कोडीन कफ सिरप तस्करी केस को लेकर एक्शन मोड में वाराणसी पुलिस, ₹5.25 करोड़ की पाँच संपत्तियाँ और बैंक खाता फ्रीज: जाँच हुई और तेज

वाराणसी पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। मुख्य आरोपित कानपुर के व्यवसायी विनोद अग्रवाल की करीब 5.25 करोड़ रुपए की पाँच संपत्तियाँ और एक बैंक खाते को फ्रीज कर दिया गया है।

पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बताया, “वाराणसी में कोडीन कफ सिरप को लेकर 4 मुकदमें दर्ज हुए थे। जिसमें मुख्य स्टॉकिस्ट विनोद अग्रवाल फर्जी फर्म खोल कर सिरप की बिक्री दिखाते थे और इसकी तस्करी करते थे, जिसकी पुष्टि असम और पश्चिम बंगाल के बॉर्डर से हुई है। इनकी अवैध संपत्तियों को पुलिस ने जब्त कर लिया है। इनकी लगभग 5.5 करोड़ की 6 प्रॉपर्टी और 50 लाख रुपए सीज किए गए हैं।

सारनाथ पुलिस की टीम कानपुर पहुँची और विनोद अग्रवाल की सिविल लाइंस, जाजमऊ, बिरहाना रोड व देहली सुजानपुर स्थित पाँच संपत्तियों को फ्रीज किया। इनमें बिरहाना रोड की संपत्ति वाणिज्यिक है जबकि बाकी आवासीय हैं। तीन संपत्तियाँ विनोद के नाम, एक पत्नी सविता अग्रवाल और एक बेटे शिवम अग्रवाल के नाम पर हैं। एक बैंक खाते में करीब 37 लाख रुपये भी फ्रीज किए गए।

एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना ने बताया कि जाँच में पता चला कि प्रयागराज की एमके हेल्थकेयर और वाराणसी की पीडी फार्मा नामक फर्जी फर्मों के जरिए कोडीन सिरप की फर्जी बिलिंग की जा रही थी। इन फर्मों में एक भी सिरप नहीं पहुँचा, लेकिन तस्करी का पैसा वापस अग्रवाल ब्रदर्स के खातों में आ गया।

विनोद अग्रवाल सुपर स्टॉकिस्ट हैं जो कंपनी से एसकफ सिरप लेते थे और बी-सी लेवल की फर्मों में फर्जी बिलिंग कर पश्चिम बंगाल व बॉर्डर क्षेत्रों में डायवर्ट करते थे। मामले में मनी लांड्रिंग के भी संकेत मिले हैं।

गौरतलब है कि खाद्य सुरक्षा एवँ औषधि आयुक्त की टीम ने 11 नवंबर 2025 को अग्रवाल ब्रदर्स पर छापा मारा था, जिसमें अनियमितताएँ मिली थीं। तब से फरार विनोद अग्रवाल को 25 जनवरी 2026 को गिरफ्तार कर लिया गया। वह हरियाणा में छिपा था और फिलहाल पुलिस रिमांड पर है।

बता दें कि वाराणसी पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ के तहत यह कार्रवाई की है और जाँच जारी है।