आप नेता गुरप्रीत घुग्गी ने भी किया पार्टी से किनारा

अनुमान यह लगाया जा रहा है कि पार्टी द्वारा भगवंत मान को पंजाब की कमान सौंपने के फ़ैसले नाराज़ थे जिसके चलते घुग्गी ने पार्टी छोड़ने का मन बनाया

आम आदमी पार्टी के अंदरुनी खेमें में आपसी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन पार्टी के अंदर चल रहे घमासान की तस्वीरें उजागर होती रहती हैं। इस बार आप पार्टी की विवादित ख़बरों में एक और नाम जुड़ गया है और वो नाम है गुरप्रीत घुग्गी का। जानकारी के मुताबिक आप नेता गुरप्रीत घुग्गी ने भी पार्टी से अपना किनारा कर लिया है। पार्टी से किनारा किए जाने संबंधी अपने फ़ैसले पर घुग्गी ने कहा कि उनका व्यक्ति विशेष से किसी भी प्रकार का विरोध नहीं है। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि उन्होंने भगवंत मान के साथ लंबे समय से काम किया है, उनसे उन्हें कोई शिक़ायत नहीं है।

बता दें कि हाल ही में गुरप्रीत को हटाकर पंजाब की कमान भगवंत मान को सौंप दी गई थी। अनुमान यह लगाया जा रहा है कि कमान सौंपने संबंधी पार्टी के इस फ़ैसले से ख़फ़ा चल रहे घुग्गी इस नतीजे पर पहुँचे हैं। हालाँकि उन्होंने अपने बयान में यह साफ़ कर दिया कि पार्टी छोड़ने का निर्णय उनका व्यक्तिगत है।

इसके पहले भी आम आदमी पार्टी के ख़फ़ा नेताओं नें इस्तीफ़े दिए हैं। जिनमें कई नाम शामिल हैं। पार्टी से किनारा करने वाले नेताओं की यह स्थिति अगर आगे भी बरक़रार रही तो भविष्य में इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे।

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पंजाब में ‘आप’ पार्टी के विधायक बलदेव सिंह ने बुधवार (जनवरी 16, 2019) को पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है। बता दें कि आप पार्टी के बलदेव सिंह पंजाब में ‘जैतो’ से विधायक थे।

पार्टी को छोड़ने से पहले बलदेव सिंह ने अरविंद केजरीवाल को भेजे ई-मेल में लिखा है कि वो बेहद दुखी मन के साथ आम आदमी पार्टी की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे रहे हैं। उन्होंने अपने पत्र में शिक़ायत भी की, कि आम आदमी पार्टी अपनी तय हुई विचारधारा से बिलकुल भटक चुकी है।

उन्होंने कहा कि वो अन्ना हज़ारे द्वारा शुरू किए गए आंदोलन से काफ़ी प्रेरित होकर ही ‘आप’ के साथ जुड़ने का फ़ैसला किया था, जिसके लिए उन्होनें बतौर प्रधान शिक्षक अपनी सरकारी नौकरी छोड़ने का फ़ैसला लिया था। इसका पीछे उनका उद्देश्य देश की (ख़ासकर पंजाब की) सामाजिक-राजनीतिक स्थिति को सुधारने का था। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने ये फ़ैसला लिया था तब उनके पूरे परिवार में खलबली सी मच गई थी। लेकिन, फिर भी उन्होंने ‘आप’ के बुलंद इरादों और वायदों पर ये जोख़िम लेना ज़रुरी समझा।

बलदेव सिंह के अलावा पंजाब के ही एक और विधायक सुखपाल खैरा ने आम आदमी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दिया था। इन्होंने भी अपने इस्तीफ़े में केजरीवाल की पार्टी पर कई आरोप लगाए थे, कि पार्टी अपने निर्धारित किए हुए सिद्धांतों और विचारधारा से भटक चुकी है। जिस समय खैरा ने इस्तीफ़ा दिया उस समय वो पार्टी से निलंबित चल रहे थे, क्योंकि उन्होंने पार्टी के ख़िलाफ़ बग़ावत शुरू कर दी थी। जिसके कारण ही उनका पार्टी से निलंबन किया गया था। अब ख़बरें हैं कि बलदेव, सुखपाल खैरा की ‘पंजाबी एकता पार्टी’ से जुड़ सकते हैं।

इन दो विधायकों के अलावा हरविंदर सिंह फुलका जो पंजाब आदमी पार्टी के नेता और सिख विरोधी दंगे के वकील हैं, वो भी पार्टी को लेकर अपनी शिक़ायतों की वजह से सदस्यता छोड़ चुके हैं।

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