Tuesday, October 4, 2022
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टिहरी डैम पर बनी अवैध मस्जिद हटाई गई: लंबे समय से हो रहा था विरोध, नेटिजन्स ने की थी उत्तराखंड के CM धामी से कार्रवाई की माँग

इस मामले में ऑपइंडिया की खबर के बाद सोशल मीडिया पर हैशटैग #RemoveTehriMosque ट्रेंड करने लगा था। नेटिजन्स ने अवैध मस्जिद को हटाने के लिए स्थानीय लोगों की माँग को और अधिक आवाज दी।

आखिरकार प्रशासन ने उत्तराखंड के टिहरी बाँध के पास बनी अवैध मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। बीते कई दिनों से टिहरी गढ़वाल जिला इस अवैध मस्जिद को लेकर चर्चा में था। स्थानीय लोग और हिंदू संगठन इसे हटाने की माँग कर रहे रहे थे। ताजा जानकारी के अनुसार 30 सितंबर 2021 को अधिकारियों ने खंड-खाला कोटि कॉलोनी में बनी इस अवैध मस्जिद को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

इस अवैध मस्जिद के कारण लोगों को होने वाली समस्याओं को ऑपइंडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कार्यकर्ता अक्षत बिलजवान ने ऑपइंडिया बातचीत में कहा कि कवरेज के कारण अवैध मस्जिद पर देशव्यापी हंगामा हुआ और अंत में प्रशासन ने इसे हटाने का फैसला किया। इस मामले में ऑपइंडिया की खबर के बाद सोशल मीडिया पर हैशटैग #RemoveTehriMosque ट्रेंड करने लगा था। नेटिजन्स ने अवैध मस्जिद को हटाने के लिए स्थानीय लोगों की माँग को और अधिक आवाज दी। त्वरित कार्रवाई के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग भी किया।

आज (30 सितंबर 2021) मस्जिद तोड़ने की कार्रवाई शुरू होने की जानकारी अक्षत ने ऑपइंडिया को फोन कर दी। उन्होंने कार्रवाई का वीडियो भी साझा किया, जिसमें पिछले 20 सालों से बने अस्थायी ढाँचे को हटाया जा रहा। सरकारी जमीन पर कब्जा कर खड़े किए गए इस ढाँचे का स्थानीय लोग लंबे वक्त से विरोध कर रहे थे।

एक वीडियो मैसेज में अक्षत ने बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच समेत सभी हिंदू संगठनों को इस मामले में समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने अवैध मस्जिद पर कार्रवाई के लिए प्रशासन को धन्यवाद भी दिया। अक्षत ने कहा, “मैं क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय को भी धन्यवाद देना चाहता हूँ कि उन्होंने अवैध ढाँचे को हटाने में सहयोग किया।”

जानिए क्या है मामला

2000 के दशक की शुरुआत में बाँध बनाने वाली कंपनी जेपी ने मुस्लिम मजदूरों के लिए एक अस्थायी मस्जिद का निर्माण किया था। परियोजना के पूरी होने के बाद कंपनी और मजदूर चले गए, लेकिन अस्थायी मस्जिद को जस का तस रहने दिया। इस अवैध ढाँचे को हटाने के लिए पहले भी स्थानीय नेताओं, हिंदू संगठनों और लोगों ने कई बार आवाज उठाई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

अक्षत ने इस मामले में कहा था, “हर शुक्रवार को सैकड़ों मुसलमान यहाँ नमाज अदा करने आते हैं। नमाज अदा करने के बाद ज्यादातर लोग सड़क पर ही बैठ जाते हैं। पास में ही एक कॉलेज है और इस सड़क से अक्सर मोहल्ले की महिलाएँ गुजरती हैं। खासकर शुक्रवार को इलाके में उत्पीड़न के अनगिनत मामले सामने आए हैं, जहाँ सौ से ज्यादा मुस्लिम सड़क के किनारे बैठे रहते हैं। हमने कई बार शिकायत की है, लेकिन कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।”

मस्जिद को हटाने की माँग के लिए सितंबर 2021 के पहले सप्ताह में अक्षत और हिंदू संगठनों के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने मस्जिद के खिलाफ फिर से विरोध शुरू किया। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन और जमीन के मालिक पर्यटन विभाग ने पहले ही निरीक्षण कर अवैध मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इस क्षेत्र को दूसरे सभी अवैध ढाँचों को पहले ही हटा दिया गया था, लेकिन मस्जिद को नहीं हटाया गया था।

दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय लोगों की माँग के खिलाफ मस्जिद प्रशासन ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग में अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद याचिका पर कार्रवाई करते हुए आयोग ने स्थानीय अधिकारियों को तलब किया और कार्रवाई पर रोक लग गई। 25 सितंबर को एसडीएम ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और वादा किया कि जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि ये जमीन पर्यटन विभाग की है और उसने मस्जिद को अवैध घोषित कर रखा है। हालाँकि, एसडीएम ने इस बात पर भी जोर दिया था कि चूँकि इस मामले में अल्पसंख्यक आयोग भी शामिल था, इसलिए स्थानीय लोगों को इसे हटाने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

ऑपइंडिया में रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय स्तर पर नेटिजन्स द्वारा उठाया गया था। सवाल पूछा गया कि राज्य अल्पसंख्यक आयोग एक अवैध ढाँचे को हटाने की उचित प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की कोशिश क्यों कर रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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