क्या भंडारी-थंपी पाहवा कनेक्शन पर राहुल गाँधी जवाब देगें: राज्यवर्धन राठौड़

राज्यवर्धन राठौड़ ने भी OpIndia की न्यूज़ ट्वीट करते हुए राफेल डील पर हर दिन मोदी सरकार से सवाल करने वाले राहुल गाँधी से सवाल किए हैं कि क्या राहुल गाँधी इस जमीन घोटाले और हथियार डीलर के बीच के सम्बन्ध पर जवाब देने के लिए तैयार हैं?

कॉन्ग्रेस परिवार के सामूहिक प्रयासों से किए गए घोटालों पर ऑपइंडिया द्वारा किए गए खुलासे के बाद भाजपा नेता कॉन्ग्रेस परिवार से लगातार सवाल कर रहे हैं। यह मामला राहुल गाँधी, उनके जीजा जी रॉबर्ट वाड्रा, हथियारों के सौदागर संजय भंडारी और ED के रडार पर आए NRI बिजनेसमैन सीसी थंपी के बीच जमीन डील का है।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के बाद सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने भी OpIndia की न्यूज़ ट्वीट करते हुए राफेल डील पर हर दिन मोदी सरकार से सवाल करने वाले राहुल गाँधी से सवाल किए हैं कि क्या राहुल गाँधी इस जमीन घोटाले और हथियार डीलर के बीच के सम्बन्ध पर जवाब देने के लिए तैयार हैं?

राज्यवर्धन राठौड़ ने OpIndia की लिंक शेयर करते हुए अपने ट्वीट (अंग्रेजी) में लिखा, “Rahul Gandhi has been repeatedly asking questions on the Rafale Deal but is he ready for the answers? He must explain his links with arms dealer Sanjay Bhandari and his meeting with Eurofighter officials. Is that why he opposes the purchase of Rafale?”

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

हिंदी: “राहुल गाँधी बार-बार राफेल डील पर सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन क्या वो इस आरोप पर जवाब के देने के लिए तैयार हैं? उन्हें हथियारों के सौदागर संजय भंडारी और यूरोफाइटर अधिकारियों के साथ उनकी मुलाकात के बारे में बताना चाहिए। क्या वह इसी वजह से राफेल की खरीद का विरोध कर रहे हैं?”

दरअसल, OpIndia ने गाँधी और वाड्रा परिवार के ज़मीन सौदों की डिटेल दी है। जिसमें बताया गया है कि राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा ने ज़मीनें ना सिर्फ बाज़ार से सस्ते दामों पर खरीदी बल्कि कुछ मामलों में इन्हें बाद में उसी शख्स को बेच दिया जिससे ज़मीन खरीदी गई थी। इस व्यक्ति का नाम है एचएल पहवा! पहवा के तार सीसी थंपी और भंडारी से भी जुड़े हैं। राहुल गाँधी ने एचएल पहवा से एक ज़मीन खरीदी, ये 6.5 एकड़ ज़मीन हरियाणा के हसनपुर में है। आरोप है कि ये ज़मीन कम दामों पर खरीदी गई, ज़मीन का ये सौदा ₹26 लाख 47 हज़ार का था।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by making a monetary contribution

बड़ी ख़बर

चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई (बार एन्ड बेच से साभार)
"पारदर्शिता से न्यायिक स्वतंत्रता कमज़ोर नहीं होती। न्यायिक स्वतंत्रता जवाबदेही के साथ ही चलती है। यह जनहित में है कि बातें बाहर आएँ।"

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

112,346फैंसलाइक करें
22,269फॉलोवर्सफॉलो करें
116,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements
शेयर करें, मदद करें: