Tuesday, May 21, 2024
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चिदंबरम की गिरफ़्तारी: बौखलाए सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को सुनाई खरी-खोटी

भाजपा को कोसते-कोसते पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल एक क़दम और आगे बढ़ गए। उन्होंने हाईकोर्ट के उस जज पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, जिन्होंने पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज की थी।

पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया केस में गिरफ़्तार किया जा चुका है और उनसे पूछताछ जारी है। हालाँकि, उन्हें गिरफ़्तार करने के लिए सीबीआई को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि उन्होंने अपने घर का दरवाजा बंद कर रखा था। उनके घर के कम्पाउंड में घुसने के लिए सीबीआई अधिकारियों को दीवार लांघनी पड़ी। कॉन्ग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को ‘दिनदहाड़े लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है और कहा कि असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यह सब किया जा रहा है। कॉन्ग्रेस का दावा है कि चिदंबरम या उनके परिवार में किसी के ख़िलाफ़ इस मामले में कोई भी आरोप नहीं है।

भाजपा को कोसते-कोसते पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल एक क़दम और आगे बढ़ गए। उन्होंने हाईकोर्ट के उस जज पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, जिन्होंने पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज की थी। जस्टिस सुनील गौड़ ने यह कहते हुए उन्हें गिरफ़्तारी से राहत देने से मना कर दिया कि इस मामले में प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता (पी चिदंबरम) ही मुख्य साज़िश रचने वाला प्रतीत होता है। कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्होंने 25 जनवरी को ही फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था और जब उनकी रिटायरमेंट में 2 दिन बचे तो अपना निर्णय सुना दिया।

सिब्बल ने फैसले की टाइमिंग पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि 3.25 में जजमेंट सुनाया गया और जब वो लोग 4 बजे अग्रिम जमानत के लिए गए तो उनकी याचिका ख़ारिज कर दी गई। सिब्बल के अनुसार, ऐसा इसीलिए किया गया ताकि वे सुप्रीम कोर्ट न जा सकें। उन्होंने जज के ही तौर-तरीकों पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि ये पूरी प्रक्रिया चिंताजनक है। बता दें कि कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी के मामले में भी जस्टिस सुनील गौड़ ने अहम निर्णय सुनाया। इस मामले में उन्होंने आदेश दिया कि प्रभावशाली जाँच के लिए आरोपित को कस्टडी में लेकर पूछताछ करना ज़रूरी है।

वहीं अगर कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल की बात करें तो वह हाईकोर्ट और जस्टिस सुनील गौड़ पर ही नहीं रुके बल्कि सुप्रीम कोर्ट को भी अपने लपेटे में ले लिया। उन्होंने कहा, “हमें बताया गया कि सीजेआई इस पर फैसला लेंगे। जबकि सुप्रीम कोर्ट हैंडबुक के अनुसार, अगर सीजेआई संवैधानिक पीठ में व्यस्त हैं तो नियमानुसार दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश इसकी सुनवाई करें। हमें अपना अधिकार नहीं मिला।

कपिल सिब्बल को रजिस्ट्रार ने कहा कि सीजेआई गोगोई उनकी अपील पर शाम 4 बजे सुनवाई करेंगे। सिब्बल ने नाराज़गी जताई कि शाम 4 बजे के बाद तो सुनवाई के लिए समय ही नहीं बचता है। इस मामले में अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं ने भी अपना गुस्सा बाहर निकाला है। जहाँ सिंघवी ने चिदंबरम को भगोड़ा बताने के लिए मीडिया को खरी-खोटी सुनाई तो सुरजेवाला ने केंद्र सरकार को निशाने पर रखा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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