हिमाचल में सरकारी योजनाओं में खर्च हो रहा था मंदिर का धन, हाई कोर्ट ने कॉन्ग्रेस सरकार को लगाई फटकार: कहा- दान का पैसा भगवान का है

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने मंदिरों में जमा दान की राशि के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि दान का पैसा ‘भगवान का है, सरकार का नहीं।’ यह राशि अब सड़कों, पुलों के निर्माण या किसी भी तरह के निजी व्यवसायों पर खर्च नहीं की जा सकेगी।

जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस राकेश कैंथला की बेंच ने कहा कि भक्तों द्वारा दिया गया दान केवल धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए ही इस्तेमाल होना चाहिए। कोर्ट ने 31 क्षेत्रों की एक विस्तृत सूची जारी की है जहाँ इन पैसों का उपयोग किया जा सकता है।

दान का पैसा वेद-योग की शिक्षा में हो इस्तेमाल

इन पैसों का मुख्य इस्तेमाल वेद और योग की शिक्षा, अध्ययन और प्रचार-प्रसार के लिए बुनियादी ढाँचा तैयार करने में होगा। इसके अलावा, मंदिरों की देखभाल, पुजारियों को वेतन देने और सामाजिक बुराइयों को खत्म करने में भी इसका उपयोग किया जाएगा। कोर्ट ने विशेष रूप से छुआछूत और जातिवाद खत्म करने के लिए अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों को शुरू करने का आदेश दिया है।

जो करेगा धन का गलत इस्तेमाल, उसी से वसूली की जाएगी

कोर्ट ने कहा कि मंदिर हमेशा से ही शिक्षा और सामाजिक कल्याण के केंद्र रहे हैं। इस फैसले में मंदिर के प्रबंधन को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। अब हर मंदिर को अपनी मासिक आय, खर्चों का विवरण और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से नोटिस बोर्ड या वेबसाइट पर दिखानी होगी, ताकि भक्तों का विश्वास बना रहे।

हाईकोर्ट ने सख्त चेतावनी दी है कि मंदिर के धन का गलत इस्तेमाल करना एक आपराधिक अंधविश्वास और धार्मिक स्वतंत्रता का अपमान है। अगर किसी ट्रस्ट ने धन का दुरुपयोग किया है, तो पूरी राशि उसी से वसूल की जाएगी।

कहाँ हो रहा था धन का इस्तेमाल

जानकारी के अनुसार, मंदिर के दान का पैसा अब तक सड़कों और पुलों के निर्माण, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और सार्वजनिक भवनों को बनाने जैसे गैर-धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल हो रहा था। इसके अलावा, व्यक्तिगत लाभ, निजी उद्योगों में निवेश और मंदिर आने वाले वीआईपी को महंगे उपहार (काजू, बादाम, मोमेंटो) खरीदने में भी धन खर्च किया जा रहा था। कोर्ट ने इन सभी कामों पर तुरंत रोक लगा दी है।