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खून से सने चावल खिलाएँगे… इतने गिरे हैं क्या हम: फारूक अब्दुल्ला ने The Kashmir Files को बैन करने की उठाई माँग, फिल्म को कहा कश्मीरी हिंदुओं की हत्या की वजह

अब्दुल्ला ने मीडिया को बताया कि उन्होंने उप राज्यपाल से क्या बात की। साथ ही ये भी बताया कि वो बैठक में पूछकर आए हैं कि क्या वाकई ऐसा लगता है कि वो लोग (मुस्लिम कट्टपंथी) हिंदुओं को खून से सने चावल खिलाएँगे।

जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार (16 मई 2022) को फिर ‘द कश्मीर फाइल्स’ का मुद्दा उठाया। उन्होंने फिल्म पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात कही है। साथ ही अब्दुल्ला ने लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा से मुलाकात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इस दौरान दोनों के बीच राज्य की कानून और व्यवस्था पर चर्चा हुई। बता दें कि कि बीते सप्ताह केंद्र शासित प्रदेश में हिंसा की कई खबरें सामने आई हैं।

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने नजरबंदी की खबरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हम सियासत नहीं करना चाहते थे, हम हमदर्दी करना चाहते थे। मगर हमदर्दी करने के लिए भी आप रोक रहे हैं। तो कैसे यह चलेगा, कैसे हम एक दूसरे के करीब आ सकते हैं। अगर हमें एक-दूसरे के करीब आना है तो यह नफरत खत्म करनी है।”

‘क्या हम इतने गिरे हुए हैं’

अब्दुल्ला ने मीटिंग के बारे में जानकारी देते हुए कहा, “मैंने यह भी कहा कि ये जो कश्मीर फाइल्स आपने फिल्म बनवाई है। क्या यह सच है कि एक मुसलमान एक हिंदू को मारेगा और उसके बाद उसका खून जो है वो चावल में डालकर कहेगा उसकी बीवी से तुम यह खाओ, क्या हो सकता है, क्या हम इतने गिरे हुए हैं… कश्मीर में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को रोकना है तो इस फिल्म पर रोक लगानी जरूरी है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह फिल्म बेबुनियाद फिल्म, जिसने न सिर्फ नफरत मुल्क में पैदा की है, बल्कि यहाँ हमारे जवानों में भी नफरत हुई है कि हमारे तरफ कैसे सोच रहे हैं। जो मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है इस वक्त हिंदुस्तान के कोनों में वो हमारे बच्चों के मन में भी एक लहर पैदा कर रहा है। ऐसी चीजों को बंद करना चाहिए।”

वहीं पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी कश्मीरी फाइल्स पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, “हमने कश्मीरी पंडितों के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाया था। चाहे वो NC हो, कॉन्ग्रेस हो, पीडीपी हो, यहाँ सुरक्षा गार्ड के साथ मिलकर एक माहौल बनाया था कि यहाँ कश्मीरी पंडित को मारा नहीं जाता था। आपने देखा 2010 और 2016 में अशांति चरम पर था, लेकिन इस दौरान कोई हत्या नहीं हुई। इस वक्त उन्होंने जो माहौल बनाया है, खासकर कश्मीर फाइल्स बनने के बाद, जो इन्होंने नफरतें लोगों के दिलों में डाल दी है। इनलोगों ने एक नैरेटिव के साथ माइंडसेट चेंज किया और दुर्भाग्य से ये मीडिया शाम को 4 घंटे हिंदू हिंदू-मुस्लिम पर डिबेट करता है। इससे नफरतें और भी बढ़ रही हैं और इसका असर हमारी जम्मू कश्मीर पर सीधा पड़ता है। जब आप मुसलमानों को निशाना बनाते हो। उनके घरों को तोड़ते हो। हमारे मस्जिदों को दिन-ब-दिन बाबरी मस्जिद को शहीद करके वहाँ कुछ और बनाना चाहते हो। उससे कश्मीर में डारेक्ट इम्पैक्ट पड़ता है। इससे लोगों में और दूरियाँ बढ़ती हैं।”

उल्लेखनीय है कि गुरुवार (12 मई, 2022) की शाम को चडूरा गाँव में स्थित तहसीलदार ऑफिस में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने 36 साल के राहुल भट पर गोलियाँ बरसा दी थीं। राहुल को हमले के तुरंत बाद अस्पताल पहुँचाया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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