Sunday, October 17, 2021
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लालची और अविवेकी है AAP: गठबंधन की सारी उम्मीद खत्म, दिल्ली कॉन्ग्रेस ने लगाया आरोप

"पार्टी आलाकमान से दिशा-निर्देश जारी हुआ है कि 2014 के आम चुनाव में हमारे जो भी उम्मीदवार हार गए थे, उन्हें इस साल फिर से मौक़ा दिया जाना चाहिए। कम से कम पाँच पूर्व सांसदों को टिकट मिलने की उम्मीद है।"

दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच गठबंधन नहीं होगा। AAP के संजय सिंह ने कहा, ”आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस में कोई गठबंधन नहीं होगा। कॉन्ग्रेस अव्यावहारिक समझौता करना चाहती थी, जो संभव नहीं।” अब नए राजनीतिक हालातों के बीच संभव है कि कॉन्ग्रेस जल्द ही अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करे। टाइम्स ऑफ इंडिया के सूत्रों के अनुसार, गुरुवार (अप्रैल 11, 2019) की शाम तक कॉन्ग्रेस सब कुछ साफ़ कर देगी। पार्टी आलाकमान ने दिल्ली यूनिट को कह दिया है कि वो राज्य की सभी सीटों पर त्रिकोणीय मुक़ाबले के लिए तैयार रहें और अपने सबसे बेहतर उम्मीदवारों की सूची तैयार करें। इस बीच गाँधी परिवार के वफादार अहमद पटेल ने दिल्ली कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष शीला दीक्षित से उनके आवास पर मुलाक़ात की। दोनों नेताओं ने आगामी रणनीति पर चर्चा की। 40 मिनट तक चली इस बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की गई।

असल में कॉन्ग्रेस की स्क्रीनिंग कमिटी ने दिल्ली की सभी सीटों के लिए 7 उम्मीदवारों के नामों की सूची आलाकमान को भेज दी थी लेकिन पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी ने उस सूची को रिजेक्ट कर दिया। पार्टी की केंद्रीय चुनावी समिति द्वारा अवलोकन के बाद हाईकमान को अब नए उम्मीदवारों की सूची भेजी जाएगी। आज शाम को कमिटी की बैठक होगी। इसी बैठक में हरियाणा के लिए भी उम्मीदवारों की सूची तैयार की जाएगी। पार्टी के एक सूत्र ने TOI से कहा:

“पार्टी आलाकमान से दिशा-निर्देश जारी हुआ है कि 2014 के आम चुनाव में हमारे जो भी उम्मीदवार हार गए थे, उन्हें इस साल फिर से मौक़ा दिया जाना चाहिए। अगर पिछले आम चुनाव का कोई उम्मीदवार उपलब्ध नहीं है या चुनाव नहीं लड़ना चाह रहा हो तो उसकी जगह कोई लोकप्रिय या जाने-पहचाने चेहरे को ही मौक़ा दिया जाना चाहिए। कम से कम पाँच पूर्व सांसदों को टिकट मिलने की उम्मीद है। पूर्वी दिल्ली में कोई नया उम्मीदवार खोजा जाएगा क्योंकि शीला दीक्षित के बेटे और 2004 एवं 2009 में चुनाव जीत चुके संदीप दीक्षित ने लड़ने से इनकार कर दिया है। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में पिछली बार हार गई कॉन्ग्रेस उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री कृष्णा तीरथ अब भाजपा में शामिल हो चुकी हैं।”

कॉन्ग्रेस पार्टी यह मान कर चल रही है कि 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट शेयर बढ़ा है और अब आत्मविश्वास से भरी पार्टी पूरे जोशीले तरीके से चुनावी लड़ाई के लिए तैयार है। कॉन्ग्रेस ने केजरीवाल की पार्टी को लालची और अविवेकी बताते हुए कहा कि सीटों के बँटवारे पर उनके गलत रवैये के कारण सहमति नहीं बन सकी। एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ने बताया कि कॉन्ग्रेस आम आदमी पार्टी की दिल्ली में 4 और हरियाणा में 1 सीट की माँग मान गई थी लेकिन केजरीवाल की माँगें बढ़ती चली गई। वरिष्ठ नेता ने आगे कहा:

“आप दिल्ली में बड़े भाई की भूमिका निभाना चाहती थी और पहले उसने 5 सीटों की माँग की, जिसे हमारे द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद उसने 4-2 के समीकरण की माँग की और 1 सीट पर दोस्ताना लड़ाई की बात कही लेकिन उनके इस प्रस्ताव को भी तुरंत नकार दिया गया। इसके बाद में 4-3 पर सहमत हुए लेकिन उन्होंने फिर यू-टर्न लेते हुए अन्य राज्यों में भी सीटों की माँग रख दी। मंगलवार को हुई बैठक में कॉन्ग्रेस हाईकमान ने आप के इस ऑफर को रिजेक्ट कर दिया”

गठबंधन पर दिल्ली कॉन्ग्रेस के नेताओं की राय विभाजित है। जहाँ एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष और तीन अन्य कार्यकारी अध्यक्ष आप के साथ गठबंधन के विरोध में हैं, तो दूसरी ओर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन व राज्य में पार्टी के प्रभारी पीसी चाको इस गठबंधन के पक्ष में हैं। गठबंधन की संभावनाओं से इनकार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दीक्षित ने कहा कि गठबंधन पर असमंजस की स्थिति होने से पार्टी के कैडर में निराशा का माहौल था।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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