बड़ी टूट की ओर ममता की पार्टी तृणमूल, 22 सांसदों का गुट खुद को बता सकता है असली TMC: रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में विधानसभा स्तर पर बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रही तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) अब संसद में भी संभावित टूट की अटकलों से घिर गई है। पार्टी के कम से कम 22 सांसद अगले सप्ताह दिल्ली में खुद को ‘असली TMC’ बताने का दावा कर सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संभावित बागी गुट का नेतृत्व बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। हालाँकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। दिल्ली में मौजूद भाजपा नेताओं ने भी TMC के भीतर असंतोष की बात कही है।

बीजेपी नेताओं का दावा- लगातार संपर्क कर रहे TMC सांसद

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि TMC के कई सांसद लगातार भाजपा नेताओं से संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का भविष्य संकट में है और निकट भविष्य में उसका प्रभाव काफी सीमित हो सकता है।

वहीं भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव लॉकेट चटर्जी ने भी दावा किया कि 4 मई 2026 के चुनावी नतीजों के बाद से कई सांसद फोन कॉल, व्हाट्सएप और संदेशों के जरिए भाजपा के संपर्क में हैं। उनके अनुसार, ये सांसद राजनीतिक पाला बदलने की इच्छा जता रहे हैं।

शुक्रवार (5 जून 2026) को कई TMC सांसदों से संपर्क की कोशिशों के दौरान अधिकांश सांसदों के फोन भी बंद पाए गए। उधर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रितब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उन्होंने कई सांसदों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन सभी के फोन बंद मिले। उन्होंने कहा कि डर संक्रामक होता है, लेकिन साहस भी संक्रामक होता है।

दलबदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई समर्थन जरूरी

संसद में किसी भी विभाजन को दसवीं अनुसूची के तहत वैधता दिलाने के लिए बागी गुट को दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। वर्तमान में लोकसभा में TMC के 28 और राज्यसभा में 13 सदस्य हैं। ऐसे में लोकसभा में कम से कम 19 और राज्यसभा में 9 सांसदों का समर्थन आवश्यक माना जा रहा है।

कहा जा रहा है कि दोनों सदनों को मिलाकर 22 सांसदों का समर्थन बागी खेमे को मिल चुका है। यह समूह सोमवार (8 जून 2026) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला  और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन  से मुलाकात कर सकते हैं। TMC के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने भी कहा कि पार्टी के भीतर विभाजन अब सिर्फ समय की बात है।