तुर्कमान गेट हिंसा मामले में मोहम्मद उबैदुल्लाह की जमानत रद्द: दिल्ली HC ने पलटा सत्र अदालत का फैसला, कहा- बिना ठोस तर्क दी गई बेल, दोबारा विचार करें

दिल्ली के रामलीला मैदान के पास (तुर्कमान गेट) अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई हिंसा के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। एक सत्र अदालत द्वारा आरोपित मोहम्मद उबैदुल्लाह को दी गई जमानत को दिल्ली हाई कोर्ट ने महज दो दिन के भीतर पलटते हुए जमानत आदेश को रद्द कर दिया है और मामले को दोबारा विचार के लिए सत्र अदालत के पास भेज दिया है।

हाई कोर्ट ने क्यों रद्द की जमानत

हाई कोर्ट ने साफ कहा कि जमानत जैसे गंभीर विषय पर निचली अदालत का आदेश बेहद संक्षिप्त और बिना किसी ठोस तर्क के दिया गया था, जो असाधारण परिस्थितियों में हस्तक्षेप योग्य है। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस प्रतीक जलान ने अपने आदेश में कहा कि आमतौर पर कोर्ट किसी व्यक्ति को मिली स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने से बचती हैं, लेकिन यह मामला अपवाद की श्रेणी में आता है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि सत्र अदालत ने न तो जमानत से जुड़े मानकों का प्राथमिक विश्लेषण किया और न ही यह बताया कि किन आधारों पर आरोपित को राहत दी जा रही है। हाई कोर्ट ने सत्र अदालत के आदेश को ‘cryptic and unreasoned’ यानी अत्यंत संक्षिप्त और बिना तर्क वाला बताया।

आरोपित मोहम्मद उबैदुल्लाह पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दंगा, पत्थरबाजी और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। उसे 20 जनवरी को जमानत दी गई थी, लेकिन जमानत बांड की पुष्टि न होने के कारण वह अब तक जेल में ही है।

कोर्ट ने दिए दोबारा सुनवाई के आदेश

हाई कोर्ट ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आरोपित अभी भी न्यायिक हिरासत में है, निर्देश दिया कि उसकी जमानत याचिका पर कोर्ट में दोबारा सुनवाई की जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोबारा सुनवाई के बाद आरोपित को जमानत दी जाती है, तो पहले से जमा किए गए जमानत बांड पर ही विचार किया जाएगा।

गौरतलब है कि उबैदुल्लाह इस मामले में जमानत पाने वाला पहला आरोपित था, जबकि इससे पहले कोर्ट पाँच अन्य आरोपितों की जमानत याचिकाएँ खारिज कर चुकी है। बता दें कि तुर्कमान गेट इलाके में रामलीला मैदान के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। भीड़ की पत्थरबाजी में 4 से 5 पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं थीं।