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बीमार महिला को खटिया पर लेकर 10 km पैदल चले गाँव वाले, हो गई मौत: बंगाल में सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों की खुली पोल

इस मामले को लेकर बंगाल की स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था पर भी सवाल उठ रह हैं। साथ ही कंधे पर महिला को 10 किलोमीटर ढोकर ले जाने के दौरान मौत पर वामपंथियों की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के मालदा में एक बीमार महिला की समय पर इलाज न मिलने की वजह से शुक्रवार (17 नवंबर, 2023 ) को मौत हो गई। यह इसलिए हुए क्योंकि खराब सड़क के कारण कोई एम्बुलेंस या ई-रिक्शा उसके गाँव तक नहीं पहुँच सकी।

हालाँकि, सड़क ख़राब होने की वजह से मालदा जिले के बामनगोला पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले गाँव मालडांगा की 25 वर्षीय गृहिणी मामानी रॉय की घर से करीब 10 किमी दूर अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मृत्यु हो गई, जब उन्हें उनके परिवार द्वारा बाँस की बल्लियों से जुड़ी खाट पर डालकर कंधे पर ले जाया जा रहा था। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस दुखद मामले की जानकारी देते हुए मामानी के शोक संतप्त पति कार्तिक ने शनिवार (18 नवम्बर, 2023 ) को कहा कि कोई भी एम्बुलेंस या कोई अन्य वाहन गाँव तक नहीं आ पाया  क्योंकि गाँव और मोदीपुकुर, जहाँ ग्रामीण अस्पताल स्थित है, के बीच की सड़क जर्जर थी।

उन्होंने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, “मेरी पत्नी को पिछले कुछ दिनों से बुखार था। शुक्रवार दोपहर को उसकी हालत बिगड़ गई और हमने उसे ग्रामीण अस्पताल में स्थानांतरित करने का फैसला किया। हमने एंबुलेंस और यहाँ तक कि ई-रिक्शा को भी फोन किया लेकिन लोकेशन सुनकर, खराब सड़क के कारण कोई नहीं आया। आखिरकार, हमने उसे अस्पताल ले जाने के लिए बाँस  की डंडियों से एक खाट बाँधने का फैसला किया।”

परिवार वालों ने बेसुध ममानी को चारपाई पर लिटाया और अस्पताल की ओर चलने लगे। लेकिन जब वे ग्रामीण अस्पताल पहुँचे तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मामले में डॉक्टरों ने बताया कि उसकी रास्ते में ही मौत हो गई थी। अगर हम उसे एम्बुलेंस या किसी अन्य वाहन से जल्दी अस्पताल पहुँचा पाते, तो शायद हम उसे बचा सकते थे। पति कार्तिक ने आरोप लगाया कि खराब सड़क के कारण ही मेरी पत्नी की मौत हो गई।

हालाँकि, पश्चिम बंगाल के इस क्षेत्र में पहला मामला नहीं है इससे पहले भी सड़क ख़राब होने की वजह से अस्पताल न पहुँच पाने के कारण कई बार महिलाओं को सड़क पर ही बच्चे को जन्म देने के लिए विवश होना पड़ा है। गाँव की एक महिला पारबती देवी ने बताया कि कई सालों से मरीजों को खाट या लकड़ी के तख्तों पर ही ग्रामीण अस्पताल ले जाना पड़ता है। अब इसे बदलना होगा। उनकी बातों में उनकी पीड़ा भी साफ झलकती है। 

ऐसे में बंगाल की स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था पर भी सवाल उठ रह हैं। साथ ही कंधे पर महिला को 10 किलोमीटर ढोकर ले जाने के दौरान मौत पर वामपंथियों की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

वहीं महिला की मौत के बाद शनिवार दोपहर आक्रोशित ग्रामीणों ने तत्काल सड़क निर्माण की माँग को लेकर बामनगोला में नालागोला-मालदा राज्य राजमार्ग को जाम कर प्रदर्शन भी किया। पुलिस ने किसी तरह तीन महीने में बीडीओ के सड़क बनाने के आश्वासन के बाद गाँव वालों को समझा बुझाकर रास्ता खुलवा दिया। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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