Thursday, August 18, 2022
Homeराजनीतिखेल रत्न के बाद अब असम के नेशनल पार्क से भी हटे राजीव गाँधी,...

खेल रत्न के बाद अब असम के नेशनल पार्क से भी हटे राजीव गाँधी, जनता के विरोध के बाद भी कर दिया था उनके नाम

1999 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किए जाने के बाद तत्कालीन तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने 2001 में इसका नाम बदलकर राजीव गांधी ओरंग राष्ट्रीय उद्यान कर दिया था।

केंद्र की मोदी सरकार ने इसी साल 6 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गॉंधी के नाम पर रहे खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद का नाम दिया था। अब असम की बीजेपी सरकार ने भी इसी तरह का फैसला किया है। हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों में से एक से राजीव गाँधी का नाम हटाने का फैसला किया है। गुवाहाटी में आयोजित साप्ताहिक कैबिनेट की बैठक के दौरान राज्य सरकार ने राजीव गाँधी ओरंग राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर सिर्फ ओरंग राष्ट्रीय उद्यान करने का फैसला किया।

इसको लेकर कई संगठनों ने राज्य सरकार को अपनी माँगें सौंपी थीं। इसे देखते हुए असम कैबिनेट ने राजीव गाँधी को राष्ट्रीय उद्यान के नाम से हटाने का फैसला किया। राज्य में प्रकृति के क्षेत्र में काम करने वाला संगठन अरण्य सुरक्षा समिति ने पिछले महीने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपकर राजीव गाँधी ओरंग राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर ओरंग राष्ट्रीय उद्यान करने की माँग की थी। इसके अलावा इलाके में रहने वाले आदिवासी और चाय जनजाति भी राजीव गाँधी का नाम हटाने की माँग कर रहे थे।

ज्ञात हो कि दारांग, उदलगुरी और सोनितपुर जिलों में ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान भारतीय गैंडों, रॉयल बंगाल टाइगर, पिग्मी हॉग, जंगली हाथी, जंगली भैंस जैसे जंगली जानवरों के लिए जाना जाता है। 79.28 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले इस पार्क को 1985 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था। लेकिन, बाद में 1999 में अपग्रेड कर राष्ट्रीय उद्यान बना दिया गया।

जनता ने राजीव गाँधी नाम का किया था विरोध

ओरंग वन्यजीव अभयारण्य का नाम मूल रूप से 1992 में पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गाँधी के नाम पर रखा गया था। हालाँकि, उस दौरान जनता ने इसका काफी विरोध किया था, जिसके बाद इसे रोक दिया गया था। लेकिन, 1999 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किए जाने के बाद तत्कालीन तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने 2001 में इसका नाम बदलकर राजीव गांधी ओरंग राष्ट्रीय उद्यान कर दिया था। तब से जनता और पर्यावरणविदों के विरोध के बावजूद यह निर्णय जस का तस लागू रहा।

खास बात यह है कि भले ही पार्क का आधिकारिक नाम राजीव गाँधी था, लेकिन प्रदेशवासियों ने कभी भी इसका इस्तेमाल नहीं किया। लोगों ने इसे हमेशा ओरंग नेशनल पार्क के नाम से ही जाना है। इसके अलावा जब साल 2016 में इस पार्क को टाइगर रिजर्व के रूप में भी घोषित किया गया था तो भी इसे केवल ओरंग टाइगर रिजर्व के रूप में नामित किया गया था।

गौरतलब है कि कर्नाटक के नागरहोल में स्थित राजीव गाँधी राष्ट्रीय उद्यान का नाम भी बदलने की माँग हो रही है। हाल में इसके लिए Change.org पर एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया गया है। इसमें नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान का नाम कोडंडेरा मडप्पा करियप्पा (Kodandera Madappa Cariappa) के नाम पर रखने की माँग की गई है, जो भारतीय सेना में पहले कमांडर-इन-चीफ थे। बता दें कि कोडागु के मूल निवासी करियप्पा का जन्म 28 जनवरी 1899 को मदिकेरी, कोडागु में हुआ था और उनका तीन दशकों का विशिष्ट सैन्य करियर था।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए आधार कार्ड बनवा रहा है PFI : पटना पुलिस की जाँच में बड़ा खुलासा

फर्जी दस्तावेज से पीएफआई बनवा रहा है रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए आधार कार्ड। पटना पुलिस की जाँच में बड़ा खुलासा।

श्रीकृष्ण ही सत्य हैं, अब तो ‘सुलेमान’ भी साक्षी है: द्वापर के इतिहास को आज से जोड़ती है ‘कार्तिकेय 2’, नए पैन-इंडिया स्टार का...

'कार्तिकेय 2' ने ये सुनिश्चित कर दिया है कि इस फ्रैंचाइजी जी अगली फिल्म पैन-इंडिया होगी। निखिल सिद्धार्थ का अभिनय उम्दा और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस दमदार है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
215,056FollowersFollow
417,000SubscribersSubscribe