सोहराबुद्दीन को मार गिराने वाले 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ याचिका खारिज, बॉम्बे HC ने स्पेशल कोर्ट के फैसले को बताया सही: सभी हुए थे बरी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गुजरात और राजस्थान पुलिस के 22 अधिकारियों को बरी किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इसका मतलब है कि निचली अदालत ने पुलिसवालों को जो राहत दी थी, वह बरकरार रहेगी।

हाई कोर्ट ने याचिका में क्या कहा?

बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस आलोक आराधे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने यह फैसला सुनाया। सोहराबुद्दीन के भाइयों ने पुलिसकर्मियों की रिहाई को चुनौती दी थी। बेंच ने सभी दलीलों को सुनने के बाद याचिका को नामंजूर कर दिया। कोर्ट ने माना कि स्पेशल कोर्ट का फैसला सही था। फिलहाल फैसले की पूरी कॉपी आना अभी बाकी है।

सुनवाई के दौरान केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने अपना रुख साफ किया। एजेंसी ने कहा कि वह स्पेशल कोर्ट के फैसले को पहले ही स्वीकार कर चुकी है। CBI ने पुलिसकर्मियों को बरी किए जाने के आदेश को चुनौती नहीं दी थी। एजेंसी ने कोर्ट में कहा कि उनका इसे चुनौती देने का कोई इरादा नहीं है।

परिवार ने लगाए थे ट्रायल पर आरोप

सोहराबुद्दीन के भाइयों ने कोर्ट में कहा कि केस की सुनवाई में कई कमियाँ थीं। उनका आरोप था कि जरूरी गवाहों को कोर्ट में पेश नहीं किया गया। परिवार ने माँग की थी कि या तो केस की दोबारा सुनवाई हो या पुराने फैसले को रद्द किया जाए। हालाँकि, हाई कोर्ट ने परिवार की इन माँगों को मानने से इनकार कर दिया।

क्या था सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामला?

यह मामला साल 2005 का है। आरोप था कि गुजरात पुलिस ने सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौसर बी का अपहरण कर एनकाउंटर कर दिया था। बाद में उनके साथी तुलसीराम प्रजापति की भी हत्या कर दी गई थी। साल 2010 में यह केस CBI को सौंपा गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस की सुनवाई मुंबई ट्रांसफर हुई थी।

अमित शाह समेत कई हुए थे पहले ही बरी

इस केस में शुरुआत में 38 लोगों को आरोपित बनाया गया था। इसमें गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह और बड़े पुलिस अफसर डीजी वंजारा भी शामिल थे। साल 2014 में अमित शाह को सभी आरोपों से मुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया गया था। कुल 16 लोग ट्रायल शुरू होने से पहले ही बरी हो गए थे।

निचली अदालत का पुराना फैसला

दिसंबर 2018 में स्पेशल CBI कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। कोर्ट ने सबूतों की कमी के कारण सभी 22 पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया था। जज ने कहा था कि सरकारी पक्ष साजिश और हत्या के आरोप साबित नहीं कर पाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सिर्फ शक के आधार पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती। अब हाई कोर्ट ने भी इसी फैसले पर मुहर लगा दी है।