Tuesday, January 26, 2021
Home विचार सामाजिक मुद्दे एक नारे से क्या होता है? 'राम लला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे' भी...

एक नारे से क्या होता है? ‘राम लला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे’ भी एक नारा ही था…

पक्ष के लोग या कहें कि भक्त इसे उत्साहवर्धन के लिए लगाते रहे, और विपक्ष के लोग या कहें कि कमभक्त इसे मजाक उड़ाने के लिए इस्तेमाल करते रहे। मध्यप्रदेश के राजगढ़ से एम कॉम कर रहे छात्र ने बजरंग दल के एक शिविर में जब ये नारा लगाया, तो फिर ये नारा रुका ही नहीं। नारा था – 'राम लला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे!"

कई बार कहा जाता है कि नारों से क्या होता है? हाल में जब दिल्ली के किसी विश्वविद्यालय में लगे नारों का मामला पुलिस तक पहुँचा और देशभर में उनकी फजीहत होने लगी, तो कुछ लोगों ने कहा कि भला यूनिवर्सिटी के छात्रों के नारों से क्या असर होगा?

ऐसे ही कुछ भी बोल गए होंगे, जाने देना चाहिए। ऐसा कहने या सोचने वालों की इतिहास की जानकारी या तो कम होती है, या फिर वो शुद्ध धूर्तता कर रहे होते हैं। बरसों पहले 1986 में एम कॉम की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने भी नारा लगाया था। करीब पैंतीस वर्ष पहले लगा ये नारा आज तक भारत में गूँज रहा है।

पक्ष के लोग या कहें कि भक्त इसे उत्साहवर्धन के लिए लगाते रहे, और विपक्ष के लोग या कहें कि कमभक्त इसे मजाक उड़ाने के लिए इस्तेमाल करते रहे। मध्यप्रदेश के राजगढ़ से एम कॉम कर रहे छात्र ने बजरंग दल के एक शिविर में जब ये नारा लगाया, तो फिर ये नारा रुका ही नहीं। नारा था – ‘राम लला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे!”

विपक्षी कमभक्तों ने इसमें ‘तारिख नहीं बताएँगे!’ जोड़कर इसका चुटकुला भी बनाना चाहा। ये उनके पूज्य गोएबेल्स की एक प्रचलित तकनीक है, जिसमें विपक्षी के तर्कों का जवाब देने के बदले उनका मजाक बनाया जाता है। कमभक्तों ने गोएबेल्स से अच्छी शिक्षा पाई थी, और काफी सफलतापूर्वक गोएबेल्स की तकनीक का इस्तेमाल करने की कोशिश भी की।

उस वक्त के छात्र बाबा सत्यनारायण मौर्य अब पचपन साल के हैं। उन्होंने छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में मंच संचालन भी किया था। उस वक्त वो आन्दोलन में प्रचार प्रमुख की भूमिका में थे। अयोध्या में उस दौर में दीवारों पर लिखे नारों और श्री राम और हनुमान जी के चित्रों में भी उनका काफी योगदान था।

वो अब भी पेंटिंग करते हैं और थोड़े दिनों में शायद उनकी प्रदर्शनी अयोध्या में भी होगी। लेकिन बात तो हम नारों की कर रहे थे। इन नारों में भी विशेष तौर पर ‘जय श्री राम’ के या इससे मिलते-जुलते दूसरे नारों से कई वर्गों को खासी समस्या रही है। कुछ मक्कार तो इसे श्री राम का नाम खराब करने की साजिश तक बताते रहे हैं।

राजपुताना रायफल्स का अस्तित्व जनवरी 10, 1775 है। भारतीय सेना के इस अंग के शौर्य की गाथाएँ और पदक तो अनगिनत हैं, लेकिन देखने योग्य उनका युद्ध उद्घोष है। वो ‘राजा रामचंद्र की जय’ के उद्घोष के साथ युद्ध में उतरते हैं। तो जैसा कि कुछ लोग साबित करना चाहते हैं, वैसे श्री राम का नाम कोई 1990 के दौर में युद्ध उद्घोष भी नहीं बना।

दूसरे तरीकों से भी देखें तो ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ लंका दहन करते हनुमान जी या लंका पर आक्रमण करती वानर सेना को लोग 1990 से थोड़ा पहले ही, रामानंद सागर के रामायण में देख चुके थे। ये अलग बात है कि कुछ लोगों ने इस नारे से चिढ़ना शुरू कर दिया तो बंगाल में ये नारा कई बार सुनाई दिया।

एक कोई लल्लू-पंजू से पोस्टर बॉय भी इस नारे को नारी विरोधी सिद्ध करने के प्रयास में ‘जय सियाराम’ कहने की वकालत करते दिखे थे। वैसे तो वो खुद स्त्रियों के साथ अभद्रता करने के कारण जुर्माना भर चुके हैं लेकिन हम नारे तक ही सीमित रहेंगे।

यहाँ गौर करने लायक ये है कि आप बड़ी आसानी से श्री राम या श्री कृष्ण कह सकते हैं। क्या उतना ही सुविधाजनक श्री को शिव, शंकर, महादेव या ब्रह्मा के आगे लगाना लगता है, या शिव जी, शंकर जी, ब्रह्मा जी कहना ठीक लगता है?

इसका साधारण सा कारण ये है कि ‘श्री’ लक्ष्मी का भी एक नाम होता है। इसलिए विष्णु के अवतारों के आगे तो वो आसानी से जुड़ता है, बाकियों पर जबतक किसी विशेष गुण को ना दर्शा रहा हो, तब तक नहीं जोड़ा जाता। तो जय सिया राम कहें या जय श्री राम, स्त्री का नाम पहले आ ही जाता है।

नारों, नामों, या प्रतीकों की महत्ता भारतीय तरीके से समझनी हो तो ‘राम से बड़ा राम का नाम’ वाली उक्ति याद रखिए। अगर इससे समझ ना आए तो ‘स्वास्तिक’ के प्रतीक को देखिए। हिटलर इससे मिलते-जुलते एक इसाई प्रतीक, मुड़े हुए क्रॉस (हकेन-क्रूज़) का इस्तेमाल करता था।

धूर्ततापूर्ण तरीके से इसे जबरन हिन्दुओं का ‘स्वास्तिक’ नाम दे दिया गया। इतने वर्षों में किसी ने विरोध नहीं किया, इसलिए कमभक्त इसे ‘स्वास्तिक’ घोषित करने में कामयाब भी हो गए। आज कई देशों में हकेन-क्रूज से मिलते जुलते दिखने वाले ‘स्वास्तिक’ के प्रयोग के लिए अकारण प्रताड़ित भी किया जाता है।

कुछ ऐसी ही नीचता, भक्त शब्द के साथ करने का (गोएबेल्स के नेमकालिंग वाला) करने का प्रयास तो हम सभी ने हाल ही में देखा है। बाकी जैसे-जैसे तिथि नजदीक आती जा रही है, कई लोग अगस्त में ही दीपावली मानाने की तैयारी में भी दिखते हैं। वैसे इससे हमें दूसरा वाला नारा – काशी-मथुरा बाकी है, याद आ जाता है, मगर उससे दीयों के बजाए कुछ और ही जलने लगेगा! नहीं?

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Anand Kumarhttp://www.baklol.co
Tread cautiously, here sentiments may get hurt!

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

प्रचलित ख़बरें

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

12 साल की लड़की का स्तन दबाया, महिला जज ने कहा – ‘नहीं है यौन शोषण’: बॉम्बे HC का मामला

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने शारीरिक संपर्क या ‘यौन शोषण के इरादे से किया गया शरीर से शरीर का स्पर्श’ (स्किन टू स्किन) के आधार पर...

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

बाराबंकी में दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी।

तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।

राहुल गाँधी बोले- किसान मजबूत होते तो सेना की जरूरत नहीं होती… अनुवादक मोहम्मद इमरान बेहोश हो गए

इरोड में राहुल गाँधी के अंग्रेजी भाषण का तमिल में अनुवाद करने वाले प्रोफेसर मोहम्मद इमरान मंच पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।
- विज्ञापन -

 

लालकिला में देर तक सहमें छिपे रहे 250 बच्चे, हिंसा के दौरान 109 पुलिसकर्मी घायल; 55 LNJP अस्पताल में भर्ती

दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। किसानों द्वारा की गई इस हिंसा में 109 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, जिनमें से 1 की हालात गंभीर बताई जा रही है।

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

‘RSS नक्सलियों से भी ज्यादा खतरनाक, संघ समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं’: कॉन्ग्रेसी सांसद और CM भूपेश बघेल का ज्ञान

कॉन्ग्रेस के सीएम भूपेश ने कहा कि आरएसएस के समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं। महात्मा गाँधी की हत्या कैसे किया गया था? पहले पैर छुए फिर उनके सीने में गोली मारी।

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

‘लाल किले पर लहरा रहा खालिस्तान का झंडा- ऐतिहासिक पल’: ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने मनाया ‘ब्लैक डे’

गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर 'खालिस्तानी झंडा' फहराने को लेकर ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (APML) काफी खुश है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा स्थापित पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टी ने इसे 'ऐतिहासिक क्षण' बताया है।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

देशी-विदेशी शराब से लदी मिली प्रदर्शनकारी किसानों की ट्रैक्टर: दिल्ली पुलिस ने किया सीज, देखें तस्वीरें

पुलिस ने शराब से भरे एक ट्रैक्टर को सीज किया है। सामने आए फोटो में देखा जा सकता है कि पूरा ट्रैक्टर शराब से भरा हुआ है। यानी कि शराब के नशे में ट्रैक्टरों को चलाया जा रहा है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
386,000SubscribersSubscribe