गाज़ीपुर में माया-अखिलेश की रैली में भिड़े SP-BSP कार्यकर्ता, अफ़ज़ल अंसारी है उम्मीदवार

भाषण से पहले हुई इस हाथापाई की शुरुआत किसी बात को लेकर झड़प से हुई। दोनों दलों के कार्यकर्ता अपनी-अपनी पार्टियों का झंडा लिए नारे लगा रहे थे। तभी अचानक से कहासुनी हुई और फिर मारपीट हो गई।

सपा-बसपा ने चुनाव से पहले गठबंधन किया और उत्तर प्रदेश में 6 चरणों का चुनाव संपन्न भी हो गया लेकिन रुझानों को देख कर ऐसा लगता नहीं कि दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के दिल मिले हैं। ताज़ा मामला कुछ यूँ है कि दोनों दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों की रैली में ही कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और अखिलेश-माया के गठबंधन को ज़मीनी स्तर पर धता बताया। दरअसल, गाज़ीपुर में गठबंधन की रैली थी। इसमें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, बसपा की मुखिया मायावती और रालोद सुप्रीमो चौधरी अजीत सिंह ने भाग लिया। यूपी महागठबंधन की इस संयुक्त शक्ति प्रदर्शन जनसभा के दौरान सपा और बसपा कार्यकर्ताओं ने मारपीट की। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप पूरे वाकये को देख सकते हैं, जो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

जब कार्यकर्ताओं में मारपीट हुई, तब दोनों पूर्व मुख्यमंत्री मंच पर नहीं पहुँचे थे। भाषण से पहले हुई इस हाथापाई की शुरुआत किसी बात को लेकर झड़प से हुई। दोनों दलों के कार्यकर्ता अपनी-अपनी पार्टियों का झंडा लिए नारे लगा रहे थे। तभी अचानक से कहासुनी हुई और फिर मारपीट हो गई। वहाँ मौजूद लोगों ने मोबाइल से वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाल दिया। महागठबंधन की यह संयुक्त रैली बसपा प्रत्याशी अफ़ज़ल अंसारी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए हुई। अफ़ज़ल अंसारी अपराधी से राजनेता बने मुख़्तार अंसारी का भाई है। मुख़्तार अभी जेल में बंद है।

गाज़ीपुर सीट की बात करें तो वर्तमान में केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा यहाँ से सांसद हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने सपा प्रत्याशी को 32,000 मतों के अंतर से मात दी थी जो कि बहुत कम है। सपा और बसपा प्रत्याशियों के बीच मतों का अंतर भी लगभग इतना ही था। ऐसे में, इस सीट को लेकर अभी तक संशय बना हुआ है। वाराणसी से ख़ुद पीएम मोदी मैदान में हैं और काशी से सटी गाज़ीपुर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मनोज सिन्हा की लोकप्रियता में बढ़ोतरी हुई है और वो अपने द्वारा कराए गए विकास कार्यों के साथ-साथ नरेंद्र मोदी के चेहरे और राष्ट्रवाद के मुद्दे के साथ मैदान में हैं।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

जबकि, महागठबंधन प्रत्याशी 2014 के समीकरणों के आधार पर जातिगत गणित के कारण अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं। भाजपा इस सीट के लिए पूरा ज़ोर लगा रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की रैलियाँ हो चुकी हैं। वहीं महागठबंधन की तरफ से अखिलेश यादव, मायावती और अजीत सिंह की संयुक्त रैली हुई। हाँ, कार्यकर्ताओं की झड़प से महागठबंधन की फ़ज़ीहत तो हुई है और ज़मीन पर उनकी पोल खुल गई है। साथ ही, विधायक हत्याकांड में ज़मानत पर बाहर अफ़ज़ल अंसारी का आपराधिक बैकग्राउंड भी किसी से छिपा नहीं है।

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी सपा-बसपा गठबंधन का कार्यकर्ताओं को इतिहास के सारे गिले-शिकवे भूल कर साथ काम करने की सलाह दी थी। गठबंधन के नेता वैसे तो आश्वस्त नज़र आते हैं लेकिन कहीं न कहीं उनकी चिंता है कि दोनों दलों के कार्यकर्ता एक-दूसरे का वोट बैंक ट्रांसफर कर पाएँगे या नहीं।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by making a monetary contribution

बड़ी ख़बर

जेएनयू छात्र विरोध प्रदर्शन
गरीबों के बच्चों की बात करने वाले ये भी बताएँ कि वहाँ दो बार MA, फिर एम फिल, फिर PhD के नाम पर बेकार के शोध करने वालों ने क्या दूसरे बच्चों का रास्ता नहीं रोक रखा है? हॉस्टल को ससुराल समझने वाले बताएँ कि JNU CD कांड के बाद भी एक-दूसरे के हॉस्टल में लड़के-लड़कियों को क्यों जाना है?

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

112,491फैंसलाइक करें
22,363फॉलोवर्सफॉलो करें
117,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements
शेयर करें, मदद करें: