दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार (19 मार्च 2026) को एक अहम अंतरिम आदेश पारित करते हुए तमिल पत्रिका ‘नक्कीरन’ द्वारा ईशा फाउंडेशन और उसके संस्थापक ‘सदगुरु’ के खिलाफ प्रकाशित कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया।
जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद ने नक्कीरन द्वारा दायर उस आवेदन को भी खारिज कर दिया, जिसमें सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 7 नियम 11 के तहत ईशा फाउंडेशन के मुकदमे को खारिज करने की माँग की गई थी।
मानहानि के आरोप और 3 करोड़ का दावा
ईशा फाउंडेशन ने कोर्ट का रुख करते हुए नक्कीरन और उसके संपादक गोपाल के खिलाफ 3 करोड़ रुपए के हर्जाने की माँग की है। फाउंडेशन ने गूगल LLC को भी इस मामले में पक्षकार बनाया है, क्योंकि कथित आपत्तिजनक सामग्री गूगल सर्च और उसके प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर उपलब्ध हो रही थी।
ईशा फाउंडेशन का कहना है कि नक्कीरन ने उसके खिलाफ कई आलोचनात्मक रिपोर्ट प्रकाशित कीं, जिनमें फाउंडेशन के भीतर शोषण, ब्रेनवॉशिंग और अवैध गतिविधियों जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। इन रिपोर्टों में यह भी संकेत दिया गया कि फाउंडेशन में रहने वाले लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध रोका जाता है या उन पर दबाव डाला जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
फाउंडेशन ने कोर्ट को बताया कि नक्कीरन ने ये लेख उस समय भी प्रकाशित किए, जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही एक हैबियस कॉर्पस याचिका में कार्यवाही बंद कर चुका था। यह याचिका एक पिता द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसकी दो बेटियों को फाउंडेशन ने ब्रेनवॉश कर लिया है।
18 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें तत्कालीन मुख्य जज डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल थे, ने दोनों महिलाओं से बातचीत के बाद स्पष्ट किया कि वे वयस्क हैं और अपनी इच्छा से योग केंद्र में रह रही हैं।
कोर्ट ने कहा, “हमने दोनों महिलाओं से बात की है और उनके बयान दर्ज किए हैं। दोनों ने कहा कि वे अपनी मर्जी से वहाँ रह रही हैं, इसलिए हैबियस कॉर्पस याचिका को बंद किया जाता है।” हालाँकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य किसी जाँच पर इस आदेश का प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मद्रास हाई कोर्ट से लेकर दिल्ली हाई कोर्ट तक मामला
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में मद्रास हाई कोर्ट का वह निर्देश भी शामिल है, जिसमें तमिलनाडु सरकार से ईशा फाउंडेशन के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों का विवरण माँगा गया था। यह आदेश उस याचिका के बाद आया था, जिसमें एक व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि उनकी 42 और 39 वर्षीय बेटियों को ब्रेनवॉश कर ईशा योग केंद्र में रहने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद ईशा फाउंडेशन ने दिल्ली हाई कोर्ट में नक्कीरन के खिलाफ कथित मानहानिकारक लेखों को हटाने के लिए याचिका दायर की।
गौरतलब है कि मार्च 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह को ऐसे ही फर्जी दावे से जुड़े मामले में कड़ी फटकार लगाई थी और वो कंटेंट हटाने का आदेश दिया था, जिसमें सदगुरु और ईशा फाउंडेशन के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कही गई थी। हाई कोर्ट के आदेश के बाद श्याम मीरा सिंह को इससे जुड़ा वीडियो हटाना पड़ा था।

