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ज्ञानवापी का सीलबंद सबूत वापस लेने से वाराणसी कोर्ट का इनकार, वकील विष्णु जैन ने कहा- हमारा केस बहुत मजबूत, लीक एक साजिश

" हमारा मामला बहुत मजबूत है, हम अदालत के सामने साबित करेंगे कि मस्जिद को मंदिर तोड़कर बनाया गया था। हम अगली सुनवाई के लिए गुण-दोष तैयार कर रहे हैं।"

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के मामले में लीक हुए वायरल वीडियो को लेकर अब नए सिरे से विवाद का दौर शुरू हो चुका है। कल से ही कुछ टीवी चैनलों पर ज्ञानवापी सर्वे के दौरान रिकार्ड किए गए वीडियो प्रसारित हो रहे हैं। जिससे ज्ञानवापी मामले में अब दोनों पक्षों के बीच तरह-तरह की चर्चाओं के साथ केस को कमजोर किए जाने की इसे साजिश भी बताया जा रहा है। वहीं, आज अदालत ने हिन्दू पक्ष द्वारा लौटाए जा रहे सील बंद लिफाफों को वापस लेने से इनकार कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को ही कोर्ट ने मामले की चारों वादी महिलाओं रेखा पाठक, सीता साहू, लक्ष्मी देवी और मंजू व्यास को वीडियो और फोटो का बंद लिफाफा सौंपा था। वहीं ज्ञानवापी सर्वे की वीडियो रिपोर्ट लीक होने के बाद मामले की चारों वादी महिलाओं ने सीलबंद लिफाफे को कोर्ट में सरेंडर करने की कोशिश की लेकिन जिला अदालत ने इसे वापस लेने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि 4 जुलाई को वीडियो लीक होने के मामले की भी सुनवाई की जाएगी।

वहीं इस पूरे मामले में वादी पक्ष के वकील विष्‍णु जैन ने कहा, “जहाँ तक ​​लीक हुए वीडियो का सवाल है, हमें शाम करीब 6.30 बजे कोर्ट के जरिए सीलबंद लिफाफे में प्रमाणित कॉपी मिली। हमने शाम सात बजे एक पीसी रखी और कहा कि यह अभी भी एक सीलबंद लिफाफे में है और हम इसे अदालत में वापस कर रहे हैं। हमारा मामला बहुत मजबूत है, हम अदालत के सामने साबित करेंगे कि मस्जिद को मंदिर तोड़कर बनाया गया था। हम अगली सुनवाई के लिए गुण-दोष तैयार कर रहे हैं। हमारे प्रतिवादी मुस्लिम पक्ष द्वारा उठाए गए हर बिंदु के लिए हम तैयार हैं। जहाँ तक ​​दीन मोहम्मद के फैसले का सवाल है, मेरा मानना ​​है कि यह हम पर लागू नहीं होता, क्योंकि हिंदू इसके पक्षकार नहीं थे।”

गौरतलब है कि कल सोमवार (30 मई, 2022) को कोर्ट से शपथपत्र के साथ वादी महिलाओं को सील बंद लिफाफा मिलने के कुछ ही देर बाद ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर का वीडियो लीक हो गया था। वीडियो में तहखाने दीवारों पर त्रिशूल जैसी आकृति दिख रही है। इसके अलावा वजूखाने के पानी में शिवलिंग जैसी आकृति का ऊपरी भाग दिख रहा है।

इसे ही जहाँ हिंदू पक्ष शिवलिंग बता रहा है, वहीं मुस्लिम पक्ष अपने दावों पर अड़ा है कि यह फव्वारा है। फ़िलहाल, यह शिवलिंग है या फव्वारा, इसका फैसला कोर्ट को करना था, लेकिन उससे पहले सर्वे की वीडियो रिपोर्ट मीडिया में लीक हो गई। जो देखते ही देखते थोड़ी देर में वायरल हो गई।

बता दें कि आज ज्ञानवापी प्रकरण में अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने न्यूज चैनल पर सर्वे का वीडियो वायरल होने की जाँच कराने की अदालत से अपील की है। इस बाबत जिला जज डा. अजय कृष्ण विश्वेश ने पक्षकारों की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर चार जुलाई को सुनवाई करने का मौखिक आदेश दिया है। वहीं मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा पक्षकार बनाने की अपील पर जिला जज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जारी आदेश के तहत ही सुनवाई की जाएगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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