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खुश हूँ कि 370 के विरोध में कश्मीरी लड़के सड़क पर नहीं उतरे, हमारे पास और रास्ता है: शेख अब्दुल्ला की पोती

आलिया ने प्रदेश में लगाए गए प्रतिबंधों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें लॉकडाउन करके रखा गया है और परिवार के उन सदस्यों से भी नहीं मिलने दिया जा रहा है, जिनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि अब इस फैसले के 12 दिन हो गए हैं और सरकार को इसमें छूट देनी चाहिए।

जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के संस्थापक शेख मुहम्मद अब्दुल्ला की बड़ी पोती और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम मोहम्मद शाह की बेटी की आलिया अब्दुल्ला ने कश्मीर मुद्दे पर सरकार द्वारा लिए गए फैसले पर
शुक्रवार (अगस्त 16, 2019) को अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने राज्य से अनुच्छेद 370 के निष्क्रिय होने के बाद कश्मीरी लड़कों के सड़कों पर विरोध प्रदर्शन में न उतरने को लेकर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि
उन्हें खुशी है कि इसके विरोध में कश्मीरी लड़के सड़क पर नहीं उतरे।

उन्होंने कहा कि उनके पास एक और रास्ता है। मगर, फिलहाल शांत रहने की जरूरत है। आलिया ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सब कुछ खुलने के बाद भी लोग शांत रहेंगे। केंद्र सरकार द्वारा राज्य के विशेष दर्जा को खत्म करने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेश-जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने को लेकर उन्होंने एएनआई से बात करते हुए ये बातें कहीं।

हालाँकि, उन्होंने प्रदेश में लगाए गए प्रतिबंधों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें लॉकडाउन करके रखा गया है और परिवार के उन सदस्यों से भी नहीं मिलने दिया जा रहा है, जिनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि अब इस फैसले के 12 दिन हो गए हैं और सरकार को इसमें छूट देनी चाहिए। साथ ही उन्होंने राज्य के एक और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के नजरबंद न करने की बात को झूठा बताया और सरकार पर आरोप लगाया कि फारूक के सांसद होने के बावजूद उन्हें नजरबंद रखा गया था।

आलिया ने कहा, “मेरा मानना है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोगों को एक दूसरे के साथ बात करने की छूट होने चाहिए। हमारे ऊपर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।” आलिया ने जम्मू कश्मीर के नेताओं द्वारा राज्य में हिंसा के लिए उकसाने की बातों का भी खंडन किया और कहा कि लॉकडाउन से ठीक एक दिन पहले सभी लोगों से गुप्कर डेक्लरेशन (Gupkar declaration) के माध्यम से शांति बनाए रखने के लिए कहा गया था। इसके साथ ही बोलने के संवैधानिक अधिकार को रेखांकित करते हुए आलिया ने कहा कि सरकार को घाटी के राजनेताओं से अपनी भाषा बोलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए और उनके (घाटी के राजनेताओं) विचारों का सम्मान करना चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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