Tuesday, October 19, 2021
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उत्तर प्रदेश: गोरखपुर के टॉप 10 हिस्ट्रीशीटर में डॉ. कफील खान भी

हिस्ट्रीशीटर वे लोग होते हैं जिनका आपराधिक रिकॉर्ड होता है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जोगेंद्र कुमार ने 81 लोगों के खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोलने के निर्देश दिए। अभी तक पूरे गोरखपुर में 1,543 हिस्ट्रीशीटर थे।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने गोरखपुर जिले में 81 लोगों की हिस्ट्रीशीट खोली है। इस लिस्ट में साल 2017 में गोरखपुर BRD मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन कांड (जिसमें कई बच्चों की मौत हुई थी) के बाद सुर्खियों में आए मुख्य आरोपित के रूप में नामित डॉक्टर कफील खान का नाम टॉप 10 में शामिल है। हिस्ट्रीशीटरों में शामिल होने के बाद से ही खान पुलिस की रडार पर है।

आपको बता दें कि हिस्ट्रीशीटर वे लोग होते हैं जिनका आपराधिक रिकॉर्ड होता है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जोगेंद्र कुमार ने 81 लोगों के खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोलने के निर्देश दिए। अभी तक पूरे गोरखपुर में 1,543 हिस्ट्रीशीटर थे।

कफील खान के भाई अदील खान ने दावा किया कि डॉ. कफील खान के खिलाफ हिस्ट्रीशीट जून 2020 में ही खोली गई थी। लेकिन मीडिया को इसके बारे में शुक्रवार (29 जनवरी, 2020) को पता चला। कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी द्वारा उन्हें कॉन्ग्रेस शासित राज्य में ‘सुरक्षित रहने’ का आश्वासन दिए जाने के बाद वे राजस्थान चले गए हैं।

2017 में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज में 72 नवजात बच्चों की मौत के बाद डॉ. खान को लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किया गया था। उसे बाद में गिरफ्तार भी किया गया था।

डॉक्टर कफील पर यूपी पुलिस द्वारा 2 साल जाँच के बाद लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप हटा दिए गए थे। हालाँकि उस पर अभी भी निजी प्रैक्टिस चलाने और दो अन्य आरोप लगे हुए हैं। 9 महीने जेल में बिताने के बाद उसे 2018 में रिहा कर दिया गया था। लेकिन अभी भी वो अपनी नौकरी से सस्पेंड है।

उसे 10 दिसंबर 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सीएए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान दिए गए भाषण के लिए जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया गया था। खान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिए गए अपने भाषण में कुछ भड़काऊ टिप्पणियाँ की थीं। उसने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि वह एक हत्यारे हैं, जिनके कपड़े खून से सने हैं।

उसने यह भी कहा था कि सीएए ने मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बना दिया है। उसने आरोप लगाया कि आरएसएस संचालित स्कूलों में छात्रों को सिखाया जाता है कि दाढ़ी वाले लोग आतंकवादी हैं और सीएए के साथ सरकार ने हमें बताया है कि भारत हमारा देश नहीं था। खान ने लोगों से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने का आग्रह किया था।

जिसके बाद में खान के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। फिर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सितंबर 2020 में उसकी हिरासत को रद्द करते हुए तत्काल रिहाई का आदेश दिया था।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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