कॉन्ग्रेस ने चुनाव परिणाम से पहले ही हरियाणा में भंग किया संगठन: साधा EVM पर निशाना

कॉन्ग्रेस चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चुनौती से जूझ रही थी। अब ख़बर आई है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने हरियाणा में पूरे संगठन को ही भंग कर दिया है। हालाँकि, मतगणना का इंतजार किए बिना यह फ़ैसला क्यों किया गया, इस सम्बन्ध में कुछ स्पष्ट नहीं हो सका है।

हरियाणा में सोमवार (अक्टूबर 21, 2019) विधानसभा चुनाव के बाद सभी उम्मीदवारों की किस्मत मतपेटियों में बंद हो गई है और सभी की निगाहें अब गुरुवार को आने वाले चुनाव परिणाम पर टिकी हैं। अधिकतर एग्जिट पोल्स में मनोहर लाल खट्टर मुख्यमंत्री के रूप में वापस लौटते दिख रहे हैं। कॉन्ग्रेस चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चुनौती से जूझ रही थी, जिन्होंने बगावती तेवर अपना लिए थे। अब ख़बर आई है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने हरियाणा में पूरे संगठन को ही भंग कर दिया है। हालाँकि, मतगणना का इंतजार किए बिना यह फ़ैसला क्यों किया गया, इस सम्बन्ध में कुछ स्पष्ट नहीं हो सका है।

यह निर्णय हरियाणा कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष कुमारी शैलजा ने लिया। उन्हें चुनाव से ऐन पहले प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी दी गई थी क्योंकि पूर्व सीएम हुड्डा और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अशोक तँवर के बीच मतभेद काफ़ी बढ़ गए थे। यूपीए-2 में केंद्रीय मंत्री रह चुकीं शैलजा को कॉन्ग्रेस दलित चेहरे के रूप में पेश करती रही है। कहा जा रहा है कि संगठन में सुधार करने के लिए उन्होंने ये क़दम उठाया है। संगठन के सभी प्रकोष्ठों को भंग कर दिया गया है और साथ ही पार्टी पदाधिकारियों की भी छुट्टी कर दी गई है।

पार्टी ने बताया है कि जल्द ही नए सिरे से सदस्यता अभियान चलाया जाएगा और संगठन का विस्तार किया जाएगा। हालाँकि, कुमारी शैलजा ने चुनाव के दौरान आपात स्थिति में जो नियुक्तियाँ की थीं, उन्हें बरक़रार रखा गया है। विधानसभा के दौरान 18 ऐसे नेता थे, जिन्हें कॉन्ग्रेस ने पार्टी-विरोधी गतिविधियों में संलग्न रहने का आरोप लगा कर 6 साल के लिए निकाल बाहर किया था। वहीं अशोक तँवर को लेकर पार्टी ने अभी तक स्थिति साफ़ नहीं की है, जिन्होंने चुनाव के दौरान जम कर जेजेपी का प्रचार किया। उनका इस्तीफा स्वीकार हुआ है या नहीं, इस पर पार्टी चुप है।

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वहीं हुड्डा ने एग्जिट पोल्स को नकारते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस की जीत होगी और फिर विधायक मिल कर सीएम चुनेंगे। वह इस सवाल पर कन्नी काट गए कि क्या उनके बेटे दीपेंद्र सिंह के सीएम बनने की सम्भावना है? वहीं कुमार शैलजा ने एक क़दम और आगे बढ़ते हुए बिना परिणाम आए ही ईवीएम पर टिप्पणी कर दी। हरियाणा में कॉन्ग्रेस की ये हालत आंतरिक कलह और गुटबाजी की वजह से हुई है। जहाँ राष्ट्रीय स्तर पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष विहीन होकर कई दिनों तक जूझती रही, हरियाणा में गुलाम नबी आज़ाद के कई प्रयासों के बावजूद पार्टी की स्थिति सुधर नहीं पाई।

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सोनिया गाँधी
शिवसेना हिन्दुत्व के एजेंडे से पीछे हटने को तैयार है फिर भी सोनिया दुविधा में हैं। शिवसेना को समर्थन पर कॉन्ग्रेस के भीतर भी मतभेद है। ऐसे में एनसीपी सुप्रीमो के साथ उनकी आज की बैठक निर्णायक साबित हो सकती है।

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