राहुल ईश्वर समेत 4 कॉन्ग्रेसी नेता गिरफ्तार, कॉन्ग्रेस विधायक राहुल ममकूटाथिल के उत्पीड़न का शिकार महिला पर किए ऑनलाइन हमले: 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे गए

केरल की एक अदालत ने ‘एक्टिविस्ट’ राहुल ईश्वर को सोमवार (1 दिसंबर 2025) को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। तिरुवनंतपुरम की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट ने उनके जमानत आवेदन को खारिज कर दिया। यह मामला कॉन्ग्रेस के निलंबित विधायक राहुल ममकूटाथिल पर रेप और जबरन गर्भपात का आरोप लगाने वाली महिला पर किए गए कथित ऑनलाइन हमलों से जुड़ा है।

कोर्ट ने कहा कि राहुल ईश्वर के खिलाफ लगे आरोप ‘गंभीर प्रकृति’ के हैं और फिलहाल जाँच ‘शुरुआती स्तर’ पर है। इस समय ज़मानत देने से गलत संदेश जाएगा और इससे जाँच पर असर पड़ सकता है या सबूत से छेड़छाड़ की संभावना बन सकती है। आदेश के बाद ईश्वर को पूजाप्पुरा जिला जेल भेज दिया गया।

रविवार को कई घंटे की पूछताछ के बाद ईश्वर को गिरफ्तार किया गया। शिकायत में कहा गया था कि वो कॉन्ग्रेस नेता संदीप वारियर जैसे कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर पीड़िता को बदनाम करने के लिए एक साइबर अभियान चला रहे थे। शुरुआत में उन्हें BNS की धारा 72 और 79 और IT एक्ट की धाराओं 43 और 46 के तहत बुक किया गया था। ये महिला की मर्यादा भंग करने और यौन शोषण की पीड़िता की पहचान उजागर करने से संबंधित हैं। रिमांड आदेश में कुछ और धाराएँ भी जोड़ी गई हैं, जिनमें BNS 75(1)(iv), 351(1), 351(2) और आईटी एक्ट की धारा 43 भी शामिल हैं।

इस केस में राहुल ईश्वर पाँचवें आरोपी हैं। उनके अलावा कॉन्ग्रेस नेता संदीप वारियर समेत चार अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। साइबर पुलिस ने पाँच लोगों पर केस दर्ज किया, जब पीड़िता ने शिकायत की कि उसकी निजी जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही है। ईश्वर और संदीप वारियर के अलावा जिन तीन लोगों पर केस दर्ज हुआ है उनमें महिला कॉन्ग्रेस नेता रेंजिता पुलिक्कन, दीप जॉसेफ और दीप मैथ्यू शामिल हैं।

FIR के मुताबिक, आरोपितों ने पीड़िता की फोटो समेत अन्य निजी जानकारी फेसबुक, यूट्यूब और दूसरे प्लैटफॉर्म्स पर शेयर कीं जिसके बाद उसे उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपितों के खिलाफ एक जैसी धाराएँ लगाई गई हैं। ईश्वर ने अपनी गिरफ्तारी को ‘पुरुषों की स्वतंत्रता की लड़ाई’ बताया और कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अपमान है।

सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यूट्यूब से कुछ वीडियो मिले हैं जिनमें कथित तौर पर ‘यौन टिप्पणियाँ’ की गई हैं। अभियोजन ने कहा कि राहुल को अभी रिहा किया गया तो जाँच रुक सकती है और अभी उनके अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी ट्रेस करना बाकी है। पुलिस ने यह भी बताया कि राहुल पर पहले भी मामले दर्ज रहे हैं और केस के बाकी आरोपित अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं।

राहुल ईश्वर की ओर से दलील दी गई कि पुलिस ने बिना वारंट गिरफ्तारी के लिए BNSS की धारा 35(1) के तहत जरूरी नोटिस सही तरीके से जारी नहीं किया। उनकी ओर से यह भी कहा गया कि जो एकमात्र नॉन-बेलेबल धारा 75(1)(iv) लगाई गई है, उसकी अधिकतम सजा सिर्फ एक साल है, इसलिए इसे ‘डिम्ड बेलेबल’ माना जाना चाहिए। बचाव पक्ष का यह भी दावा था कि ईश्वर ने ऑनलाइन कोई भी ‘यौन टिप्पणी’ नहीं की। इस पर अभियोजन ने कहा कि रिमांड रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा है कि नोटिस जारी न करने के पीछे क्या कारण थे।

कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलें खारिज कर दीं। मजिस्ट्रेट एल्सा कैथरीन जॉर्ज ने कहा कि केस रिकॉर्ड में शुरुआती तौर पर यह दिखता है कि धारा 75(1)(iv) के तहत अपराध से जुड़ी चीजें मौजूद हैं। कोर्ट ने कहा कि यौन हिंसा झेलने वाली पीड़िता के खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए अपमानजनक कमेंट्स को हल्के में नहीं लिया जा सकता, खासकर जब जाँच अभी चल रही हो। समय से पहले जमानत देने से जाँच बाधित हो सकती है या डिजिटल सबूत मिटाए जा सकते हैं।

गिरफ्तारी से ठीक पहले तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने राहुल ईश्वर का मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त कर लिया था। पुलिस अब यह जाँच कर रही है कि ममकूटाथिल के समर्थन में ऑनलाइन किस तरह की सामग्री शेयर की गई थी। इस मामले को लेकर संदेह इसलिए और भी गहर रहा है क्योंकि आरोपों के सामने आने के बाद से राहुल लगातार ममकूटाथिल का बचाव करते रहे हैं।