Friday, June 14, 2024
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‘मर्द नहीं बचे हैं क्या?’: जामा मस्जिद के शाही इमाम ने मुस्लिम महिलाओं को टिकट दिए जाने पर उठाया सवाल, कहा- इससे इस्लाम होता है कमजोर

इमाम शब्बीर अहमद सिद्दीकी ने मुस्लिमों से एकजुट होकर गुजरात चुनाव में वोट डालने की अपील की है। इसके पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के वोटों के बँटवारे के चलते साल 2012 में अहमदाबाद की जमालपुरा सीट पर भी भाजपा ने कब्ज़ा जमा लिया था।

गुजरात विधानसभा चुनावों (Gujarat Assembly Elections) में मतदान दौरान मुस्लिमों (Muslims) से एकजुट रहने की अपील करने वाले अहमदाबाद स्थित जामा मस्जिद के शाही इमाम शब्बीर अहमद सिद्दीकी ने एक और बयान दिया है। सिद्दीकी ने कहा कि चुनावों में मुस्लिम महिलाओं को टिकट देने वाले इस्लाम के खिलाफ हैं और वे इसे कमजोर कर रहे हैं।

इमाम सिद्दीकी ने कहा, “अभी आपने देखा नमाज पढ़ना। एक भी औरत नजर आई? इस्लाम में सबसे ज्यादा अहमियत नमाज को है। अगर औरतों को इस तरह से लोगों के सामने आना इस्लाम में जायज होता तो उन्हें मस्जिद में नहीं रोका जाता। मस्जिद से रोक दिया गया, क्योंकि औरत का इस्लाम में एक मुकाम है।”

सिद्दीकी मुस्लिम महिलाओं को टिकट देने वालों पर भी भड़के। उन्होंने कहा, “जो मुस्लिम औरतों को टिकट देते हैं, वे इस्लाम के खिलाफ बगावत करते हैं। इस्लाम के खिलाफ उनका ये अमल है। आपको मर्द नहीं मिला कि आप औरतों को ला रहे हैं? इससे हमारा मजहब कमजोर होगा। कमजोर इसलिए होगा, क्योंकि कल कर्नाटक में हिजाब का मसला चला तो काफी हंगामा हुआ।”

महिलाओं को टिकट देने से इस्लाम कैसे कमजोर होगा, इसको लेकर सिद्दीकी तर्क देते हैं, “अब कल अपनी औरतों को काउंसलर या विधायक बनाएँगे तो हम हिजाब को महफूज नहीं रख पाएँगे। इस मसले को हम फिर नहीं उठा सकेंगे, क्योंकि इसे उठाने के लिए हम सरकार से बात करेंगे तो वे कहेंगे कि आपकी औरतें तो अब एसेंबली हॉल में आ रही हैं, पार्लियामेंट में जा रही हैं, म्युनिसिपालिटी के बोर्ड में बैठ रही हैं। स्टेज पर वो लोगों से अपील कर रही है। इलेक्शन लड़ने के लिए घर-घर जाना पड़ेगा। इस्लाम में औरत की आवाज भी औरत है। इसलिए मैं इसका सख्त मुखालिफ हूँ।”

मुस्लिम महिलाओं को टिकट देने के पीछे के ‘साजिश’ को समझाते हुए सिद्दीकी ने कहा, “आप मर्द को टिकट दीजिए। अगर कहीं हमारे देश का है कि उस सीट से औरतें ही लड़ सकती हैं तो वहाँ आप कह सकते थे कि भाई वहाँ तो मजबूरी है। मेरा मानना है कि ये औरतों या लड़कियों को इसलिए टिकट दे रहे हैं ताकि पूरे कब्जे में किया जा सके। आजकल तो औरतों की चलती है तो वो आगे आ जाएगी तो पूरा परिवार कब्जे में आ जाएगा। इसके सिवाय तो और कोई मकसद मुझे नहीं लगता।”

मुस्लिमों से एकजुट होकर वोट करने की अपील

इमाम शब्बीर अहमद सिद्दीकी ने मुस्लिमों से एकजुट होकर गुजरात चुनाव में वोट डालने की अपील की है। इसके पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के वोटों के बँटवारे के चलते साल 2012 में अहमदाबाद की जमालपुरा सीट पर भी भाजपा ने कब्ज़ा जमा लिया था। सिद्दीकी ने कहा है कि मुस्लिम उसी को जिताएँ जो उनका प्रतिनिधित्व करता हो। खुद शब्बीर भी दूसरे, यानी कि अंतिम चरण के चुनाव में 5 दिसंबर, 2022 को अपना वोट अहमदाबाद में डालेंगे।

साल 2012 में जमालपुरा सीट से कॉन्ग्रेस पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारा था। उनके विरोध में एक स्थानीय नेता साबिर काबलीवाला भी चुनाव लड़े थे। काबलीवाला को लगभग 30 हजार वोट मिले थे। इस खींचतान में भाजपा प्रत्याशी ने 6000 वोटों से जीत दर्ज कर ली थी। एक बार फिर से काबलीवाला उसी जमालपुरा से चुनावी मैदान में हैं। इस बार वो ओवैसी की पार्टी AIMIM से प्रत्याशी हैं।

ओवैसी की पार्टी की गुजरात चुनावों में एंट्री पर सवाल खड़े करते हुए इमाम शब्बीर ने पूछा कि वो विधानसभा में क्या करने जा रहे हैं? बकौल शाही इमाम, मुस्लिमों की भाजपा से दुश्मनी है तो ऐसे समय पर उन्हें कॉन्ग्रेस से भी शत्रुता नहीं करनी चाहिए। इमाम ने खुले तौर पर मुस्लिमों से एकजुट हो कर कॉन्ग्रेस को वोट देने की अपील की।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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