Thursday, May 30, 2024
Homeदेश-समाज'गुजराती कसम खा कर पलट जाते हैं, औरंगजेब की तरह BJP नेताओं की कब्रों...

‘गुजराती कसम खा कर पलट जाते हैं, औरंगजेब की तरह BJP नेताओं की कब्रों पर थूकेंगे लोग’: क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता की धमकी

योगराज सिंह ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं के चेहरे देखे हैं, वो सभी 'शैतानों की तरह' दिखते हैं। पंजाबी में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी शायद ये नहीं जानते हैं कि भगवान और शैतान एक साथ नहीं रह सकते।

भारत के पूर्व-क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह भी अब दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में शामिल हो गए हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर भड़काऊ भाषण दिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर कहा कि अगर ‘हिम्मत है तो वो अकेले आएँ और किसानों से बात करे।’ एक पंजाबी समाचार चैनल से बात करते हुए उन्होंने पीएम मोदी को जान से मारने की दी गई धमकियों का भी समर्थन किया।

जब योगराज सिंह से पूछा गया कि इस ‘किसान आंदोलन’ में इंदिरा गाँधी की हत्या को याद कराते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी गई है, तो उन्होंने कहा कि जिसने जो बोया है, वो वही काटेगा। उन्होंने इसे भावनाओं की लड़ाई बताते हुए कहा कि सरकार को ऐसा कोई भी बयान नहीं देना चाहिए, जो भारत को विभाजित करे। उन्होंने भारत सरकार पर मुग़ल बादशाहों बाबर, औरंगजेब और अंग्रेजों से भी ज्यादा क्रूरता और अत्याचार करने के आरोप लगाए।

योगराज सिंह ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं के चेहरे देखे हैं, वो सभी ‘शैतानों की तरह’ दिखते हैं। पंजाबी में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी शायद ये नहीं जानते हैं कि भगवान और शैतान एक साथ नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अपनी जिंदगी उस मोड़ पर ला खड़ी की है, जहाँ उन्हें, उनके कैबिनेट मंत्रियों और RSS नेताओं की कब्रों के साथ ऐसा ही बर्ताव करेगी, जैसा औरंगजेब के कब्र के साथ किया जाता है।

उन्होंने कहा कि जनता उनकी कब्रों पर थूकेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमाएँ सील कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमा खोल कर पुलिस व सुरक्षा बलों को हटा दिया जाए, और हिम्मत है तो पीएम मोदी अकेले आएँ। उन्होंने कहा कि पुलिस व सुरक्षा बलों को हटाने के बाद देखते हैं कि क्या होता है। युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह भी क्रिकेटर रहे हैं। उन्होंने आगे धमकाते हुए कहा:

“मैं आपको बताना चाहता हूँ कि पंजाबियों ने दिल्ली पर 18 बार विजय प्राप्त की है। अब 19वीं बार भी हम दिल्ली जीत सकते हैं। हमें इस मुकाम तक लाकर मत खड़ा करो। आपकी गोलियाँ ख़त्म हो जाएँगी, लेकिन अपनी छाती पर गोलियाँ खाने वाले पंजाबियों का आना कम नहीं होगा। अगर आप एक गोली भी दागते हो तो आपको उसी तरह उखाड़ फेंका जाएगा, जैसे मुगलों को हटाया गया था। किसे पता कि अमित शाह के पास कितने दिन बचे हुए हैं?”

योगराज सिंह ने दिए भड़काऊ बयान

उन्होंने यहाँ तक आरोप लगाया कि अमित शाह ने अपनी सुरक्षा घेरे में से सिख सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया है। उन्होंने चुनौती दी कि मोदी-शाह ‘अपने दोस्त’ अम्बानी-अडानी को पंजाब लाकर दिखाएँ, फिर हम देखेंगे कि वो कैसे वापस जाते हैं? उन्होंने कहा कि गुजराती अपनी माँ-बहन की कसम खा कर भी पलट जाते हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से उनके बीच से ‘एक और जरनैल सिंह भिंडरवाला’ को पैदा करने के लिए कहा।

उधर केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और किसान संगठनों के बीच चली बैठक मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) शाम को खत्म हो गई। हालाँकि, बैठक में कोई भी नतीजा नहीं निकल सका है और फिर से तीन दिसंबर को बातचीत होगी। बातचीत में शामिल प्रतिनिधिमंडल में स्वराज पार्टी (Swaraj Party) के नेता योगेंद्र यादव (Yogendra yadav) का भी नाम था। मगर बाद में केंद्र सरकार के कहने के पर उनका नाम हटा दिया गया।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बाँटने की राजनीति, बाहरी ताकतों से हाथ मिला कर साजिश, प्रधान को तानाशाह बताना… क्या भारतीय राजनीति के ‘बनराकस’ हैं राहुल गाँधी?

पूरब-पश्चिम में गाँव को बाँटना, बाहरी ताकत से हाथ मिला कर प्रधान के खिलाफ साजिश, शांति समझौते का दिखावा और 'क्रांति' की बात कर अपने चमचों को फसलना - 'पंचायत' के भूषण उर्फ़ 'बनराकस' को देख कर आपको भारत के किस नेता की याद आती है?

33 साल पहले जहाँ से निकाली थी एकता यात्रा, अब वहीं साधना करने पहुँचे PM नरेंद्र मोदी: पढ़िए ईसाइयों के गढ़ में संघियों ने...

'विवेकानंद शिला स्मारक' के बगल वाली शिला पर संत तिरुवल्लुवर की प्रतिमा की स्थापना का विचार एकनाथ रानडे का ही था, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि राजनीतिक इस्तेमाल के लिए बाद में यहाँ किसी की मूर्ति लगवाई जा सकती है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -