यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल (UNHRC) के 61वें सत्र में पाकिस्तान से भारत आए अल्पसंख्यक प्रवासियों की बदहाली का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया गया है। राजस्थान की संस्था ‘संभली ट्रस्ट’ की प्रतिनिधि लारा डेलुटिस ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले धार्मिक भेदभाव पर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।
लारा डेलुटिस ने बताया कि किस तरह असहनीय मजहबी प्रताड़ना के कारण लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित जीवन की तलाश में भारत आने को मजबूर हैं। मजहबी भेदभाव पलायन की बड़ी वजह जेनेवा में समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में लारा डेलुटिस ने कहा कि पाकिस्तान में धार्मिक आधार पर होने वाला भेदभाव अब असहनीय स्तर पर पहुँच गया है।
इसी कारण कई परिवार अपनी जान और सम्मान बचाने के लिए पलायन कर रहे हैं। उन्होंने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि वहाँ की संस्कृति ‘खुले दिल से अपनाने’ की है, जो शरणार्थियों को सुरक्षित महसूस कराती है।
संवाद और अपनत्व की जरूरत लारा के अनुसार, भारत में ‘नमस्ते’ जैसी छोटी सी पहल भी लोगों के बीच अपनापन और संवाद का बड़ा रास्ता खोलती है। उन्होंने विश्व समुदाय से अपील की कि वे भी इसी समावेशी भावना को अपनाएं। यह मुद्दा ऐसे समय में उठा है जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों के हनन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है।

