चुनाव के समय में पत्रलेखन: प्रचार, आचार, चाटुकार और पत्राचार का फलता फूलता व्यवसाय

विरोधी इसे पत्रलेखक की विफलता मानेंगे किंतु यह पत्र की सफलता ही थी कि संभावित प्रेमिका भाषा से लेखक पहचान गई और प्रेम में परित्यक्त होकर रामू जी को माता पिता का आज्ञाकारी, होनहार पुत्र होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भिन्न गुट, समूह और संगठनों से निवेदन है कि लेखक की इस प्रतिभा का संज्ञान लें।

चुनाव प्रारंभ हो चुके हैं। प्रचार, आचार, चाटुकार और पत्राचार का माहौल खिंचा हुआ है। सोशल मीडिया के ज़माने में पत्र लिखने का दौर चल रहा है। भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रत्याशी नामांकित हो चुके हैं। अभिनय में विफल अभिनेता-अभिनेत्रियाँ, अभिनय में सफल नेता-नेत्रियाँ दस्ताने पहन कर, हँसिया उठा कर मैदान में उतर चुके हैं। हम भी सोच रहे थे खड़े हो जाएँ और कोई बिठाने को आए तो उचित मूल्य पर तुरंत बैठ जाएँ। किंतु जैसा कि शरद जोशी जी के समय से व्यंग्यकारों के साथ होता रहा है, पुरस्कार के समय अपना नाम घोषित होने पर भी निरीह व्यंग्यकार आशंकित सा यहाँ-वहाँ तकता रहता है।

एक व्यंग्यकार अपनी महत्वहीनता को लेकर पूर्णतया निश्चिंत रहता है, और सम्मानित करने का हल्का सा भी प्रयास उसे स्वयं के और सम्मानित करने के वाले के प्रति आशंकित कर देता है। बहरहाल इसी उहापोह में ना हम खड़े हुए ना ही आआपा के कुमार विश्वास। जिस देश में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर विजयी नेत्राणियों के पति ठसक से प्रधान पति की नामपट्टिका स्कॉर्पियो पर लगा कर घूमते हैं, वहाँ हमने और डॉक्टर साहब दोनों ने सांसद बनने का स्वर्णिम अवसर जाने दिया, जिसके कारण हमें विश्वास है कि हमारा और विश्वास साहब का नाम देश के महान बलिदानियों की सूची मे भगवंत मान जी के बाद अवश्य सम्मिलित होगा।

किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि अब चुनाव में हमारा योगदान स्याही लगी अँगुली के आगे कुछ नहीं रहा है। आधुनिक चुनाव के तीन स्तंभ, आचार, प्रचार और चाटुकार तो अपने स्वभाव के लिए व्यंग्यकार होने के नाते कठिन है। एक व्यंग्यकार पर आचार की शिष्टता, प्रचार के प्रभावी होने और कुशल चाटुकारिता के लिए निर्भर नहीं हुआ जा सकता है। पार्टी प्रवक्ता बनने में भी दो समस्याएँ थीं कि अव्वल तो व्यंग्यकार को कोई गंभीरता से नहीं लेता, दूसरे स्टूडियो की हिंसा के लिए इस लेखक की आयु उपयुक्त नहीं है। जो लोग ईवीएम पूर्व भारत में बूथ कैप्चरिंग जैसे वीर-सुलभ कार्य करते थे वे अब प्रवक्ता हो गए हैं और इस आयु में ऐसा ख़तरनाक व्यवसाय उचित नहीं होगा। किंतु जैसा हर विफल व्यक्ति को उत्साहित करने के लिए परंपरागत रूप से कहा जाता है, एक द्वार बंद होता है तो ऊपरवाला दूसरा द्वार खोलता है। इसी प्रक्रिया में प्रभु ने ऐसा मार्ग खोला है जो इस लेखक के स्तर, सामर्थ्य और औकात के अनुरूप है।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

अचानक ही मेघदूतम के यक्ष की आत्मा समस्त देशवासियों के हृदय में उतर आई है। सब लोग एक दूसरे को पत्र लिख रहे हैं। सौ लोग एक दल को वोट देने से मना करते हैं तो दो सौ वोट देने के लिए लिखते हैं। परसाईं जी बुद्धिजीवियों के विषय में लिखते हैं कि बुद्धिजीवी हवा में उड़ते हैं, पर जब ज़मीन पर सोते हैं, तो टांगें ऊपर करके– इस विश्वास और दंभ के साथ, कि आसमान गिरेगा तो पाँवों पर थाम लूंगा। सो बुद्धिजीवी एक दूसरे को पत्र लिख कर आकाश को गिरने से रोककर उसी प्रकार आश्वस्त हैं जैसे नेहरू जी अंग्रेजी में ट्रिस्ट विद मिडनाईट का भाषण दे कर हो गए थे और भारतीय पत्नियाँ पतियों को आदर्श पुरूष होने का आदेश दे कर संतुष्ट हो जाती हैं। अब सेवानिवृत्त सैनिकों ने भी कथित रूप से राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। वरिष्ठ अफ़सरों ने इस पत्र को झूठा बताया है।

अपने को उससे मतलब नहीं है। अपना उद्देश्य मूलतः व्यावसायिक हैं। सनद रहे कि लेखक कुशल पत्रलेखक है। युवावस्था मे लेखक के मित्र रहे थे, जिन्हें प्यार करने वाले और उधार देने वाले स्नेहपूर्वक रामू कह कर पुकारते थे। लेखन और धज मे राग दरबारी के रूप्पन बाबू से प्रभावित मित्र रामू लेखक की पत्रलेखन की अंतर्निहित प्रतिभा के साक्षी रहे हैं। जब उन्होंने इंजीनियरिंग के दिनों में संभावित प्रेमिका को प्रेमपत्र लिखवाया था, लेखक ने पत्र को थोड़ा सरल करने का सुझाव दिया था। किंतु साहित्य प्रेमी रामू ने सुझाव नकार कर, अपने हृदय पर दो बार मुक्का मार कर कहा, “नहीं भाई, भारी ही रखो, यहाँ पर लगना चाहिए।” कन्या ने पत्र पढ़ते ही कुशल समीक्षक की भाँति आपके प्रिय लेखक को अपराधी घोषित किया। उस पत्र के परिणामस्वरूप रामू तत्परता से कन्या के भ्राता नियुक्त हुए और कालांतर में उस कन्या के विवाह में बारातियों पर इत्र छिड़कते देखे गए।

विरोधी इसे पत्रलेखक की विफलता मानेंगे किंतु यह पत्र की सफलता ही थी कि संभावित प्रेमिका भाषा से लेखक पहचान गई और प्रेम में परित्यक्त होकर रामू जी को माता पिता का आज्ञाकारी, होनहार पुत्र होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भिन्न गुट, समूह और संगठनों से निवेदन है कि लेखक की इस प्रतिभा का संज्ञान लें। सेना ने, कलाकारों ने पत्र और प्रतिपत्र लिख कर भूमिका बना दी हैं। अब समय आ गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम सड़कों के राजनीतिकरण के विरोध में, सड़क मज़दूर संगठन अधिनियम के विरोध में, पेट्रोलियम संस्थान उज्जवला योजना के राजनीतिकरण के विरोध में, भारतीय रेलवे रेल आधुनिकीकरण के राजनीतिकरण के विरोध में पत्र लिखे। मेरा निवेदन यह है कि यहाँ प्रभावशाली पत्र उचित मूल्य पर लिखे जाते हैं। भारत की तमाम टिटिहरियों से निवेदन है कि लेखक के पत्रों की सहायता रियायती मूल्यों पर प्राप्त कर के इस चुनाव मे आसमान को गिरने से रोकें। वर्तमान पीढ़ी का कर्तव्य है कि पत्रलेखन द्वारा राष्ट्र रक्षा के इस पुनीत प्रयास को बल दें और बेरोज़गार लेखकों को धनार्जन का अवसर दें।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

जब दलितों और मुस्लिमों में झड़प होती है, तो यही दलित हिन्दू हो जाते हैं। जब एएमयू SC-ST को आरक्षण नहीं देता, तब ये चूँ तक नहीं करते। लेकिन, जहाँ बात भारत को असहिष्णु साबित करें की आती है, 'दलितों और मुस्लिमों' पर अत्याचार की बात कर दलितों को हिन्दुओं से अलग दिखाने के प्रयास होते हैं।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

हस्तमैथुन

‘दाढ़ी वाला ऑटो ड्राइवर मुझे देखकर हस्तमैथुन कर रहा था’: MBA कर रही 19 साल की लड़की की आपबीती

"मैं हीरानंदानी में जॉगिंग कर रही थी। फिर पास के एक बैंक एटीएम की सीढ़ियों पर बैठ गई। अपना फोन देखने में बिजी हो गई। जैसे ही मेरी नजर फोन से हटकर ऊपर को हुई तो सामने एक ऑटो में एक आदमी बैठा मुझे घूर रहा था। फिर जल्द ही यह भी समझ आ गया कि वह सिर्फ मुझे घूर ही नहीं रहा था बल्कि वो हस्तमैथुन भी कर रहा था।"
नुसरत जहां

सांसद नुसरत जहाँ के सिंदूर, मेंहदी, वंदे मातरम पर इस्लामिक चिरकुट नाराज, दी गंदी गालियाँ

नुसरत जहाँ के खिलाफ सोशल मीडिया पर लगातार आपत्तिजनक व्यंग्य और टिप्पणियाँ की जा रही हैं। उन्हें हिन्दू से शादी करने के लिए भद्दी गालियों के साथ ही जन्नत में जगह ना मिलने तक की दुआएँ की जा रही हैं।
पशु क्रूरता

तेलंगाना में नगरपालिका की क्रूरता: 100 कुत्तों को ज़हर देकर मार डाला, ज़मीन में दफनाया

"मैं इस बात को देख कर हैरान थी कि मेरे सारे कुत्ते गायब हैं। उनमें से कोई भी आक्रामक नहीं था और किसी ने भी कभी कोई हिंसक परिस्थिति नहीं पैदा की। अगर लोगों ने शिकायत की ही थी तो नगरपालिका वालों को 'एनिमल बर्थ कण्ट्रोल' अपनाना चाहिए था।"
रेप

तौसीफ़ इमरान ने नाबालिग छात्रा को बनाया हवस का शिकार, Tik Tok पर बनाता था बलात्कार का वीडियो

"मेरी बेटी का धर्म-परिवर्तन कराने के मक़सद से उसे विभिन्न धार्मिक स्थलों पर ले जाता था। शादी का वादा करने पर मेरी नाबालिग बेटी ने रमज़ान पर रोज़ा रखना भी शुरू कर दिया था।"
जय भीम-जय मीम

जय भीम जय मीम की कहानी 72 साल पुरानी… धोखा, विश्वासघात और पश्चाताप के सिवा कुछ भी नहीं

संसद में ‘जय भीम जय मीम’ का नारा लगा कर ओवैसी ने कोई इतिहास नहीं रचा है। जिस जोगेंद्र नाथ मंडल ने इस तर्ज पर इतिहास रचा था, खुद उनका और उनके प्रयास का हश्र क्या हुआ यह जानना-समझना जरूरी है। जो दलित वोट-बैंक तब पाकिस्तान के हो गए थे, वो आज क्या और कैसे हैं, इस राजनीति को समझने की जरूरत है।
अलीगढ़ में कचौड़ीवाला

अलीगढ़ में कचौड़ी वाला निकला करोड़पति, जाँच अधिकारियों ने जारी किया नोटिस

वाणिज्य एवं कर विभाग के एसआईबी के अधिकारियों ने पहले कचौड़ी वाले को ढूँढा और फिर 2 दिन तक आस-पास बैठकर उसकी बिक्री का जायजा लिया। 21 जून को विभाग की टीम मुकेश की दुकान पर जाँच करने पहुँची। जाँच में व्यापारी ने खुद सालाना लाखों रुपए के टर्नओवर की बात स्वीकारी।
मनोज कुमार

AAP विधायक मनोज कुमार को 3 महीने की जेल, ₹10 हजार का जुर्माना

एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने 11 जून को मनोज कुमार को आईपीसी की धारा 186 और जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 131 के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने पुलिसवालों की गवाहियों को विश्वसनीय मानते हुए ये फैसला सुनाया था और बहस के लिए 25 जून की तारीख मुकर्रर की गई थी।

त्रिपुरा के आदिवासी इलाकों में बंद पड़े स्कूलों का संचालन संभालेगा ISKCON

त्रिपुरा में फ़िलहाल 4,389 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल हैं। नाथ ने कहा कि राज्य सरकार के अधीन आने वाले 147 स्कूलों ऐसे हैं जिनमें अधिकतम 10 बच्चे पढ़ते हैं। बाकी 13 बंद पड़े हैं क्योंकि उनमें एक भी बच्चा नहीं पढ़ता।
रेप आरोपित को गोली मारी

6 साल की बच्ची का बलात्कार और हत्या: आरोपित नाज़िल को IPS अजय पाल ने मारी गोली, हो रही तारीफ

आरोपित नाज़िल ने बच्ची की पहचान भी छिपाने की पूरी कोशिश की थी। उसने बच्ची को मार कर उसके चेहरे पर तेज़ाब डाल दिया था, ताकि उसका चेहरा बुरी तरह झुलस जाए और कोई भी उसे पहचान नहीं पाए।
मंसूर खान, वीडियो

‘शायद मार दिया जाऊँ… फिर भी भारत लौट कर नेताओं के नाम का खुलासा करना चाहता हूँ’

"जो नेता मेरे करीबी थे, वही नेता अब मेरे लिए और मेरे परिवार के लिए खतरा बने हुए हैं। मैं भारत वापस आना चाहता हूँ, सारी जानकारी देना चाहता हूँ। भारत आकर मैं निवेशकों का पैसा लौटाना चाहता हूँ।"

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

52,221फैंसलाइक करें
8,999फॉलोवर्सफॉलो करें
70,269सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: