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‘उस स्कूल के नाम में इंदिरा, मैं नहीं जाऊँगा’: महाराष्ट्र के नए सीएम ने 1975 में ही चालू किया था ‘विद्रोह’, जानें देवेन्द्र फडणवीस की कहानी

देवेन्द्र फडणवीस 1975 में इंदिरा कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते थे। वह तब मात्र 6 वर्ष के थे। उनके पिता गंगाधर फडणवीस तब जनसंघ के नेता थे।

महाराष्ट्र में महायुति की नई सरकार ने शपथ ले ली है। देवेन्द्र फडणवीस राज्य 5 वर्षों के बाद राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर फिर लौटे हैं। देवेन्द्र फडणवीस अब तक महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री थे। उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उनके सफ़र को लेकर कई सारी कहानियाँ सामने आई हैं। इन कहानियों में एक कहानी ऐसी भी है जो उनके बचपन की है।

देवेन्द्र फडणवीस के विषय में बताया जाता है कि उन्होंने 6 वर्ष की ही उम्र में विद्रोही स्वभाव दिखाना चालू कर दिया था। देवेन्द्र फडणवीस 1975 में इंदिरा कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते थे। वह तब मात्र 6 वर्ष के थे। उनके पिता गंगाधर फडणवीस तब जनसंघ के नेता थे।

1975 में ही देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने आपातकाल लागू कर दिया था। इस आपातकाल में कॉन्ग्रेस के अलावा सभी पार्टियों के नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा था। इसी कड़ी में जनसंघ के भी काफी नेताओं को गिरफ्तार किया गया था।

देवेन्द्र फडणवीस के पिता गंगाधर राव को भी तब गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था। उन्हें तब गिरफ्तार किया गया जब वह आपातकाल विरोधी एक रैली का नेतृत्व कर रहे थे। इस बात से बालक देवेन्द्र को काफी गुस्सा आया था। उन्होंने तब अपने स्कूल जाने से मना कर दिया था।

उन्होंने इसका कारण बताया था कि उस स्कूल के नाम में इंदिरा है। देवेन्द्र ने बताया था कि उस व्यक्ति के नाम के ऊपर रखे गए स्कूल में नहीं जा सकते जिसने उनके पिता को जेल में डाला। बताया जाता है कि इसके बाद उन्हें सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाया गया था। देवेन्द्र के पिता महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य भी रहे थे।

देवेन्द्र फडनवीस राम मंदिर आन्दोलन में भी शामिल रहे थे। उन्होंने वकालत की पढ़ाई की है। उन्होंने MBA भी किया है। वह आगे की पढ़ाई करने के लिए जर्मनी गए थे। वह नागपुर के सबसे युवा मेयर भी बने थे। इसके बाद वह मात्र 44 वर्ष की आयु में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए थे। 2019 में भी उनके नेतृत्व में NDA ने दुबारा जीत हासिल की थी।

तब शिवसेना के अलग होने की वजह से भाजपा की सरकार नहीं बन पाई थी। 2022 में इसके बाद शिवसेना टूटने के बाद वह सरकार में उपमुख्यमंत्री बन गए। 2024 में उनके नेतृत्व में पार्टी फिर जीती और वह अब मुख्यमंत्री बने हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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