गुजरात HC से राहत के बाद अहमदाबाद के सेवन्थ डे स्कूल संचालकों को अंतिम नोटिस, रद्द हो सकती है मान्यता: जानें पूरा मामला

गुजरात के अहमदाबाद के मणिनगर-खोखरा इलाके में स्थित विवादित सेवन्थ डे स्कूल एक बार फिर शिक्षा विभाग की सख्त कार्रवाई के घेरे में आ गया है। गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड तथा प्राथमिक शिक्षा निदेशक कार्यालय ने स्कूल संचालकों को अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

नोटिस में स्कूल प्रबंधन से पूछा गया है कि स्कूल का प्रशासन सरकार अपने हाथ में क्यों न ले और उसकी मान्यता क्यों न रद्द की जाए। इसके लिए स्कूल को विस्तृत जवाब के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण पेश करने के आदेश दिए गए हैं। मामला 19 अगस्त 2025 को उस समय चर्चा में आया था।

स्कूल में पढ़ने वाले एक हिंदू छात्र की मुस्लिम छात्र द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे शहर में भारी विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद अहमदाबाद शहर जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षा निरीक्षक के माध्यम से स्कूल की जाँच शुरू कराई थी। जाँच के दौरान स्कूल की मान्यता, प्रशासन और संचालन से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताएँ सामने आई थीं।

हाई कोर्ट से राहत के बाद फिर सख्त हुई कार्रवाई

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा स्कूल को कई बार नोटिस देकर जरूरी दस्तावेज और स्पष्टीकरण माँगे गए थे, लेकिन संतोषजनक जवाब और प्रमाण नहीं मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी की सिफारिश पर स्कूल का प्रशासन सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया था। इसके खिलाफ सेवन्थ डे स्कूल ने गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाई कोर्ट ने स्कूल को राहत देते हुए सरकार द्वारा प्रशासन अपने हाथ में लेने के आदेश को रद्द कर दिया था। कोर्ट में स्कूल प्रबंधन की ओर से यह दलील दी गई थी कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल को अंतिम अवसर देते हुए फिर से सभी जरूरी दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है।

प्राथमिक शिक्षा निदेशक के समक्ष तत्काल जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 29 मई तक सचिव के समक्ष जवाब और आधार दस्तावेज जमा कराने को कहा है।

विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो स्कूल का प्रशासन सरकार अपने हाथ में ले सकती है और मान्यता रद्द करने जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।

14 बिंदुओं पर माँगा जवाब, जमीन से लेकर ट्रस्ट तक उठे सवाल

शिक्षा विभाग ने स्कूल से कुल 14 प्रकार के दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगे हैं। इनमें सबसे अहम सवाल हरिपुरा कैंपस और मणिनगर कैंपस (चर्च के पास) को लेकर उठाया गया है। विभाग ने पूछा है कि दोनों कैंपस वैध मंजूरी के साथ संचालित हो रहे हैं या नहीं। विभाग के अनुसार, जहाँ स्कूल चल रहा है और मूल मंजूरी में दर्ज पते के बीच विसंगति पाई गई है।

इसके अलावा स्कूल के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विभाग ने पूछा है कि स्कूल को अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र मिला है या नहीं और स्कूल का संचालन आखिर किस ट्रस्ट या सोसायटी के माध्यम से किया जा रहा है। अलग-अलग दस्तावेजों में अलग-अलग ट्रस्टों के नाम सामने आने पर भी स्पष्टीकरण माँगा गया है।

दोनों कैंपस किस ट्रस्ट के अधीन संचालित हो रहे हैं और संबंधित ट्रस्ट के पास अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र है या नहीं, इस संबंध में भी दस्तावेज माँगे गए हैं।

नोटिस में ICSE/CISCE बोर्ड की संबद्धता और राज्य सरकार के NOC को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विभाग ने पूछा है कि वर्तमान कैंपस के लिए CISCE संबद्धता किस ट्रस्ट के नाम पर ली गई थी और यदि ट्रस्ट में बदलाव हुआ तो क्या उसके लिए गुजरात सरकार तथा CISCE बोर्ड की अनुमति ली गई थी या नहीं।

स्कूल में दो पालियों में पढ़ाई चलाने के लिए सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति ली गई थी या नहीं, अलग स्टाफ और अलग रिकॉर्ड रखे गए थे या नहीं, इस पर भी जवाब माँगा गया है। दोनों कैंपस की जमीन किसकी है, लीज या किराया समझौता मौजूद है या नहीं और AMC द्वारा शैक्षणिक उद्देश्य से दी गई जमीन पर कौन-सी संस्था संचालन कर रही है, इस पर भी स्पष्टीकरण माँगा गया है।

इसके साथ ही अन्य कई प्रमाण भी माँगे गए हैं। फिलहाल शिक्षा विभाग स्कूल प्रबंधन द्वारा दिए जाने वाले जवाब और दस्तावेजों का इंतजार कर रहा है। यदि स्कूल संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहता है तो आने वाले दिनों में उसके खिलाफ और भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।