6 फीट से ऊँची न हो दुर्गा प्रतिमा: कमलनाथ सरकार का तुगलकी फरमान

इस आदेश से कारीगर दुविधा में हैं। अचानक से नया नियम तय किए जाने के बाद उन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि अब उनकी मूर्तियाँ कौन ख़रीदेगा? कारीगरों ने जिला प्रशासन के इस फरमान पर आपत्ति जताई।

मध्य प्रदेश में जब से कमलनाथ के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी है कानून-व्यवस्था की स्थिति बदतर होती जा रही है। इसे सुधारने की बजाए सरकारी अमला अब हिंदुओं की आस्था की ऊँचाई तय करने में जुट गया है।

इस कड़ी में दुर्गा पूजा को लेकर जिला प्रशासन ने नया फरमान जारी किया है। इसके मुताबिक पूजा पंडालों में 6 फ़ीट से ऊँची दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति नहीं होगी।

इस वर्ष दुर्गा पूजा 29 सितम्बर से शुरू होगी और 7 अक्टूबर को इसका समापन होगा। दशहरा 8 अक्टूबर को है।

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दुर्गा पूजा को लेकर अचानक से ऐसे समय में फरमान जारी किया गया है, जब अधिकतर मूर्तियाँ तैयार की जा चुकी हैं या फिर उनका निर्माण पूरे होने के कगार पर है। कारीगर दुविधा में हैं क्योंकि अचानक से नया नियम तय किए जाने के बाद उन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि अब उनकी मूर्तियाँ कौन ख़रीदेगा? कारीगरों ने जिला प्रशासन के इस फरमान पर आपत्ति जताई

भोपाल प्रशासन ने कहा है कि उसने ये निर्णय गणेश पूजा के दौरान हुए हादसे के मद्देनजर लिया है। कहा गया है कि अगर 6 फ़ीट से ज्यादा ऊँची मूर्ति स्थापित करनी ही है तो इसके लिए स्थानीय थानाध्यक्ष से अनुमति लेनी होगी। रविवार (सितम्बर 15, 2019) को जिला प्रशासन और कारीगरों की बैठक भी हुई, जिसमें मूर्तियों को लेकर ऊँचाई तय करने का फरमान सुनाया गया। कई कारीगर बैठक छोड़ कर निकल गए, क्योंकि उन्हें जिला प्रशासन का यह फ़ैसला मान्य नहीं था।

बता दें कि भोपाल में अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणेश प्रतिमा के विसर्जन के दौरान नाव पलटने से 11 लोगों की मौत हो गई थी। राजघानी भोपाल की छोटी झील के खटलापुरा घाट में उस समय हादसा हुआ जब प्रतिमा विर्सजन के दौरान नाव का संतुलन बिगड़ गया जिससे नाव में सवार लोग डूब गए। इस हादसे में 5 लोगों को बचाया जा सका। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रत्येक मृतक को 4 लाख रुपए मुआवजे के रूप में देने का ऐलान किया।

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