राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भाजपा और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कई विवादित बयान दिए। ‘कायम रत्न अवार्ड-2026’ समारोह को संबोधित करते हुए गहलोत ने कॉन्ग्रेसियों की तानाशाही वाला राग अलापते हुए कहा कि इंदिरा गाँधी होती तो BJP पर बैन लगा देती। उनका ये बयान अपने आप में तानाशाही को बढ़ावा देने वाला है और फिर वो खुद तानाशाही का हिस्सा रह चुके हैं।
गहलोत ने आरोप लगाते हुए कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएँ दबाव में काम कर रही हैं और लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई, एजेंसियों के कामकाज और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म और ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है व संविधान की मूल भावना के खिलाफ काम कर रही है।
इसी दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर आज इंदिरा गाँधी जीवित होतीं तो धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली ऐसी पार्टी पर प्रतिबंध लगाने जैसी कार्रवाई करने से भी नहीं हिचकिचातीं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में SIR के नाम पर लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत हैं।
गहलोत ने RSS और भाजपा की विचारधारा पर भी सवाल उठाए और कहा कि सरदार पटेल, महात्मा गाँधी और डॉ भीमराव अंबेडकर के नाम लेने वाले लोग उनकी मूल सोच और संविधान की भावना का सम्मान नहीं कर रहे हैं।

