेन ‘द बर्निंग ट्रेन’ बन सकती थी।

ब्लास्ट के समय पार्सल को ट्रेन से उतारा जा चुका था और सभी यात्री भी ट्रेन से बाहर आ गए थे। आतंकियों की साजिश थी कि 15-16 जून की मध्य रात्रि में विस्फोट किया जाए। इसके लिए जगह के रूप में सिकंदराबाद स्टेशन से 132 KM दूर काजीपेट जंक्शन को चुना गया था। उनकी मंशा थी कि इस समय अधिकतर यात्री सो रहे होते हैं, इसीलिए उनके बचने का कोई चांस ही न हो। ये ट्रेन 15 जून की रात 10:40 बजे सिकंदराबाद से चली थी।

132 किलोमीटर दूर काजीपेट जंक्शन इसका पहला स्टॉपेज था। ये ट्रेन 12:38 में सामान्यतः वहाँ पहुँचती है। वहीं से निकलने के बाद ब्लास्ट हो, ऐसी आतंकियों की मंशा थी। NIA की टीम ने हैदराबाद से सगे भाई इमरान मलिक और नासिर मलिक को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ में ये खुलासा हुआ। उत्तर प्रदेश के शामली स्थित कैरान से पकड़े गए मोहम्मद सलीम और टेलर कफील ने भी कई राज़ उगले हैं।

ये तो पहले भी खबर में आ चुका है कि जिस पार्सल में ब्लास्ट हुआ, वो बम लिक्विड के रूप में एक शीशी के बोतल में रखा हुआ था। दोनों केमिकल के बीच एक कागज़ की मोटी परत दी गई थी। यही कागज़ समय पर नहीं जला, जिससे ब्लास्ट देर से हुआ। अभी आतंकियों से पूछताछ जारी है, ऐसे में कई खुलासे होने बाकी हैं। ट्रेन में अगर उसके चलने के 1:54 घंटे बाद विस्फोट होता तो नजारा भयावह हो सकता था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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