ब्रिटेन की मशहूर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एशमोलियन म्यूजियम ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 16वीं सदी की बेशकीमती कांस्य मूर्ति भारत को वापस कर दी है। मंगलवार (4 मार्च 2026) को लंदन स्थित ‘इंडिया हाउस’ में हुए एक भव्य समारोह में यह मूर्ति भारतीय अधिकारियों को सौंपी गई। भगवान विष्णु के भक्त ‘थिरुमंगई आळवार’ की यह 500 साल पुरानी मूर्ति अब तमिलनाडु के उस मंदिर में वापस स्थापित की जाएगी, जहाँ से इसे दशकों पहले चोरी किया गया था।
कैसे पता चला मूर्ति का सच?
म्यूजियम ने इस मूर्ति को साल 1967 में सोथबीज से खरीदा था। हालाँकि, साल 2019 में एक शोधकर्ता (रिसर्चर) ने खुलासा किया कि यह मूर्ति तमिलनाडु के थाडिकोम्बु स्थित ‘श्री सौंदरराजा पेरुमल मंदिर’ की है।
जाँच में पाया गया कि मूर्ति मंदिर की पुरानी तस्वीरों से हूबहू मेल खाती है। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और तमिलनाडु सरकार ने पुख्ता सबूत पेश किए, जिससे साबित हो गया कि इसे अवैध तरीके से ब्रिटेन ले जाया गया था।
म्यूजियम के इतिहास में पहली बार हुई वापसी
एशमोलियन म्यूजियम के निदेशक डॉ ज़ा स्टर्गिस ने कहा कि हालाँकि उन्होंने इसे अच्छी नियत से खरीदा था, लेकिन सच्चाई सामने आने के बाद इसे वापस करना ही सही था। खास बात यह है कि इस म्यूजियम ने अपने इतिहास में पहली बार किसी देश को उसकी वस्तु लौटाई है।
हाउस ऑफ लॉर्ड्स की सदस्य बैरोनेस थंगम डेबोननेयर ने कहा कि यह केवल कला का नमूना नहीं, बल्कि एक जीवित मंदिर की पवित्र आस्था है। इस मौके पर चार अन्य प्राचीन भारतीय वस्तुएँ भी भारत को सौंपी गईं।

