Saturday, May 18, 2024
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8 साल, 150 बार रेप, मामला निकला झूठा… ‘शादी का झाँसा देकर बलात्कार’ वाले केस कितने सही? प्रेम करना हो जाएगा मुश्किल, FIR होते अपराधी बन जाता है पुरुष

अगर दो वयस्क महिला-पुरुष आपस में यौन संबंध बनाते हैं और बाद में उनमें कोई लड़ाई-झगड़ा होता है, तो क्या इसे बलात्कार माना जाएगा। यहकि तब, जब महिला यौन सम्बन्ध बनाने के दौरान पुरुष के साथ पूरी तरह से सहमति में रही हो।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मलयाली युवक के विरुद्ध दर्ज की गई बलात्कार की एक FIR को रद्द कर दिया। युवक पर उसकी पूर्व प्रेमिका ने 150 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया था। युवक का कहना था कि उसने कभी महिला से यौन सम्बन्ध बनाए ही नहीं और इसकी पुष्टि मेडिकल जाँच में भी हुई। इस तरह यह मलयाली युवक बलात्कार के आरोप के दाग से मुक्ति पा सका। इस मामले की गहराई में जाने पर पता चला कि यह 2016 से ही चला आ रहा था, ऐसे में उस युवक को 8 वर्षों तक यह आरोप झेलना पड़ा।

उपरोक्त बताए गए मामले में जब युवक ने हाई कोर्ट के सामने कथित पीड़िता की मेडिकल जाँच रखी तो पता चला कि वह ‘वर्जिन’ थी। यानी जिस महिला के साथ कभी यौन संबंध बनाए ही ना गए हों, उसने एक पुरुष पर 150 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया। इससे भी ज्यादा हास्यास्पद यह है कि यह सिद्ध होने के बाद भी हाई कोर्ट ने उस युवक को कोई राहत नहीं दी जिस पर बलात्कार का आरोप था। कोर्ट ने महिला के बयान को ही पत्थर की लकीर माना।

‘150 बार बलात्कार’, ‘शादी का झांसा देकर किया रेप’, ‘महिला को धोखे में रख करता रहा रेप’ जैसी हेडलाइन्स बीते कुछ सालों में काफी सुनी गई हैं। यदि आप कोई भी अखबार उठाएँगे तो रोज आपको ऐसे 2-3 मामले मिलेंगे ही। नारी सशक्तिकरण के लिए कानून और नारियों के पक्ष में न्यायिक निर्णयों के चक्कर में पुरुष ऐसे मामले में अपने आप को दोयम दर्जे का नागरिक समझते हैं। सोशल मीडिया पर बड़े स्तर पर इस बात पर चर्चा होती है कि क्या किसी महिला के आरोप भर लगा देने से कोई पुरुष बलात्कारी हो जाएगा। इससे कई प्रश्न खड़े हुए हैं।

तय करनी होगी बलात्कार की परिभाषा

भारत एक परम्पराओं वाला देश है। हमारे समाज में बड़े पैमाने पर शादी से पहले लड़का-लड़की के यौन सम्बन्ध बनाने को सही नहीं समझा जाता। लेकिन बढ़ते आधुनिकीकरण के चलते यह भावना नेपथ्य में चली गई है। सामान्य रूप से यदि बलात्कार की बात की जाए तो यदि कोई पुरुष किसी महिला के साथ जोर जबरदस्ती से, उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन सम्बन्ध बनाता है, तो इसे बलात्कार माना जाता है। यह महिला कोई भी हो सकती है, किसी पुरुष की प्रेमिका भी हो सकती है।

लेकिन अगर दो वयस्क महिला-पुरुष आपस में यौन संबंध बनाते हैं और बाद में उनमें कोई लड़ाई-झगड़ा होता है, तो क्या इसे बलात्कार माना जाएगा। यहकि तब, जब महिला यौन सम्बन्ध बनाने के दौरान पुरुष के साथ पूरी तरह से सहमति में रही हो।

यदि कोई पुरुष यह जाने कि जिस महिला के साथ वह प्रेमवश आज यौन संबंध बना रहा है, वह भविष्य में बलात्कार माना जाएगा, तो क्या वह ऐसा करेगा। यदि महिला ने यौन संबंध बनाने के समय सहमति दे दी है, इस पूरे मामले में शामिल है, तो भला एक समय के बाद वह कैसे यह जान पाएगी कि यह बलात्कार था।

क्या सिर्फ इस आधार पर कि महिला अब उक्त पुरुष के साथ संबंध नहीं रखना चाहती या गुस्सा है, के कारण उसकी पूर्व में यौन संबंध के लिए दी गई सहमति को वापस लिया माना जाए और इसे बलात्कार का नाम दिया जाए। महिला के एक समय पर राजी ख़ुशी यौन संबंध बनाने और उसे बाद में बलात्कार का नाम देने को लेकर कोर्ट को यह तय करना होगा कि इसे क्या माना जाए, इसे बलात्कार की श्रेणी में रखा जाए या नहीं। यह मामला तो संबंध विच्छेद का होता है।

‘शादी का झांसा देकर रेप’ जैसी शिकायतों की भी हो गहराई से जाँच

आजकल सामने आ रहे बलात्कार के मामलों में सबसे अधिक यह सुनने को मिलता है कि एक पुरुष ने शादी का झांसा देकर किसी महिला से कई वर्षों तक रेप किया। बाद में पुरुष अपने वादे से मुकर गया। इन मामलों की भी गहराई से जाँच की आवश्यकता है।

इसमें मूल प्रश्न है कि यदि शादी के वादे के आधार पर ही यौन सम्बन्ध बनाए जाने थे तो इसको लेकर महिला को भी विचार करना चाहिए था। दूसरा प्रश्न उठता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से किए गए वादे से मुकरता है तो यह मामला धोखाधड़ी का बनता है ना कि बलात्कार का।

इस मामले में भी वही मूल प्रश्न आता है कि क्या महिला ने पहले यौन संबंध बनाने की सहमति दी और बाद में जब बात नहीं बनी तो संबंध को बलात्कार का नाम दे दिया। यानि क्या यौन सम्बन्धों के लिए दी गई सहमति बाद में वापस ली जा सकती है।

इनमें से कई मामलों में ऐसा होता है कि जिस महिला ने पुरुष के खिलाफ बलात्कार की FIR करवाई होती है, वह उसी से विवाह कर लेती है। ऐसे में प्रश्न उठाया जाना चाहिए कि क्या कोई महिला अपने बलात्कारी से विवाह कर सकती है, और यदि कोई महिला बलात्कारी से विवाह करती है तो फिर वह व्यक्ति बलात्कारी क्यों माना जाए।

शादी का झांसा देकर बलात्कार के मामलों में किसी पुरुष को अपराधी घोषित करने से पहले इस बात की जाँच होनी चाहिए कि महिला ने यह आरोप किस आधार पर लगाए हैं। कहीं वह सिर्फ इस बात से गुस्सा तो नहीं कि उसकी उक्त पुरुष से शादी नहीं हो पाई या उनके रिश्ते में खटास आ गई है।

दूसरी बात यह भी है कि भारत में महिलाओं को झांसा दिए जाने को लेकर विचार भी करना होगा। झांसा आर्थिक मामले में दिया जा सकता है, शादी एक भावनात्मक वादा है, इसका झांसा कैसे दिया जा सकता है। महिलाओं को भी किसी भी पुरुष से मात्र शादी के वादे बात के आधार पर यौन संबंध बनाने को लेकर सतर्क होना होगा।

सिर्फ FIR/बयान के आधार पर ना मान लिया जाए पुरुष को अपराधी

बलात्कार के आरोप लगाने के मामले में अक्सर ऐसा सामने आता है कि मात्र आरोप भर लगने से ही पुरुष को अपराधी घोषित कर दिया जाता है। उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूल में मिल जाती है। कई मामलों में ऐसे पुरुषों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ता है और उन्हें दुनिया उन्हें अपराधी की नजर से देखती है।

कई शिकायतों में कहा जाता है कि पुरुष ने महिला का 100 बार बलात्कार किया, लगातार तीन-चार साल बलात्कार करता रहा। सामान्य पाठक जब ऐसी खबरें पढ़ता है तो वह आरोपित की दुर्दांत छवि मन में बनाता है। ऐसा पाठक सोचता है कि इस पुरुष ने 3 साल महिला को परेशान किया। असल में मामला यह होता है कि महिला-पुरुष इस अवधि के दौरान प्रेम संबंध में रहे होते हैं और तब यौन संबंध आपसी सहमति से बन रहे होते हैं, इसे बाद में बलात्कार के रूप में पेश कर दिया जाता है।

सिर्फ FIR या महिला के बयान के आधार पर ही पुरुष को अपराधी मान लेने से जो हानि उसे होती है, उसके निर्दोष साबित होने के बाद इसकी भरपाई नहीं हो पाती है। भारत में कोई तब तक हत्या का भी अपराधी नहीं माना जाता जब तक कोर्ट इस बात को लेकर उसे दोषी ना सिद्ध कर दे लेकिन बलात्कार के मामलों में पहले ही पहले ही पुरुषों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है। कई पुरुष ऐसे मामलों में कई वर्षों की सजा भी काट लेते हैं।

हाल ही में बरेली में एक ऐसा ही मामला सामने आया जहाँ एक महिला ने 2019 में एक पुरुष को बलात्कार और अपहरण के फर्जी मामले में फंसा दिया था। इस व्यक्ति को 4 साल से अधिक की सजा भी काटनी पड़ी। बाद में महिला अपने आरोपों से पलट गई। कोर्ट ने महिला को उतने ही दिनों की सजा सुनाई जितनी सजा बेकसूर पुरुष को काटनी पड़ी थी।

झूठी FIR पर हो कार्रवाई, मुआवजे का हो प्रावधान

बलात्कार के मामले इतने जघन्य होते हैं और इनमें कार्रवाई का दबाव पुलिस पर अधिक होता है। ऐसे में कई मामलों में बिना जाँच के ही आरोपितों को पकड़ लिया जाता है, उन पर कार्रवाई की जाती है। इसका फायदा उठा कर कई महिलाओं ने इसे एक धंधा बनाया है। वह पहले किसी पुरुष से दोस्ती और मेल मिलाप बढ़ाती हैं, इसके बाद उसके खिलाफ बलात्कार के मामले में FIR दर्ज करवा देती हैं, ऐसा ना करने के लिए पैसे माँगे जाते हैं।

मध्य प्रदेश के जबलपुर की एक ऐसी ही महिला को हाल ही में गिरफ्तार किया गया था जो कि अमीर युवकों से पहले मेलजोल बढ़ाती थी। इसके बाद उनके खिलाफ बलात्कार की FIR करवा देती थी, उनसे पैसे ऐंठती थी। इसका नाम सोनिया था, इसने आधे दर्जन से ऐसे फर्जी मामले दर्ज करवाए थे। यदि कोर्ट बलात्कार के मामले में कड़ी सजा दे रहा है तो उसे यह भी पक्का करना होगा कि जो महिलाएँ इन कानूनों का फायदा उठा रही हैं, उनको सजा दिया जाए। उनसे जुर्माना वसूल किया जाए और उन पुरुषों को दिया जाए जिनकी प्रतिष्ठा धूमिल किया जाए।

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अर्पित त्रिपाठी
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