नागालैंड पीपुल्स फ्रंट याना एनपीएफ ने शैक्षणिक संस्थानों और विधानसभा में ‘वंदे मातरम’ के अनिवार्य गायन का कड़ा विरोध किया है। पार्टी ने ईसाई-बहुल नागालैंड के लिए ‘एलियन और अनफ्रेंडली’ करार दिया है।
मार्च 2026 की शुरुआत में आई खबरों के अनुसार, एनपीएफ ने इसे ‘थोपा गया निर्णय’ करार देते हुए राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए खतरा बताया है।
सत्ताधारी नागा पीपुल्स फ्रंट ने गुरुवार (5 मार्च, 2026) को देशभक्ति गीत ‘वंदे मातरम’ का कड़ा विरोध किया। पार्टी ने शैक्षणिक संस्थानों और राज्य विधानसबा में ‘वंदे मातरम’ को जरूरी तौर पर गाने को ‘जबरदस्ती थोपना’ बताया। उसने दावा किया कि इस गीत को गाने से नागालैंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को खतरा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नागालैंड पीपुल्स फ्रंट ने कोहिमा में अपने सेंट्रल हेडक्वार्टर से एक प्रेस स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें दावा किया गया कि यह कदम राज्य के लोगों के लिए ‘अलग और गैर-दोस्ताना’ है, जहाँ ईसाई आबादी ज्यादा है। पार्टी का ये भी मानना है कि इससे भारत के संविधान के तहत मिले मूल अधिकार कमजोर होंगे।
नागालैंड में बीजेपी की सहयोगी एनपीएफ है। उसने वंदे मातरम को आर्टिकल 371A के तहत राज्य को मिली खास संवैधानिक सुरक्षा के खिलाफ बताया। इसका मकसद नागा लोगों के धार्मिक और पारंपरिक रीति-रिवाजों की रक्षा करना है।
पार्टी ने यह भी कहा कि राज्य में ज्यादातर ईसाई आबादी है, इसलिए वंदे मातरम उनकी अंतरात्मा और आस्था के खिलाफ हो सकता है। पार्टी के मुताबिक, राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ में हिंदू देवी-देवताओं का भी जिक्र है। एनपीएफ ने कहा, “नागरिकों को ऐसे कामों में हिस्सा लेने के लिए मजबूर करना जो उनके धार्मिक विश्वासों के खिलाफ हों, भारत के धर्मनिरपेक्ष ढाँचे की भावना के खिलाफ है।” इसने केंद्र सरकार से ऐसे किसी भी कदम पर फिर से विचार की अपील की।
इसके अलावा, पार्टी ने ‘एक जैसी सोच वाली राजनीतिक पार्टियों, संगठनों और लोगों’ को राज्य की पहचान, संस्कृति और आस्था की रक्षा के लिए एक साथ आने की अपील की। पार्टी का कहना है कि क्षेत्रीय दलों के एक होने पर केंद्र उनकी चिंताओं को सुनने के लिए मजबूर होगी। एनपीएफ ने अपने सेंट्रल ऑफिस बेयरर्स , सेंट्रल एग्जीक्यूटिव काउंसिल और जनरल कन्वेंशन की पिछली मीटिंग्स में अपनाए गए अपने पहले के प्रस्तावों को दोहराया और पुराने सदस्यों और दूसरे क्षेत्रीय ग्रुप को पार्टी के साथ मिलकर काम करने के लिए आमंत्रित किया।
इस साल जनवरी में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम गाने के लिए प्रोटोकॉल नोटिफाई करते हुए एक निर्देश जारी किया था। निर्देश में कहा गया है कि गाने का पूरा वर्जन, जो 3 मिनट और 10 सेकंड का है, राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले बजाया जाना चाहिए। जब यह गाया जाए तो दर्शकों को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना चाहिए। मंत्रालय ने निर्देश दिया कि यह पूरा वर्जन राष्ट्रपति के आने, तिरंगा फहराने और राज्यपालों के भाषण जैसे सरकारी कामों में बजाया जाना चाहिए।
नागालैंड विधानसभा में बजट सेशन के पहले दिन गाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के सदन में भाषण के दौरान यह गाना बजाया गया। अगले दिन विधायकों ने सदन में इस कदम का विरोध किया। इसके चलते आखिरकार मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने ‘सोचे-समझ कर फैसले तक पहुँचने से पहले’ मामले को जाँच और कानूनी सलाह के लिए सदन की सेलेक्ट कमेटी को भेजने का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो एनपीएफ नेता हैं।
‘वंदे मातरम’ के गायन को अनिवार्य किए जाने के फैसले का मुस्लिम ग्रुप, चर्च से जुड़ी संस्था और कई छात्र संघ विरोध कर रहे हैं।

