Thursday, September 24, 2020
Home विचार राजनैतिक मुद्दे जम्मू-कश्मीर में लद्दाख को अलग डिवीज़न बनाने के क्या मायने हैं

जम्मू-कश्मीर में लद्दाख को अलग डिवीज़न बनाने के क्या मायने हैं

लद्दाख क्षेत्र का भारत से भौगोलिक ही नहीं सांस्कृतिक जुड़ाव भी गहरा है। किंतु जम्मू कश्मीर राज्य की पूरी राजनीति सदैव कश्मीर केंद्रित रही है जिसका ख़ामियाज़ा लद्दाख को भुगतना पड़ा है।

सन 1947-48 में विश्व का सबसे बड़ा भूराजनैतिक परिवर्तन हो रहा था और इस परिवर्तन की धुरी था भारत का जम्मू कश्मीर राज्य। नवंबर 1948 में पाकिस्तानी फ़ौज की अगुआई में कबाईलियों ने ज़ोजिला दर्रे पर कब्जा कर लिया था जिसके कारण श्रीनगर से कारगिल द्रास होते हुए लेह तक जाने का मार्ग कट गया था। तब भारतीय सेना ने 11,500 फ़ीट की ऊँचाई पर टैंकों की तैनाती की और (तत्कालीन) मेजर जनरल थिमैय्या के नेतृत्व में भीषण युद्ध हुआ जिसे ‘बैटल ऑफ़ ज़ोजिला’ कहा जाता है।  

लगभग एक महीने तक चले इस युद्ध को जीतने के बाद ज़ोजिला दर्रे से पाकिस्तानियों को मार भगाया गया और लद्दाख पाकिस्तान के कब्जे में जाने से बच गया। ज़ोजिला की लड़ाई में केवल भारतीय सेना ने ही बलिदान नहीं दिया था अपितु लद्दाख के बौद्ध लामा 19वें कुशोक बकुला रिनपोछे ने युद्ध के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पाकिस्तानी आक्रमण के समय लद्दाखी जनता घबराई हुई कुशोक बकुला की ओर देख रही थी क्योंकि उसी समय से शेख अब्दुल्ला की मौकापरस्त राजनीति में लद्दाख कहीं नहीं था।

भारतीय सेना को ज़ोजिला की लड़ाई में स्थानीय युवकों की अत्यंत आवश्यकता थी क्योंकि वे लद्दाख के पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से परिचित थे। कुशोक बकुला ऐसे समय आगे आए और उन्होंने लद्दाख के युवाओं का एक संगठन बनाया जो नुब्रा गार्ड्स के नाम से प्रसिद्ध हुआ। नुब्रा गार्ड्स के सैनिकों ने पाकिस्तानी तोपें तबाह करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने पाकिस्तानियों को नुब्रा घाटी में आगे बढ़ने से रोके रखा।

इस प्रकार लद्दाख भारत का अंग बना रहा। यही नहीं सन 1962 के युद्ध में कुशोक बकुला ने बौद्ध मठों को भारतीय सेना के लिए अस्पताल बनाने की मंज़ूरी दे दी थी। जब कभी कश्मीर का एक वर्ग अलगाववाद और जनमत संग्रह की बात करता तब कुशोक बकुला उसका विरोध करते और कहते कि लद्दाख पाकिस्तान के साथ कभी नहीं जाएगा।  

- विज्ञापन -

उपरोक्त वर्णन से स्पष्ट है कि लद्दाख क्षेत्र का भारत से भौगोलिक ही नहीं सांस्कृतिक जुड़ाव भी गहरा है। किंतु जम्मू कश्मीर राज्य की पूरी राजनीति सदैव कश्मीर केंद्रित रही है जिसका ख़ामियाज़ा लद्दाख को भुगतना पड़ा है। यह स्थिति आज से नहीं बल्कि आधुनिक लद्दाख के निर्माता कहे जाने वाले कुशोक बकुला के समय से है। वास्तव में लद्दाख का क्षेत्रफल कश्मीर से अधिक है किंतु वहाँ की जनसंख्या बहुत कम है। लद्दाख की भौगोलिक स्थिति शेष जम्मू कश्मीर राज्य से भिन्न और अनोखी है इसीलिए उसे अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग लंबे समय से चल रही है।

जनसंख्या के आधार पर पूरे जम्मू कश्मीर राज्य को दो डिवीज़न में बाँटा गया था- जम्मू और कश्मीर। पहले लद्दाख के दो ज़िलों- कारगिल और लेह- का प्रशासन भी कश्मीर डिवीज़न द्वारा ही चलाया जाता था। श्रीनगर में बैठे डिविज़नल कमिश्नर मनमानी करते थे और लद्दाख की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते थे। सन 2010 में जब बादल फटा था और लद्दाख में बाढ़ आ गई थी तब राहत सामग्री के लिए लेह और कारगिल में बैठे दोनों डिप्टी कमिश्नर तब तक इंतज़ार करते रहे जब तक श्रीनगर से डिविज़नल कमिश्नर का आदेश नहीं आ गया।

दरअसल डिवीज़नल कमिश्नर के पास ही सारे अधिकार होते हैं और जब तक वहाँ से फंड रिलीज़ नहीं होता तब तक डिवीज़न में कोई विकास या राहत कार्य नहीं हो सकता। लद्दाख की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि छह महीने वहाँ बर्फ गिरती है जिसके कारण बाहरी दुनिया से सम्पर्क टूट जाता है। ऐसे में किसी भी प्रशासनिक आदेश के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

लद्दाख में रोजगार के अवसर कम हैं क्योंकि यह क्षेत्र शेष कश्मीर से अधिक पिछड़ा हुआ है। यहाँ फंड की कमी है जिसके कारण विकास कार्य बाधित होते हैं। विकास परियोजनाओं की चाभी श्रीनगर में बैठे डिविज़नल कमिश्नर के पास होती है जो कश्मीर घाटी की अलगाववादी राजनीति से प्रभावित होती है।

अब जब लद्दाख को एक अलग डिवीज़न बना दिया गया है तब वहाँ कश्मीर से अलग एक डिविज़नल कमिश्नर होगा, प्रत्येक विभाग का अलग डायरेक्टरेट होगा तथा वरीयता और अन्य मापदंडों के आधार पर प्रोन्नति में बाधा नहीं आएगी। सबसे बड़ी बात कि अब लद्दाख के लोगों को किसी भी प्रशासनिक कार्य के लिए श्रीनगर का मुँह नहीं देखना होगा। पहले श्रीनगर में बैठे अधिकारी अपने हिसाब से लद्दाख का प्रशासनिक कामकाज देखते थे और लद्दाख की समस्याओं की अनदेखी करते थे।  

राज्यपाल की मुहर के बाद अब लद्दाख डिविज़न का प्रशासनिक और रेवेन्यू मुख्यालय लेह में होगा जिसके बनने की तैयारी शुरू कर दी गई हैं। अब लेह में एक अलग डिविज़नल कमिश्नर और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस का पद और कार्यालय होंगे। साथ ही प्रिंसिपल सेक्रेटरी के निगरानी में एक टीम बनायी गई  है, जो अन्य प्रशासनिक विभागों के डिविज़नल ऑफिस, उसके अधिकारियों और स्टाफ की नियुक्ति और लागू करने का काम देखेंगे। इससे न सिर्फ लोगों को सुविधा होगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास में बढोत्तरी होगी। मुख्यालय खुलने से आसपास बिज़नेस की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

राज्यपाल के लद्दाख को अलग डिवीज़न बनाने के निर्णय के विरुद्ध कश्मीर के नेताओं की बिलबिलाहट भी दिखने लगी है। एक तरफ तो उनका वर्चस्व टूटा है दूसरी तरफ वे इससे खुलकर असहमति भी नहीं जता पा रहे हैं। आनन-फानन में नेताओं और पत्रकारों ने ट्वीट कर बेमन बधाई तो दी लेकिन असली भड़ास इन “किन्तु-परन्तु” और “but” जैसे शब्दों के साथ निकालनी शुरू कर दी गई हैं। अब इन्हें चेनाब और पीर पंजाल की याद भी आने लगी है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘काफिरों का खून बहाना होगा, 2-4 पुलिस वालों को भी मारना होगा’ – दिल्ली दंगों के लिए होती थी मीटिंग, वहीं से खुलासा

"हम दिल्ली के मुख्यमंत्री पर दबाव डालें कि वह पूरी हिंसा का आरोप दिल्ली पुलिस पर लगा दें। हमें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना होगा।”

पूना पैक्ट: समझौते के बावजूद अंबेडकर ने गाँधी जी के लिए कहा था- मैं उन्हें महात्मा कहने से इंकार करता हूँ

अंबेडकर ने गाँधी जी से कहा, “मैं अपने समुदाय के लिए राजनीतिक शक्ति चाहता हूँ। हमारे जीवित रहने के लिए यह बेहद आवश्यक है।"

…भारत के ताबूत में आखिरी कील, कश्मीरी नहीं बने रहना चाहते भारतीय: फारूक अब्दुल्ला ने कहा, जो सांसद है

"इस समय कश्मीरी लोग अपने आप को न तो भारतीय समझते हैं, ना ही वे भारतीय बने रहना चाहते हैं।" - भारत के सांसद फारूक अब्दुल्ला ने...

सुरेश अंगड़ी: पहले केन्द्रीय मंत्री, जिनकी मृत्यु कोरोना वायरस की वजह से हुई, लगातार 4 बार रहे सांसद

केन्द्रीय रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी कर्नाटक की बेलागावी सीट से 4 बार सांसद रह चुके थे। उन्होंने साल 2004, 2009, 2014 और 2019 में...

‘PM मोदी को हिन्दुओं के अलावा कुछ और दिखता ही नहीं’: भारत के लिए क्यों अच्छा है ‘Time’ का बिलबिलाना

'Time' ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी की शुरुआत में ही लिख दिया है कि लोकतंत्र की चाभी स्वतंत्र चुनावों के पास नहीं होती।

टाइम्स में शामिल ‘दादी’ की सराहना जरूर कीजिए, आखिर उनको क्या पता था शाहीन बाग का अंजाम, वो तो देश बचाने निकली थीं!

आज उन्हें टाइम्स ने साल 2020 की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों की सूची में शामिल कर लिया है। खास बात यह है कि टाइम्स पर बिलकिस को लेकर टिप्पणी करने वाली राणा अय्यूब स्वयं हैं।

प्रचलित ख़बरें

नेपाल में 2 km भीतर तक घुसा चीन, उखाड़ फेंके पिलर: स्थानीय लोग और जाँच करने गई टीम को भगाया

चीन द्वारा नेपाल की जमीन पर कब्जा करने का ताजा मामला हुमला जिले में स्थित नामखा-6 के लाप्चा गाँव का है। ये कर्णाली प्रान्त का हिस्सा है।

शो नहीं देखना चाहते तो उपन्यास पढ़ें या फिर टीवी कर लें बंद: ‘UPSC जिहाद’ पर सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़

'UPSC जिहाद' पर रोक को लेकर हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिनलोगों को परेशानी है, वे टीवी को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं।

‘ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे’: मौत से 5 दिन पहले सुशांत का परिवार को SOS

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मौत से 5 दिन पहले सुशांत ने अपनी बहन को एसओएस भेजकर जान का खतरा बताया था।

‘क्या आपके स्तन असली हैं? क्या मैं छू सकता हूँ?’: शर्लिन चोपड़ा ने KWAN टैलेंट एजेंसी के सह-संस्थापक पर लगाया यौन दुर्व्यवहार का आरोप

"मैं चौंक गई। कोई इतना घिनौना सवाल कैसे पूछ सकता है। चाहे असली हो या नकली, आपकी समस्या क्या है? क्या आप एक दर्जी हैं? जो आप स्पर्श करके महसूस करना चाहते हैं। नॉनसेंस।"

‘शिव भी तो लेते हैं ड्रग्स, फिल्मी सितारों ने लिया तो कौन सी बड़ी बात?’ – लेखिका का तंज, संबित पात्रा ने लताड़ा

मेघना का कहना था कि जब हिन्दुओं के भगवान ड्रग्स लेते हैं तो फिर बॉलीवुड सेलेब्स के लेने में कौन सी बड़ी बात हो गई? संबित पात्रा ने इसे घृणित करार दिया।

आफ़ताब दोस्तों के साथ सोने के लिए बनाता था दबाव, भगवान भी आलमारी में रखने पड़ते थे: प्रताड़ना से तंग आकर हिंदू महिला ने...

“कई बार मेरे पति आफ़ताब के द्वारा मुझपर अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने का दबाव बनाया गया लेकिन मैं अडिग रहीं। हर रोज मेरे साथ मारपीट हुई। मैं अपना नाम तक भूल गई थी। मेरा नाम तो हरामी और कुतिया पड़ गया था।"

व्यंग्य: बकैत कुमार कृषि बिल पर नाराज – अजीत भारती का वीडियो | Bakait Kumar doesn’t like farm bill 2020

बकैत कुमार आए दिन देश के युवाओं के लिए नोट्स बना रहे हैं, तब भी बदले में उन्हें केवल फेसबुक पर गाली सुनने को मिलती है।

‘गिरती TRP से बौखलाए ABP पत्रकार’: रिपब्लिक टीवी के रिपोर्टर चुनाव विश्लेषक प्रदीप भंडारी को मारा थप्पड़

महाराष्ट्र के मुंबई से रिपोर्टिंग करते हुए रिपब्लिक टीवी के पत्रकार और चुनाव विश्लेषक प्रदीप भंडारी को एबीपी के पत्रकार मनोज वर्मा ने थप्पड़ जड़ दिया।

‘काफिरों का खून बहाना होगा, 2-4 पुलिस वालों को भी मारना होगा’ – दिल्ली दंगों के लिए होती थी मीटिंग, वहीं से खुलासा

"हम दिल्ली के मुख्यमंत्री पर दबाव डालें कि वह पूरी हिंसा का आरोप दिल्ली पुलिस पर लगा दें। हमें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना होगा।”

मैं मुन्ना हूँ: उपन्यास पर मसान फिल्म के निर्माता मनीष मुंद्रा ने स्कैच के जरिए रखी अपनी कहानी

मसान और आँखों देखी फिल्मों के प्रोड्यूसर मनीष मुंद्रा, जो राष्ट्रीय पुरुस्कार प्राप्त निर्माता निर्देशक हैं, ने 'मैं मुन्ना हूँ' उपन्यास को लेकर एक स्केच बना कर ट्विटर किया है।

विदेशी फिदेल कास्त्रो की याद में खर्च किए 27 लाख रुपए… उसी केरल सरकार के पास वेलफेयर पेंशन के पैसे नहीं थे

केरल की सरकार ने क्यूबा के फिदेल कास्त्रो की याद में लाखों रुपए खर्च कर दिए। हैरानी की बात यह थी कि इतना भव्य आयोजन जनता के पैसों से...

पूना पैक्ट: समझौते के बावजूद अंबेडकर ने गाँधी जी के लिए कहा था- मैं उन्हें महात्मा कहने से इंकार करता हूँ

अंबेडकर ने गाँधी जी से कहा, “मैं अपने समुदाय के लिए राजनीतिक शक्ति चाहता हूँ। हमारे जीवित रहने के लिए यह बेहद आवश्यक है।"

…भारत के ताबूत में आखिरी कील, कश्मीरी नहीं बने रहना चाहते भारतीय: फारूक अब्दुल्ला ने कहा, जो सांसद है

"इस समय कश्मीरी लोग अपने आप को न तो भारतीय समझते हैं, ना ही वे भारतीय बने रहना चाहते हैं।" - भारत के सांसद फारूक अब्दुल्ला ने...

2 TV कलाकारों से 7 घंटे की पूछताछ, मुंबई के कई इलाकों में सुबह-सुबह छापेमारी: ड्रग्स मामले में आज फँस सकते हैं कई बड़े...

बुधवार के दिन समीर वानखेड़े और उनकी टीम ने दो टीवी कलाकारों को समन जारी किया था और उनसे 6 से 7 घंटे तक पूछताछ की गई थी।

सुरेश अंगड़ी: पहले केन्द्रीय मंत्री, जिनकी मृत्यु कोरोना वायरस की वजह से हुई, लगातार 4 बार रहे सांसद

केन्द्रीय रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी कर्नाटक की बेलागावी सीट से 4 बार सांसद रह चुके थे। उन्होंने साल 2004, 2009, 2014 और 2019 में...

‘PM मोदी को हिन्दुओं के अलावा कुछ और दिखता ही नहीं’: भारत के लिए क्यों अच्छा है ‘Time’ का बिलबिलाना

'Time' ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी की शुरुआत में ही लिख दिया है कि लोकतंत्र की चाभी स्वतंत्र चुनावों के पास नहीं होती।

हमसे जुड़ें

264,935FansLike
77,965FollowersFollow
323,000SubscribersSubscribe
Advertisements