सलमान खुर्शीद ने कॉन्ग्रेस नेताओं पर जमकर निकाली भड़ास, कहा- राजनीति का ककहरा न जानने वाले दे रहे ज्ञान

कॉन्ग्रेस में अपने साथियों और 'सुनने वालों' को लिखे पत्र के रूप में की गई इस पोस्ट में खुर्शीद ने कहा कि गंभीर क्षणों में रणनीतिक चुप्पी में समझदारी होती है, लेकिन साथ-साथ बोलना भी सामूहिक भविष्य के लिए जरूरी होता है।

पूर्व विदेश मंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद एक बार फिर अपनी ही पार्टी के नेताओं पर जमकर बरसे हैं। उन्होंने फेसबुक पोस्ट लिखकर उन नेताओं को खूब खरी-खोटी सुनाई है, जिन्होंने इसी हफ्ते राहुल गाँधी पर खुर्शीद के बयान को लेकर उन्हें हिदायत दी थी। खुर्शीद ने अपनी ही पार्टी के नेताओं के नाम लिखी पोस्ट में राहुल गाँधी के दोबारा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की भी पैरवी की।

बता दें कि खुर्शीद ने इसी हफ्ते कहा था कि राहुल गाँधी के ‘छोड़कर जाने’ के कारण पार्टी लोकसभा चुनावों में हार के कारणों पर आत्मचिंतन भी नहीं कर पाई थी। खुर्शीद ने अपनी टिप्पणी पर हुए विवाद को लेकर बड़ी सी पोस्ट लिखी। इसमें उन्होंने लिखा, “व्यक्तिगत विश्वासपात्रता या सियासी रणनीति के बारे में जिन्हें कुछ नहीं पता है, वे मुझे ज्ञान देते हैं तो हैरानी होती है। इसलिए, मैं एक बार उनको बता देना चाहता हूँ कि मैं विश्वास और निष्ठा को भरोसा और व्यक्तिगत पसंद मानता हूँ। वास्तविक या काल्पनिक भय और मतभेद से निकलकर आगे बढ़ने का समय है।”

आगे उन्होंने लिखा, “मैं व्यक्तिगत कृतज्ञता और इतिहास तथा भारतीय लोकतंत्र की समझ के कारण गाँधी परिवार का समर्थन करता हूँ।” कॉन्ग्रेस में अपने साथियों और ‘सुनने वालों’ को लिखे पत्र के रूप में की गई इस पोस्ट में खुर्शीद ने कहा कि गंभीर क्षणों में रणनीतिक चुप्पी में समझदारी होती है, लेकिन साथ-साथ बोलना भी सामूहिक भविष्य के लिए जरूरी होता है।

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खुर्शीद ने कहा कि सिर्फ मृत मछलियाँ हीं पानी के बहाव के साथ बहती हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस बीजेपी की तरह नहीं है और न उसे कभी होना चाहिए। उन्होंने लिखा, “जब हमारे प्रवक्ता बीजेपी को काउंटर करने के हमारे दायित्वों की तरफ इशारा करते हैं तो उन्हें यह जरूर याद रखना चाहिए कि यह तभी संभव है जब हम बहुआयामी वैश्विक नजरिए और भयहीन अभिव्यक्ति पेश करेंगे।”

उन्होंने पोस्ट के अंत में लिखा, “आखिर में, हमारे विरोधी और मीडिया कुछ भी कहें, लेकिन मैं मानता हूँ कि राहुल गाँधी को इस विशाल पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर वापसी करनी चाहिए, जिसे सोनियाजी प्रेरित करती रहेंगी।” आगे खुर्शीद ने लिखा, “हमें झटका लगा है लेकिन हम अपने प्रिय लोगों के दिलों को जीतने में फिर से कामयाब होंगे। कॉन्ग्रेस भारत को आजाद और परिपूर्ण जिंदगी दे सकती है, जहाँ एक-एक सिर बिना किसी भय या पक्षपात के ऊँचा उठा रहे।”

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