उत्तर प्रदेश के कानपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले एक बड़े इंटर स्टेट गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड जियाउल हसन, उसके भाई आमिर अहमद और हसन आसिफ के अलावा नूरुद्दीन समेत 4 को गिरफ्तार किया है। जाँच में सामने आया कि यह गिरोह पिछले 13 साल से देश-विदेश तक फैले नेटवर्क के जरिए हाईस्कूल से लेकर पीएचडी तक की फर्जी डिग्रियाँ और मार्कशीट तैयार कर रहा था। पुलिस को करोड़ो रुपए के लेन-देन के सबूत भी मिले हैं।
धोखाधड़ी के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस—
— UP POLICE (@Uppolice) June 9, 2026
फर्जी मार्कशीट/डिग्री बनाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए @kanpurnagarpol द्वारा 04 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से फर्जी मार्कशीट, लैपटॉप, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, मोहर व प्रिंटर बरामद किये गए हैं।
अभियुक्त फर्जी मार्कशीट… pic.twitter.com/pCHPsoRxcD
पुलिस के अनुसार गिरोह छात्रों, नौकरी तलाश रहे युवाओं और विदेश जाने के इच्छुक लोगों को निशाना बनाता था। आरोपित बिना परीक्षा दिलाए डिग्री, मार्कशीट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज तैयार कर देते थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियाँ, मार्कशीट, होलोग्राम, सील, प्रिंटर, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और अन्य उपकरण बरामद किए हैं। गिरोह के पास कई विश्वविद्यालयों और शिक्षा बोर्डों के नाम पर तैयार किए गए दस्तावेज मिले हैं।
जाँच में यह भी पता चला है कि गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में फैला हुआ था। कुछ विदेशी कनेक्शन भी सामने आए हैं और पुलिस को कनाडा, लंदन तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं। आरोपित सोशल मीडिया और एजेंटों के माध्यम से ग्राहकों तक पहुँचते थे। डिग्री के प्रकार और संस्थान के नाम के हिसाब से उनसे हजारों से लेकर लाखों रुपए तक वसूले जाते थे।
पुलिस अब गिरोह के बैंक खातों, संपत्तियों और डिजिटल रिकॉर्ड की जाँच कर रही है। करोड़ों रुपए के लेनदेन की पड़ताल की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी दस्तावेज हासिल करने वाले लोगों की भी पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। मामले की जाँच आगे बढ़ने के साथ कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है

