कर्नाटक हाई कोर्ट ने साल 2016 के चर्चित BJP नेता योगेश गौड़ा मर्डर केस में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार (31 जुलाई) को पूर्व कॉन्ग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी और 8 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया है।
हाई कोर्ट की इस बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सभी दोषी अपील के निपटारे तक जमानत पर रिहा होने के हकदार हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने निलंबित पुलिस अधिकारी चन्नाकेशव बी टिंगरीकर की 7 साल की सजा पर भी रोक लगाकर उन्हें जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला 15 जून 2016 का है, जब धारवाड़ के एक जिम में BJP नेता योगेश गौड़ा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में बेंगलुरु की एक स्पेशल CBI कोर्ट ने इसी साल 17 अप्रैल 2026 को बड़ा फैसला सुनाया था।
स्पेशल CBI कोर्ट ने विनय कुलकर्णी समेत 15 लोगों को हत्या की साजिश रचने का दोषी माना था। कोर्ट ने सभी दोषियों को आईपीसी की धारा 302 और 120बी के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा सबूत मिटाने और दंगे फैलाने के लिए भी सजा तय की गई थी।
CBI का विरोध
सुनवाई के दौरान केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के वकील राहुल रेड्डी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कोर्ट को याद दिलाया कि जब कुलकर्णी को पहले जमानत मिली थी, तब उन पर शर्त लगाई गई थी कि वे धारवाड़ जिले में प्रवेश नहीं करेंगे।
इस पर जस्टिस मोहम्मद नवाज और जस्टिस जी बसवराज की बेंच ने साफ तौर पर कहा कि वह पुरानी शर्त ट्रायल के दौरान थी। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि मामले के सभी गवाहों से अब पूछताछ पूरी हो चुकी है, इसलिए अब स्थिति अलग है।
सजा और जुर्माने से जुड़े अन्य अहम पहलू
ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया था कि सभी सजाएँ साथ-साथ चलेंगी। कोर्ट ने जुर्माने की राशि से 16 लाख रुपए मुआवजा देने का भी निर्देश दिया था, जो सीधे योगेश गौड़ा के बच्चों को मिलना था।
हालाँकि, विनय कुलकर्णी और सह-आरोपित चंद्रशेखर इंडी को आर्म्स एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया गया था। वहीं निलंबित पुलिस अधिकारी चन्नाकेशव बी टिंगरीकर को सबूत मिटाने के जुर्म में सात साल की कैद की सजा सुनाई गई थी।
इस मामले में CBI ने विनय कुलकर्णी को 5 नवंबर 2020 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी थी। लेकिन जून 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने पाया था कि ट्रायल के दौरान गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद उन्हें फिर से जेल जाना पड़ा था। अब हाई कोर्ट के इस ताजा फैसले से उन्हें बड़ी राहत मिली है।

