गुरदासपुर: BJP द्वारा सनी देओल पर भरोसा जताने के पीछे हैं ये 5 कारण, कॉन्ग्रेस खेमे में खलबली

विनोद खन्ना की मृत्यु, प्रदेश में भाजपा-अकाली गठबंधन की बुरी हार और फिर उपचुनाव में मिली मात के बाद यहाँ भाजपा कार्यकर्ता घरों में बैठ गए थे। सनी देओल की एंट्री की ख़बर सुनते ही गुरदासपुर के कार्यकर्ताओं ने...

जैसा कि सर्वविदित है, अस्सी और नब्बे के दशक में सुपरस्टार का रुतबा रखने वाले सनी देओल को भाजपा ने गुरदासपुर से टिकट दिया है। उनके भाजपा में शामिल होने के बाद ही यह तय हो गया था कि विनोद खन्ना की विरासत संभालने की ज़िम्मेदारी उन्हें दी जा सकती है। सनी देओल ने भाजपा में शामिल होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी के साथ अपने पिता और गुज़रे ज़माने के सुपरस्टार धर्मेंद्र के संबंधों का ज़िक्र किया। विकास को अपनी प्राथमिकता बताते हुए सनी ने अगले पाँच साल के लिए पीएम मोदी की ज़रूरत पर प्रकाश डाला। सनी देओल ने सुलझे हुए अंदाज़ में अपनी बातें रखीं। भले ही परदे पर वो चिल्लाने के लिए मशहूर हैं लेकिन असल ज़िंदगी या मीडिया में शायद ही हमने उन्हें किसी पर चिल्लाते देखा हो। वो शांति से बोलते हैं, मुस्कराहट के साथ अपनी बात रखते हैं और फ़िल्मी दर्शकों के एक बड़े वर्ग में अभी भी उतने ही लोकप्रिय हैं।

सनी देओल के सिनेमाई सफर के बारे में सभी को पता है और उनकी फ़िल्मों के डायलॉग्स अभी भी ख़ासे प्रसिद्ध हैं। उनकी स्क्रीन प्रजेंस सबसे ज्यादा दमदार होती आई है, यही कारण है कि दामिनी में उनके गेस्ट रोल को भी बढ़ाना पड़ा और उन्होंने फ़िल्म में जान डाल दी। भाजपा सनी देओल की इमेज को अब पंजाब में भुनाएगी। यहाँ सनी देओल के मैदान में उतरने से न सिर्फ़ गुरदासपुर बल्कि पूरे पंजाब में पार्टी उनके चेहरे का प्रयोग करेगी। सनी देओल की सबसे हिट फ़िल्म ग़दर में उन्होंने एक पंजाबी का ही किरदार अदा किया था। फ़िल्म पंजाब में इतनी लोकप्रिय हुई थी कि सिनेमाघरों को सुबह से ही इसे चलाना पड़ता था। अब ग़दर के 19 वर्षों बाद सनी देओल फिर से लोगों के बीच उसी अंदाज़ में लौटे हैं लेकिन माध्यम अब सिनेमा नहीं है, राजनीति है।

कॉन्ग्रेस गुरदासपुर में सनी देओल का काट ढूँढने में लग गई है। मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ख़ुद घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए हैं। पार्टी की पंजाब में माँग है कि गुरदासपुर में प्रियंका चोपड़ा या प्रीति ज़िंटा को चुनाव प्रचार के लिए बुलाया जाए। प्रियंका ने सनी की फ़िल्म से ही बॉलीवुड में क़दम रखा था और प्रीति के साथ भी उनके अच्छे सम्बन्ध हैं, ऐसे में असमंजस में पड़ी कॉन्ग्रेस शायद ही ऐसा कोई सेलिब्रिटी ढूँढ पाए जो उनके लिए सनी के ख़िलाफ़ प्रचार करे। पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे सुनील कुमार जाखड़ ने इस सीट को उपचुनाव में जीत तो लिया था लेकिन स्थानीय स्तर पर बड़ा क़द होने के बावजूद सनी देओल की उम्मीदवारी से उनके कैडर में बेचैनी है। आइए सबसे पहले देखते हैं भाजपा द्वारा सनी देओल को इस क्षेत्र से उतारने के पीछे रहे 5 कारण।

आतंक से पीड़ित रहे बॉर्डर इलाके में सनी की राष्ट्रवादी छवि

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

गुरदासपुर क्षेत्र भारत और पाकिस्तान की सीमा पर स्थित है। यहाँ अक्सर आतंकी हमले होते रहे हैं। भले ही नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद भारत के अंदरूनी शहरों में कोई आतंकी वारदात न हुई हो लकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में हालात अभी भी बहुत अच्छे नहीं हैं। 2015 में दीनानगर पुलिस स्टेशन पर हमला हुआ था। इस हमले में 4 पुलिस के जवान व 3 नागरिकों की जान चली गई थी। 3 आतंकियों को भी मार गिराया गया था। इसी तरह 2016 में पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हमला हुआ। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में गुरदासपुर के 1 जवान के वीरगति को प्राप्त हो जाने के बाद क्षेत्र के लोगों में आतंकियों व पाकिस्तान के प्रति ख़ासा रोष है। शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पीएम मोदी के नाम खुला पत्र लिखकर आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की थी।

भारत द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकी कैम्पों पर एयर स्ट्राइक के बाद आमजनों के मन में रोष कम हुआ और वर्तमान सरकार में भरोसा भी जगा। इसके बाद लोगों में एक उम्मीद बँधी कि अगर कुछ ऐसा-वैसा होता है तो सरकार के पास जवाब देने के लिए इच्छाशक्ति है। गुरदासपुर के लोगों के बीच सनी देओल देओल को अपनी राष्ट्रवादी इमेज का फ़ायदा मिलेगा। ग़दर, इंडियन और द हीरो जैसी फ़िल्मों के कारण सनी की छवि एक राष्ट्रवादी की है जो भाजपा की विचारधारा से भी मेल खाती है। पाकिस्तान से सटे सीमा क्षेत्र में सनी की मौजूदगी से वहाँ की जनता ख़ुश होगी। भारत-पाकिस्तान (पाकिस्तान की हरकतों के कारण) तनाव के माहौल में गुरदासपुर में सनी की उपस्थिति से भाजपा को भी फ़ायदा होगा।

विनोद खन्ना की अच्छी छवि और उनकी विरासत

विनोद खन्ना ने 1998, 1999 और 2004 में जीत दर्ज कर इस सीट पर हैट्रिक बनाई थी। विनोद खन्ना गुरदासपुर के राजनीतिक पटल पर 20 वर्षों तक सक्रिय रहे। पहली बार 1998 में 1 लाख से भी अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज करने वाले खन्ना ने 2014 में वही करिश्मा दुहराया। बीच में वो केवल 2009 में हारे लेकिन उनकी जीत का अंतर हमेशा कम ही रहा। लेकिन, यहाँ एक बात जानने लायक है कि विनोद खन्ना की गुरदासपुर में अच्छी छवि 2009 में उनके हारने के बाद बनी। हार के बावजूद उन्होंने क्षेत्र को नहीं छोड़ा, जैसा कि अन्य सेलिब्रिटी करते हैं। पटना में शत्रुघ्न सिन्हा से इसी चीज को लेकर लोगों की नाराज़गी है। ऐसा कई क्षेत्रों में हुआ है जब जीतने या हारने के बाद सेलेब्रिटीज इलाके में कभी गए ही नहीं। इससे वहाँ की जनता के बीच सेलेब्रिटीज को लेकर नेगेटिव छवि बनी। लेकिन, गुरदासपुर में मामला अलग है।

2009 में हारने के बावजूद विनोद खन्ना ने क्षेत्र के लिए कई बड़े कार्य किए और पुलों का निर्माण करवाया। उन्होंने जनता से संवाद बनाए रखा। यही कारण था कि जिस प्रताप सिंह बाजवा ने उन्हें 2009 में मात दी थी, उसी बाजवा को 2014 में उन्होंने परास्त किया। इसमें कोई शक नहीं कि बीमारी के कारण अगर उनकी असमय मृत्यु नहीं होती तो अभी गुरदासपुर से वे ही भाजपा उम्मीदवार होते। एक सेलिब्रिटी के प्रति गुरदासपुर की जनता के बीच बनी इस छवि का सनी देओल को फ़ायदा मिल सकता है। विनोद खन्ना वाला कनेक्शन यहाँ काम कर सकता है। लोगों को ये उम्मीद होगी कि सनी देओल जीतने के बाद विनोद खन्ना की तरह ही यहाँ बने रहेंगे, बाकी मुम्बइया सेलेब्रिटीज की तरह नहीं करेंगे।

जाट और दलितों को एक साथ साधने की कोशिश

सनी देओल पंजाबी जाट परिवार से आते हैं और क्षेत्र में जाट और गुज्जर, ये दोनों ही समुदायों के लोग विभिन्न धर्मों में बँटे हुए हैं। ये हिन्दू भी हैं, मुस्लिम भी हैं और सिख भी हैं। कॉन्ग्रेस ने जाखड़ से पहले 27 वर्षों तक यहाँ से सिख उम्मीदवार ही उतारा था। सनी देओल के पंजाबी या सिख जाट परिवार से होने के कारण ग्रामीण इलाकों में उन्हें फायदा मिल सकता है। ऐसी ख़बरें आ रही थीं कि पंजाब में अकाली दल के साथ रहने वाला जाट-सिख वोट अब बिखर रहा है और इसे साधने की भाजपा लगातार कोशिश कर रही है। विनोद खन्ना की मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में मिली हार ने भाजपा की आँखें खोल दी हैं और उसने ऐसा चेहरा लाकर रख दिया है जिसके सामने जाति और समुदाय की बातें शायद गौण हो जाएँगी।

गुरदासपुर में दलितों की अच्छी-ख़ासी जनसंख्या है। उपचुनाव में भाजपा को इनका साथ नहीं मिला था। कैप्टेन के धुआँधार प्रचार के कारण जाखड़ 1.99 लाख वोटों से जीतने में सफल रहे। लेकिन सनी देओल की फ़िल्मों की लोकप्रियता ग्रामीण इलाकों व निचले मध्यम वर्ग और ग़रीबों में अधिक रही है। इसी को देखते हुए भाजपा ने उन्हें उतारा है। उनके एक्शन स्टार की छवि यहाँ स्थानीय उम्मीदवारों पर भारी पड़ सकती है।

फेल हो गया भाजपा का स्थानीय उम्मीदवार वाला दाँव

ऐसा नहीं है कि भाजपा ने यहाँ से स्थानीय उम्मीदवार उतारने पर विचार नहीं किया। विनोद खन्ना की मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में उसने स्वर्ण सलारिया पर भरोसा जताया था जो स्थानीय उद्योगपति और नेता हैं। भाजपा ने उन पर भरोसा जताया लेकिन उन्हें इतनी बुरी हार मिली कि पार्टी सन्न रह गई। स्वर्ण सलारिया स्थानीय स्तर पर सक्रिय होने के कारण भी जाखड़ को टक्कर नहीं दे पाए। पंजाब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष जाखड़ के सामने इस बार भाजपा ने स्थानीय उम्मीदवार के बदले क़द पर ध्यान दिया है और फलस्वरूप सनी देओल मैदान में हैं। वैसे सनी देओल के लिए यह क्षेत्र नया होगा और उन्हें यहाँ आकर सब कुछ नए सिरे से समझना पड़ेगा लेकिन जनता के बीच लोकप्रिय होने के कारण भाजपा को उम्मीद है कि सब कुछ युद्ध स्तर पर हो जाएगा।

दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना भी टिकट की दावेदार थी लेकिन भाजपा को यहाँ चेहरा चाहिए था क्योंकि केवल सहानुभूति लहर के सहारे प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष को टक्कर देना शायद संभव नहीं हो पाता। जाखड़ अनुभवी हैं और अनुभव के समाने सिर्फ़ सहानुभूति लहर के बलबूते लड़ने से शायद ही पार्टी के कैडर में नए सिरे से सक्रियता आती।

अब निकले कार्यकर्ता अपने घरों से

अंतिम और सबसे अहम कारण जो सनी देओल को गुरदासपुर से लड़ाने के पीछे है, वो है कार्यकर्ताओं की सक्रियता को फिर से जीवित करना। विनोद खन्ना की मृत्यु, प्रदेश में भाजपा-अकाली गठबंधन की बुरी हार और फिर उपचुनाव में मिली मात के बाद यहाँ भाजपा कार्यकर्ता घरों में बैठ गए थे। उन्हें लामबंद करना इतना आसान भी नहीं था। भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधे और इसका असर भी दिखने लगा। सनी देओल की एंट्री की ख़बर सुनते ही गुरदासपुर के कार्यकर्तागण अपने-अपने घरों से निकले और उन्होंने आपस में मिठाई बाँट कर खुशियाँ मनाईं। कॉन्ग्रेस को यह चिंता खाए जा रही है कि सनी देओल जब चुनाव प्रचार के लिए क्षेत्र में उतरेंगे तो आसपास की सीटों पर भी इसका पार्टी पर बुरा असर पड़ेगा।

गुरदासपुर के माहौल की बात करें तो भाजपा के स्थानीय दफ़्तर में फिर से जान लौट आई है, कार्यकर्ता उत्साह में हैं और पार्टी कैडर एक बार फिर से काम में लग गया है। कैप्टेन और जाखड़ के संयुक्त करिश्मा को भाजपा ने काटने की कोशिश की है और वो सफल होती भी दिख रही है। अब देखना यह है कि सनी देओल गुरदासपुर में कब लैंड करते हैं।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

शेहला के दावों को खारिज करते हुए सेना ने कहा है कि असामाजिक तत्व और संगठन लोगों को भड़काने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे हैं। जम्मू के डिविजनल कमिश्नर कहा है कि अफवाह फैलाने वाले लोगों के बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

अमानुल्लाह जेहरी

PAk से आज़ादी माँग रहे बलूचिस्तान में बीएनपी नेता और उनके 14 साल के पोते को गोलियों से छलनी किया

पाकिस्तान को अपने स्वतन्त्रता दिवस (14 अगस्त) के दिन तब शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब ट्विटर पर बलूचिस्तान के समर्थन में BalochistanSolidarityDay और 14thAugustBlackDay हैशटैग ट्रेंड करने लगा था। इन ट्रेंडों पर तकरीबन क्रमशः 100,000 और 54,000 ट्वीट्स हुए।

राजस्थान: मुसलमानों के हाथों मारे गए हरीश जाटव के नेत्रहीन पिता के शव के साथ सड़क पर उतरे लोग, पुलिस से झड़प

हरीश जाटव की बाइक से एक मुस्लिम महिला को टक्कर लग गई थी। इसके बाद मुस्लिम महिला के परिजनों ने उसकी जमकर पिटाई की। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस मॉब लिंचिंग के मामले को एक्सीडेंट साबित करने पर तुली हुई है।
चापेकर बंधु

जिसके पिता ने लिखी सत्यनारायण कथा, उसके 3 बेटों ने ‘इज्जत लूटने वाले’ अंग्रेज को मारा और चढ़ गए फाँसी पर

अंग्रेज सिपाही प्लेग नियंत्रण के नाम पर औरतों-मर्दों को नंगा करके जाँचते थे। चापेकर बंधुओं ने इसका आदेश देने वाले अफसर वॉल्टर चार्ल्स रैंड का वध करने की ठानी। प्लान के मुताबिक जैसे ही वो आया, दामोदर ने चिल्लाकर अपने भाइयों से कहा "गुंडया आला रे" और...
गुटखा

सिपाही ने गुटखा खाया लेकिन पैसे नहीं दिए, दुकानदार ने जब 5 रुपए माँगे… तो इतना मारा कि मर गया

उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही ने राहुल की चाय की दुकान से गुटखा लिया। लेकिन उसके पैसे दुकानदार को नहीं दिए। जब राहुल ने गुटखे के पैसे माँगे तो इस पर सिपाही को काफ़ी गुस्सा आ गया। उसने उसे वहीं बड़ी बेरहमी से पीटा और फिर अधमरी हालत में थाने ले जाकर...
शाजिया इल्मी

भारत विरोधी नारे लगा रहे लोगों से सियोल में अकेले भिड़ गईं BJP नेता शाजिया इल्मी

शाजिया इल्मी को भारत विरोधी नारों से आपत्ति हुई तो वह प्रदर्शनकारियों के बीच पहुँच गईं और उन्हें समझाने की कोशिश की। जब प्रदर्शनकारी नहीं माने, तो वे भी इंडिया जिंदाबाद के नारे लगाने लगीं।
कविता कृष्णन

कविता कृष्णन का ईमेल लीक: देश विरोधी एजेंडे के लिए न्यायपालिका, सेना, कला..के लोगों को Recruit करने की योजना

वामपंथियों की जड़ें कितनी गहरी हैं, स्क्रीनशॉट्स में इसकी भी नज़ीर है। कविता कृष्णन पूर्व-सैन्यकर्मी कपिल काक के बारे में बात करतीं नज़र आतीं हैं। वायुसेना के पूर्व उप-प्रमुख यह वामपंथी प्रोपेगंडा फैलाते नज़र आते हैं कि कैसे भारत ने कश्मीर की आशाओं पर खरा उतरने में असफलता पाई है, न कि कश्मीर ने भारत की
कश्मीर

कश्मीरी औरतें (हिंदू-मुसलमान दोनों) जो हवस और जहन्नुम झेलने को मजबूर हैं

दहशतगर्दी के शुरुआती दिनों में आतंकियों को हीरो समझा जाता था। उन्हें मुजाहिद कहकर सम्मान भी दिया जाता था। लोग अपनी बेटियों की शादी इनसे करवाते थे लेकिन जल्दी ही कश्मीरियों को यह एहसास हुआ कि आज़ादी की बंदूक थामे ये लड़ाके असल में जिस्म को नोचने वाले भेड़िये हैं।
कपिल काक

370 पर सरकार के फैसले के खिलाफ SC पहुॅंचे पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक, कविता कृष्णन के लीक ईमेल में था नाम

वामपंथी एक्टिविस्ट कविता कृष्णन ने सोशल मीडिया में वायरल हुए अपने लीक ईमेल में भी कपिल काक, जस्टिस शाह के बारे में बात की है। लीक मेल में जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मिला विशेष दर्जा हटने के विरोध की रणनीति का ब्यौरा मौजूद है।
अब्दुल सईद गिरफ़्तार

DCP विक्रम कपूर आत्महत्या: ब्लैकमेल करने वाला इंस्पेक्टर अब्दुल सईद गिरफ़्तार, महिला मित्र के लिए…

इंस्पेक्टर अब्दुल सईद का भांजा मुजेसर थाने में एक मामले में नामजद था, उसे वो बाहर निकलवाना चाहता था। उसकी महिला मित्र का उसके ससुर के साथ प्रॉपर्टी को लेकर एक विवाद था, इस मामले में भी इंस्पेक्टर अब्दुल ने डीसीपी विक्रम कपूर पर...
'द वायर', बेगूसराय महादलित

‘मुस्लिम गुंडे नहाते समय मेरी माँ को घूरते’ – पीड़ित से The Wire के पत्रकार ने पूछा – तुम्हें बजरंग दल ने सिखाया?

द वायर' का पत्रकार यह जानना चाहता था कि क्या पीड़ित ने बजरंग दल के कहने पर पुलिस में मामला दर्ज कराया है? हालाँकि, पीड़ित ने पत्रकार द्वारा बार-बार बात घुमाने के बाद भी अपने बयान पर कायम रहते हुए बताया कि पुलिस को उसने जो बयान दिया है, वह उसका ख़ुद का है।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

82,125फैंसलाइक करें
11,546फॉलोवर्सफॉलो करें
89,313सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: