Thursday, November 26, 2020
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असंगठित क्षेत्र श्रमिकों के लिए ऐतिहासिक साबित होगी ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन पेंशन योजना’

भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का आधा हिस्सा असंगठित क्षेत्र के उन 42 करोड़ कामगारों के पसीने और अथक परिश्रम से बनता है, इसमें रेहड़ी वाले, रिक्शा चालक, निर्माण कार्यों में लगे मज़दूर, कूड़ा बीनने वाले, कृषि कामगार, बीड़ी बनाने वाले, हथकरघा कामगार शामिल हैं।

आज (फरवरी 01, 2019) संसद में कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया। इस बजट के माध्यम से तमाम लाभकारी योजनाओं के ज़रिए देश की जनता को लाभ पहुँचाने का प्रयास किया गया। हर योजना का उद्देश्य देश की जनता को अधिकतम लाभ पहुँचाकर उनके जीवन को बेहतर दिशा प्रदान करना है। आज के बजट में एक ऐसा बड़ा निर्णय भी शामिल है, जिसे किसी भी हाल में नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना’ एक ऐसी ही योजना है, जिसे अमल में लाने के बाद देश के हर व्यक्ति को ₹100 मात्र के अंशदान से उसे 60 साल की आयु के बाद ₹3000 प्रतिमाह पेंशन प्राप्त होगी।

अंतरिम बजट-2019

बता दें कि देश में पेंशन की सुविधा अब तक केवल सरकारी विभागों तक ही सीमित थी। वो भी वर्ष 2004 के बाद समाप्त कर दी गई थी। केंद्र सरकार के असंगठित क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों) के लोगों को पेंशन देने संबंधी यह योजना बहुत बड़ा फ़ैसला है। आइए आपको आज के अंतरिम बजट में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को दी जाने वाली पेंशन और उससे जुड़ी विशेष बातें बता दें।  

  • वर्तमान सरकार ने पेंशन के दायरे में लाभकारी क़दम उठाते हुए ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन’ नामक पेंशन योजना की घोषण की है, इसका संबंध ऐसे लोगों से है जिनकी मासिक आय
    ₹15,000 या उससे कम है।
  • इस पेंशन योजना से अपनी कार्यशील आयु के दौरान एक छोटी सी राशि के मासिक अंशदान करने से उन्हें 60 वर्ष की आयु से ₹3000 की सुनिश्चित मासिक पेंशन दी जाएगी।
  • 29 वर्ष की आयु में इस पेंशन योजना से जुड़ने वाले असंगठित क्षेत्र के कामगार को केवल ₹100 प्रति माह का अंशदान 60 वर्ष की आयु तक करना होगा।
  • 18 वर्ष की आयु में इस पेंशन योजना में शामिल होने वाले कामगार को मात्र ₹55 प्रतिमाह का अंशदान करना होगा। सरकार हर महीने कामगार के पेंशन खाते में बराबर की राशि जमा करेगी।
  • ऐसा अनुमान है कि अगले 5 वर्षों के भीतर असंगठित क्षेत्र के कम से कम 10 करोड़ श्रमिक और कामगार इस योजना का लाभ लेंगे।
  • इससे आने वाले समय में यह योजना विश्व की सबसे बड़ी पेंशन योजनाओं में से एक बन जाएगी। बता दें कि इस योजना के पहले साल के लिए ₹500 करोड़ की राशि आवंटित की जाएगी। ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त निधियाँ भी प्रदान की जाएँगी। यह योजना चालू वर्ष से ही कार्यान्वित की जाएगी।

यह बात जगज़ाहिर है कि असंगठित क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारी वर्ग के जीवन में वो स्थिरता नहीं होती, जो एक सरकारी कर्मचारी के जीवन में होती है। असंगठित क्षेत्र की बात करें तो वहाँ ऐसी स्थिरता नदारद होती है। इसका असर उसके साथ-साथ पूरे परिवार पर भी पड़ता है। ऐसे में आज के बजट में पेश की गई ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन पेंशन योजना’ उन सभी नागरिकों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी, जो असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं।

आपको बता दें कि भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का आधा हिस्सा असंगठित क्षेत्र के उन 42 करोड़ कामगारों के पसीने और अथक परिश्रम से बनता है। जैसे, रेहड़ी वाले, रिक्शा चालक, निर्माण कार्यों में लगे मज़दूर, कूड़ा बीनने वाले, कृषि कामगार, बीड़ी बनाने वाले, हथकरघा कामगार, चमड़ा कामगार और इस तरह के अन्य कई सारे व्यवसाय असंगठित क्षेत्र के दायरे में आते हैं। देश की जनता का इतना बड़ा हिस्सा, जो आज भी पेंशन जैसी लाभकारी योजना का फायदा उठाने की कल्पना भी नहीं कर सकता था, उसके लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना एक ऐतिहासिक और बड़ी योजना साबित होगी।

न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के दायरे को विस्तार दिया

बता दें कि न्यू पेंशन योजना एक लाभकारी पेंशन स्कीम है, जिसमें निवेश करना लाभकारी है, क्योंकि इसमें सभी कार्यों में पारदर्शिता बनी रहती है। पारदर्शिता से मतलब यह है कि इससे जुड़े लोग कभी भी निवेश एवं लाभ का ब्यौरा ले सकते हैं। आज पेश किए गए अंतरिम बजट में न्यू पेंशन योजना को पहले से अधिक विस्तार दिया गया है।

  • न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) को और उदार किया गया है। सरकार ने एनपीएस में अपने योगदान को बढ़ाकर, 10% से 14% कर दिया है। ग्रेच्युटी के भुगतान की सीमा को
    ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख किया गया है।
  • ईएसआईसी की सुरक्षा पात्रता सीमा भी ₹15,000 प्रतिमाह से बढ़ाकर, ₹21,000 प्रतिमाह कर दी गई है। सभी श्रमिकों के न्यूनतम पेंशन प्रतिमाह ₹1,000 तय की गई है।
  • सर्विस के दौरान किसी श्रमिक की मृत्यु होने की स्थिति में ईपीएफओ द्वारा राशि ₹2.5 लाख से बढ़ाकर , ₹6 लाख तक सुनिश्चित की गई। आंगनबाड़ी और आशा योजना के तहत सभी श्रेणियों के कार्मिकों के मानदेय में लगभग 50% की वृद्धि हुई है।  

इसके अलावा मोदी सरकार में चल रही पहले से कई ऐसी योजनाएँ मौजूद हैं, जिनका लाभ मज़दूरों और श्रमिकों को मिलता रहा है, लेकिन पेंशन की ऐसी व्यवस्था, जिसमें सबका विकास निहित हो, पहले अस्तित्व में नहीं थी। केंद्र सरकार ने देश की जनता के विकास के लिए इस अंतरिम बजट में और भी कई पहलुओं को शामिल किया है।

यदि एक सामान्य आदमी के जीवन की कल्पना करें, तो जिन मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता एक आम नागरिक को होती है, उसकी पूर्ति के लिए प्रधानमंत्री मोदी की अगुआई में केंद्र सरकार ने कई स्तरों पर इस कार्यकाल में काम किया है।

देश के हर तबके का विकास करने के लिए जन-जन की मूलभूत आवश्यकताओं पर न सिर्फ़ ध्यान दिया गया है, बल्कि उन्हें तमाम योजनाओं के माध्यम से अमल में भी लाया गया है । इस कार्यकाल के दौरान मोदी सरकार ने शहरी और ग्रामीण, दोनों स्तर पर बराबर ध्यान दिया है। एक मज़दूर के हक़ के लिए, उसके पैसे के रखरखाव के लिए प्रधानमंत्री जनधन जैसी योजनाओं को भी धरातल पर लाया गया। बता दें कि प्रधानमंत्री जनधन योजना विश्व कीर्तिमान स्थापित किया, जिसकी वजह से इस योजना को गिनीज बुक में शामिल किया जा चूका है।

मज़दूरों के पैसे को बैंक में ट्रांसफर करने के लिए मालिकों पर नकेल कसी गई। एक मज़दूर को उसके हक़ का पूरा पैसा मिले, इसके लिए ‘प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण’ या ‘डीबीटी योजना‘ को बेहतर बनाया गया। ‘डीबीटी’ के माध्यम से भी भारत सरकार द्वारा लोगों के खातों में सब्सिडी ट्रांसफर की जाती है, जिसका सीधा सा मतलब देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करना है।

अक्टूबर, 2017 में शुरू की गई श्रमेव जयते भी उन योजनाओं में शामिल है, जिसके माध्यम से असंगठित क्षेत्र के लाखों मज़दूरों को लाभ पहुँचाने का प्रयास किया गया। कई बार ऐसा होता है, जब कोई व्यक्ति एक कंपनी में वर्षों तक नौकरी करता है और उसके बाद वहाँ से छोड़कर दूसरी कंपनी ज्वॉइन करता है। ऐसी सूरत में वह अपने पीएफ (प्रोविडेंट फंड) खाते में जमा धनराशि पर ध्यान नहीं दे पाता है। अक्सर देखा जाता है कि ऐसा इसलिए भी हो जाता है क्योंकि वो इस बात पर ग़ौर ही नहीं कर पाता कि आख़िर उसके पीएफ खाते में कितनी धनराशि जमा है।

इसके अलावा ऐसा भी देखा जाता है कि वह अपने पीएफ के खाते की धनराशि प्राप्त करने में भी समर्थ नहीं होता है। इन हालातों में पीएफ खाते से बहुत से कर्मचारी अपनी जमा पूंजी नहीं निकाल पाते हैं। प्रधानमंत्री की श्रमेव जयते योजना ने ऐसे ही कर्मचारियों की मुश्किलों को हल करने में क़ामयाब रही है। इसके माध्यम से कर्मचारी अपने पीएफ खाते में जमा राशि देख सकते हैं और उस बचत का समय आने पर इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

2015 में शुरू की गई मुद्रा योजना के तहत भी देश हित का कार्य किया गया, जिसमें स्वरोज़गार के लिए धन की व्यवस्था का प्रावधान किया गया। इसके ज़रिए कई स्वयं सहायता समूह को फलने-फूलने का अवसर प्राप्त हुआ। ख़ासतौर पर छोटे व्यापारियों को इससे काफी लाभ प्राप्त हुआ। बता दें कि इसके तहत ₹50,000 से ₹10 लाख तक के लोन की व्यवस्था है, इससे छोटे उद्योग को लगाने में लोगों को आर्थिक मदद मिलती है। कई ऐसे ग़रीब परिवार हैं, जिन्होंने इस योजना का लाभ उठाकर अपने जीवन को रोज़गार से जोड़कर लाभ प्राप्त किया। इस योजना के तहत अब तक कुल मिलाकर ₹7,23,000 करोड़ के ₹15.56 करोड़ ऋण वितरित किए गए हैं।

कार्यवाहक वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया अंतरिम बजट हर मायने में सम्पूर्ण बजट कहा जा सकता है, जिसमें किसी भी क्षेत्र की अनदेखी नहीं की गई है और देश की जनता को लाभ पहुँचाने का भरसक प्रयास किया गया है। हालाँकि, आलोचनाओं एवं सुधार की गुँजाइश सदैव रहती है।

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