Tuesday, October 27, 2020
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बिग बॉस और राधे माँ: स्वयंभू हिन्दुवादी चेहरों को पेश कर धर्म का उपहास करने की एक और स्क्रिप्ट क्यों?

यह भी कितना विकट संयोग है कि इस शो में कभी किसी अन्य मज़हब का स्वघोषित विशेषज्ञ नहीं नज़र आता है। धर्म के नाम पर जितना कुछ नज़र आता है वह सिर्फ हिन्दू है, चाहे कितना ही हास्यास्पद और मिथ्या क्यों न हो। इसके बावजूद इस धर्म की सहिष्णुता पर अक्सर सवाल खड़े किए जाते हैं।

इस बात पर बहस का कोई अंत नहीं है कि एक धर्म का बुनियादी ढाँचा बिगाड़ने के कितने प्रयास हुए थे और लगातार हो रहे हैं। इस स्वभाव के प्रयासों में अच्छी-भली आबादी शामिल है। राजनीति से लेकर मनोरंजन तक और छोटे परदे से लेकर बड़े परदे तक, सारा द्वेष सिर्फ एक शब्द से है ‘हिन्दू’। कहीं इस शब्द को कट्टरता का प्रतीक बताया जाता है तो कहीं इस शब्द की धुरी पर दोयम दर्जे के उदाहरण पेश किए जाते हैं। उदाहरण पेश करने वालों की लंबी सूची का मोटा नाम है ‘बिग बॉस’

यह तर्क बहुत से लोगों के लिए विचित्र होगा कि आखिर एक मनोरंजन परोसने वाला रियलिटी शो हिन्दू शब्द का मज़ाक कैसे बना सकता है? इसका प्रश्न का जवाब असल में उतना कठिन भी नहीं है, जितना पहली बार में नज़र आता है। यह प्रयास दशकों पुराने भी नहीं है जो कालान्तर में भुला दिए गए हों, सबसे बड़ी समस्या यही है कि सारे उपक्रम हाल फ़िलहाल के हैं

टीवी की दुनिया के सबसे चर्चित कार्यक्रमों में एक बिग बॉस के पिछले कुछ सीज़न पर गौर करिए। हिन्दू धर्म के ऐसे नुमाइंदे ही बुलाए गए जिन्होंने लाखों-करोड़ों लोगों के सामने धर्म की ऐसी तस्वीर पेश की जिस पर एक आम इंसान खीझने के अलावा कुछ और नहीं कर सकता है। 

इस बार बिग बॉस के सीज़न 14 का प्रसारण शुरू होने ही वाला है। इस सीज़न की शुरुआत सुखविंदर कौर उर्फ़ ‘राधे माँ’ नज़र आने वाली हैं। यह कौन हैं इस बारे में लगभग सभी जानते हैं और यह क्या करती हैं यह फ़िलहाल चर्चा का विषय नहीं है। इनके नाम ही स्पष्ट है कि यह अपना चित्रण किस तरह करती हैं, इनके तमाम साक्षात्कारों के वीडियो मौजूद हैं। 

जिन वीडियो में वह खुद को देवी तुल्य बताती हैं और अक्सर अपने तथाकथित भक्तों के साथ नृत्य भी करती हैं। राधे माँ की धार्मिक और सात्विक मौलिकता कितनी है इस बारे में एक बहुत बेहतर उदाहरण है। साल 2017 में आखाड़ा परिषद ने नकली धर्म गुरुओं और बाबाओं की सूची तैयार की थी, जिसमें सुखविंदर कौर उर्फ़ राधे माँ का नाम भी शामिल था।       

सीज़न 10 को याद कीजिए। स्वामी ओम, खुद ही सोचिए कि 2016 के पहले इस नाम से कितने लोग परिचित थे। एक ऐसा व्यक्ति जिसके गले में रुद्राक्ष की मालाएँ हैं, जिसने टीका लगा रखा है, वह खुद को धर्म का विशेषज्ञ बताता है और धर्म को लेकर ऐसे दावे करता है, जिन्हें सुन कर एक आम इंसान का धर्म से विश्वास उठ जाए। सभी जानते हैं कि बिग बॉस देखने वालों की संख्या लाखों में है। 

ऐसे में कल्पना करिए एक स्वघोषित हिन्दू धर्म के नुमाइंदे ने हिन्दू शब्द के इर्द-गिर्द किस तरह की लकीर खींची। बिग बॉस के बाद भी स्वामी ओम ने मूर्खता भरी हरकतों का साथ नहीं छोड़ा। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए जिसमें लोग उसे बुरी तरह पीट रहे हैं या खुद उसकी बातों का मज़ाक बना रहे हैं। यह तो केवल एक उदाहरण है। ऐसे कई और नमूने हैं। 

बिग बॉस का सीज़न 11, जिसमें शिवानी दुर्गा नाम की तथाकथित महिला तांत्रिक आई थीं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ इन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय से पीएचडी की है और उसके बाद अघोर तंत्र की दीक्षा ली। उज्जैन के सिंहस्थ के दौरान उनका नाम विवादों से जुड़ा था। वह बिग बॉस में बहुत समय तक नही थीं, लेकिन जितने समय थीं उस दौरान इन्होंने कोई ऐसी नज़ीर नहीं पेश की जो धर्म के हित में होती। उल्टा बिग बॉस में रहते हुए इनके क्रियाकलापों के तमाम वीडियो चर्चा का कारण बने रहे। 

इस बात को लेकर अक्सर दावे होते रहते हैं कि बिग बॉस तय स्क्रिप्ट पर चलने वाला शो है। अगर इस दावे में ज़रा भी सच्चाई है तो उसका मतलब यही है कि धर्म के तथाकथित नुमाइंदे जितनी भी बातें करते हैं सब पहले से तय होती हैं। इस प्रक्रिया में एक बात की परवाह कतई नहीं की जाती है कि धर्म जैसे अहम विषय पर कही जाने वाली बातों में कितनी गंभीरता है। या उस बात से धर्म की छवि पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

बेशक किसी धर्म का प्रतिनिधित्व ऐसे लोगों के माथे नहीं हो सकता है। लेकिन देखने वालों के बीच धर्म को लेकर निराधार और हास्यास्पद संदेश ही जाता है। यह भी कितना विकट संयोग है कि इस शो में कभी किसी मज़हब विशेष का स्वघोषित विशेषज्ञ नहीं नज़र आता है। धर्म के नाम पर जितना कुछ नज़र आता है वह सिर्फ हिन्दू है, चाहे कितना ही हास्यास्पद और मिथ्या क्यों न हो। इसके बावजूद इस धर्म की सहिष्णुता पर अक्सर सवाल खड़े किए जाते हैं।    

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