Homeराजनीतिदिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ पर फिर ABVP का कब्जा, अध्यक्ष समेत 3 सीटें जीती

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ पर फिर ABVP का कब्जा, अध्यक्ष समेत 3 सीटें जीती

कॉन्ग्रेस से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) को केवल सचिव पद पर सफलता मिल पाई है। एनएसयूआई की चेतना त्यागी को हराकर ABVP के अक्षित दहिया ने अध्यक्ष पद पर कब्ज़ा जमाया।

दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के चुनाव में आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी ने परचम लहराया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पदों पर जीत हासिल हुई है। ABVP की तरफ से अध्यक्ष पद पर अक्षित दहिया जीते हैं। उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के प्रदीप तंवर और जॉइंट सेक्रेटरी पर शिवांगी खरवाल ने कब्ज़ा जमाया है।

दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) को केवल सचिव पद पर सफलता मिल पाई है।

किसे कितने वोट मिले –

  • एबीवीपी की तरफ से अध्यक्ष पद पर अक्षित दहिया को  29,685 वोट मिले।
  • उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के उम्मीदवार प्रदीप तंवर को 19,858 वोट मिले।
  • एबीवीपी के उम्मीदवार जॉइंट सेक्रेटरी पर शिवांगी खरवाल  को 17,234 वोट मिले।
  • एनएसयूआई को सचिव पद आशीष लांबा को 20,934 वोट मिले।

एबीवीपी ने अध्यक्ष पद पर अग्रसेन कॉलेज के अक्षित दहिया को मैदान में उतारा था, जबकि एनएसयूआई ने महिला कैंडिडेट पर दाँव लगाते हुए चेतना त्यागी को मौका दिया था। वामपंथी संगठन आइसा से दामिनी काइन चुनावी मैदान में थीं, जबकि AIDSO से रोशनी ने चुनाव लड़ा था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -