अयोध्या से कारसेवकों को लेकर आ रही साबरमती एक्सप्रेस 27 फरवरी 2002 को जब गोधरा रेलवे स्टेशन पहुँची, तब वहाँ एक भयानक घटना हुई। कहा जाता है कि कुछ स्थानीय मुस्लिम लोगों ने साजिश के तहत ट्रेन के दो डिब्बों को बाहर से बंद कर, उसमें आग लगा दी। इस घटना में 59 हिंदू लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
घटना को 24 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी कुछ लोग इसमें अलग-अलग साजिश की कहानियाँ जोड़ने की कोशिश करते हैं। इस दुखद घटना के बाद गुजरात के कई हिस्सों में दंगे भड़के, जिसमें मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदाय के लोग मारे गए। लेकिन अक्सर चर्चा सिर्फ दंगों पर होती है और इसका जिम्मेदार तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को ठहराते हैं। इस काम में गुजरात और गुजरात के बाहर के कुछ तथाकथित सेक्युलर लोग, कुछ NGO और संगठन भी सक्रिय रहे हैं।
ऐसा ही एक संगठन है- ‘मूवमेंट फॉर सेक्युलर डेमोक्रेसी।’ यह संगठन हर साल 28 फरवरी को अहमदाबाद में इकट्ठा होता है। वहाँ वे इंसाफ, अमन, एकता और सांप्रदायिक सौहार्द जैसे नारे लिखे बैनर लेकर कार्यक्रम करते हैं। वे गुजरात में आपसी भाईचारा और शांति बनाए रखने की बात करते हैं, तस्वीरें खिंचवाते हैं और फिर अपने-अपने घर लौट जाते हैं। हर साल की तरह इस साल 2026 में भी यही हुआ।

सेक्युलर डेमोक्रेसी से जुड़े लोग सोशल मीडिया पर ‘गोधरा नरसंहार’ का जिक्र तो करते हैं, लेकिन अपना कार्यक्रम 28 फरवरी को आयोजित करते हैं। उस दिन भी वे उन 59 निर्दोष कारसेवकों को याद करने या उनके लिए एक मोमबत्ती जलाने की कोशिश नहीं करते। क्योंकि अगर वे ऐसा करेंगे तो 27 फरवरी की घटना पर भी बात करनी पड़ेगी।
अगर ऐसे लोगों को सच में ‘इंसाफ’ की बात करनी है, तो सबसे पहले उन 59 हिंदुओं के लिए न्याय की माँग होनी चाहिए। लेकिन उनके लिए न्याय माँगना तो दूर, उनका नाम तक ठीक से नहीं लिया जाता। क्या इसी को सेक्युलरिज्म कहा जाना चाहिए?
अगर यहाँ 28 फरवरी से शुरू हुए दंगों पर ‘सांप्रदायिक एकता’ के भाषण देने हैं, तो वे गोधरा में हिंसा करने वाले और उनके जैसे कट्टर सोच रखने वाले लोगों को देने चाहिए। उन लोगों को समझाना चाहिए, जो हिंदू कारसेवकों का अस्तित्व भी सहन नहीं कर सके। बात उन लोगों से होनी चाहिए जिनकी सोच आज भी वैसी ही है और जो आज भी किसी हिंदू दर्जी की दुकान में जाकर सिर्फ इसलिए उसका ‘सर तन से जुदा’ कर देते हैं क्योंकि उसने किसी महिला की अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन किया था।

