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QR, डिलीवरी, रीचार्ज और राइड ऐप्स से हिंदू महिलाओं के नंबर पा रहे ‘लव जिहादी’, ऑर्डर-राइड खत्म और कॉल-मैसेज शुरू?: जानें डिजिटल प्राइवेसी का कैसे रखें ध्यान

QR मेनू, UPI और डिलीवरी ऐप्स से महिलाओं की प्राइवेसी पर सवाल, कई मामलों में नंबर मिलने के बाद कॉल-मैसेज कर परेशान करने की घटनाए सामने आई है।

रात काफी हो चुकी थी। ऑफिस से थकी हुई एक लड़की जल्दी घर पहुँचने के लिए बाइक टैक्सी बुक करती है। रास्ते भर ड्राइवर उससे निजी सवाल पूछता रहता है, ‘घर में कौन है?’, ‘इतनी रात में अकेले क्यों निकली हो?’ लड़की किसी तरह सफर खत्म कर घर पहुँच जाती है।

उसे लगता है कि बात यहीं खत्म हो गई। लेकिन कुछ देर बाद उसी ड्राइवर के कॉल आने शुरू हो जाते हैं। फिर व्हाट्सएप मैसेज, फिर अलग-अलग नंबरों से वीडियो कॉल।

लड़की डर जाती है। नंबर ब्लॉक करती है, लेकिन कॉल बंद नहीं होते। जिस ऐप पर भरोसा करके उसने सफर किया, वही उसके डर की वजह बन जाता है। अक्सर ऐसी हरकतों का फायदा लव जिहादी उठाते दिख रहे हैं, जो हिंदू लड़कियों को निशाना बना रहे हैं। हालाँकि ऐसी हरकतें असामाजिक तत्व भी खूब कर रहे हैं।

बहरहाल, यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि तेजी से सामने आ रही हकीकत है। कभी डिलीवरी एजेंटों पर महिलाओं को परेशान करने के आरोप लगते हैं, तो कभी बाइक टैक्सी राइडर्स पर।

हाल ही में अभिनेत्री  रीवा अरोड़ा ने ब्लिंकिट के डिलीवरी एजेंट पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया। वहीं दिल्ली की शैव्या वशिष्ठा ने रैपिडो राइडर पर लगातार कॉल और वीडियो कॉल कर परेशान करने का दावा किया।

इन घटनाओं ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि डिजिटल सुविधा के इस दौर में क्या हमारा मोबाइल नंबर और निजी जानकारी सच में सुरक्षित है?

मोबाइल रिपेयरिंग शॉप, रिचार्ज काउंटर, कैब सर्विस और डिलीवरी जैसी लोकल और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कुछ मामलों में इस्लामी कट्टरपंथी के होने बात अक्सर सामने आई है। जिन पर उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगे हैं।

कई घटनाओं में यह भी शिकायत सामने आई है कि सेवा लेने के बाद महिलाओं के मोबाइल नंबर का गलत इस्तेमाल हुआ और उन्हें अनजान नंबरों से कॉल या मैसेज आने लगे और उन्हे परेशान किया गया। जैसा हमने पुणे केस में देखा।

QR मेनू और UPI से नंबर लीक होने का खतरा?

आजकल ज्यादातर रेस्टोरेंट में मेन्यू देखने और ऑर्डर करने के लिए QR कोड स्कैन कराया जाता है। लोग आसानी से मोबाइल नंबर डालकर खाना ऑर्डर कर देते हैं। लेकिन अब यही सुविधा लोगों की चिंता की वजह बनती दिख रही है।

पुणे में रहने वाली एक महिला ने बताया है कि वह अपने दोस्तों के साथ एक रेस्टोरेंट में खाना खाने गई थीं। वहाँ टेबल पर रखे QR कोड को स्कैन करके उन्होंने मेन्यू देखा और ऑर्डर किया। उस समय उन्हें लगा कि यह एक सामान्य डिजिटल प्रक्रिया है। लेकिन रात में अचानक उनके फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आने लगे।

महिला के मुताबिक, मैसेज भेजने वाला कोई और नहीं बल्कि उसी रेस्टोरेंट का एक कर्मचारी था। जिसका नाम शेख सैफ है, आरोप है कि कर्मचारी ने QR मेनू सिस्टम से उनका मोबाइल नंबर हासिल किया और फिर देर रात बातचीत करने की कोशिश करने लगा। पहले सामान्य तरीके से बात शुरू की गई, लेकिन बाद में लगातार मैसेज आने लगे, जिससे महिला असहज हो गईं।

महिला ने इस पूरी घटना के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किए। इसके बाद मामला तेजी से वायरल हो गया। लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर ग्राहक का निजी नंबर रेस्टोरेंट स्टाफ तक पहुँचा कैसे? क्या QR मेनू और डिजिटल ऑर्डर सिस्टम में ग्राहकों का डेटा पूरी तरह सुरक्षित नहीं है?

मामला बढ़ने के बाद रेस्टोरेंट प्रबंधन ने कथित तौर पर आरोपित कर्मचारी पर कार्रवाई की बात कही। लेकिन इस घटना ने एक बड़ी बहस छेड़ दी कि आज के डिजिटल दौर में लोग सुविधा के लिए अपना नंबर और निजी जानकारी तो दे रहे हैं, लेकिन उसकी सुरक्षा कितनी मजबूत है, इसका भरोसा शायद अभी भी नहीं है।

डिलीवरी ऐप्स और बाइक टैक्सी में महिलाओं की प्राइवेसी पर सवाल

दिल्ली की रहने वाली शैव्या वशिष्ठा ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वह देर रात रैपिडो से दिल्ली से ग्रेटर नोएडा जा रही थीं। उनके मुताबिक, सफर के दौरान ड्राइवर निजी सवाल पूछता रहा और अश्लील गाने बजाता रहा।

शैव्या का आरोप है कि राइड खत्म होने के बाद ड्राइवर ने उन्हें लगातार कॉल करना शुरू कर दिया। उन्होंने नंबर ब्लॉक किया, लेकिन फिर अलग-अलग नंबरों से कॉल और वीडियो कॉल आने लगे। उन्होंने दावा किया कि एक बार ड्राइवर ने बाथरूम से वीडियो कॉल तक कर दिया, जिससे वह बुरी तरह डर गईं।

यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो लोगों ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। बाद में रैपिडो ने बयान जारी कर कहा कि कंपनी ऐसे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करती और ग्राहक के नंबर छिपा के रखते है। लेकिन सवाल फिर वही उठा कि अगर नंबर सुरक्षित थे तो ड्राइवर तक पहुँच कैसे हुई?

इसी तरह अभिनेत्री रीवा अरोड़ा ने आरोप लगाया कि ब्लिंकिट का एक डिलीवरी एजेंट उनके घर ऑर्डर लेकर पहुँचा, लेकिन शुरुआत से ही उसका व्यवहार ठीक नहीं था। रिवा के मुताबिक, एजेंट ने उनके परिवार के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और काफी देर तक बहस करता रहा।

रिवा ने कहा कि मामला इतना बढ़ गया कि परिवार को पुलिस बुलानी पड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियों को सिर्फ डिलीवरी नहीं, बल्कि कर्मचारियों के व्यवहार और ट्रेनिंग पर भी ध्यान देना चाहिए।

क्या ग्राहक डेटा का हो रहा गलत इस्तेमाल?

इन घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ग्राहक का डेटा कितना सुरक्षित है? जब कोई व्यक्ति खाना ऑर्डर करता है या बाइक टैक्सी बुक करता है, तो उसका मोबाइल नंबर, घर का पता और लोकेशन जैसी निजी जानकारी ऐप के जरिए साझा होती है।

लोग पूछ रहे हैं कि क्या डिलीवरी एजेंट और राइडर को जरूरत से ज्यादा जानकारी दिखती है? क्या राइड खत्म होने के बाद भी ग्राहक का नंबर उनके पास रहता है? अगर कंपनियाँ दावा करती हैं कि नंबर मास्क्ड  होते हैं, तो फिर कई मामलों में दोबारा कॉल और मैसेज कैसे पहुँच रहे हैं?

साइबर सुरक्षा के लिहाज से देखें तो कंपनियों को अपने सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है। सिर्फ ऐप बनाना काफी नहीं, बल्कि यह भी जरूरी है कि ग्राहक का डेटा सीमित समय के लिए ही दिखे और उसका गलत इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।

ऐसे मामलों से कैसे सुरक्षित रहें?

डिजिटल दौर में ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना, बाइक टैक्सी बुक करना और UPI पेमेंट करना हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन सुविधा के साथ सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरी हो गया है।

जरूरत है कि लोग ऑनलाइन ऑर्डर, डिलीवरी और UPI पेमेंट के लिए अलग मोबाइल नंबर इस्तेमाल करें, ताकि निजी नंबर हर जगह शेयर न हो। या तो फिर आप अपने सेटिंग्स में जाकर नंबर को हाइड कर सकते हैं।

इसके अलावा हर जगह बिना जरूरत मोबाइल नंबर देने से बचना चाहिए। व्हाट्सप्प की प्राइवेसी सेटिंग्स भी मजबूत रखना जरूरी है, ताकि अनजान लोग आपकी प्रोफाइल फोटो, लास्ट सीन और दूसरी निजी जानकारी न देख सकें।

अगर किसी डिलीवरी एजेंट, राइडर या अनजान व्यक्ति की तरफ से लगातार कॉल या मैसेज आने लगें, तो तुरंत नंबर ब्लॉक करना चाहिए और संबंधित ऐप पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। मामला ज्यादा गंभीर लगे तो पुलिस और साइबर सेल से संपर्क करने में देर नहीं करनी चाहिए।

साइबर एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि किसी भी अनजान QR कोड को स्कैन करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है। वहीं देर रात सफर के दौरान अपनी राइड डिटेल और लाइव लोकेशन परिवार या करीबी लोगों के साथ शेयर करना भी सुरक्षित माना जाता है।

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विवेकानंद मिश्र
विवेकानंद मिश्र
एक पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर। राजनीति, संस्कृति, समाज से जुड़ी अनसुनी कहानियाँ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध।

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