चिदंबरम की गिरफ़्तारी: बौखलाए सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को सुनाई खरी-खोटी

भाजपा को कोसते-कोसते पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल एक क़दम और आगे बढ़ गए। उन्होंने हाईकोर्ट के उस जज पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, जिन्होंने पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज की थी।

पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया केस में गिरफ़्तार किया जा चुका है और उनसे पूछताछ जारी है। हालाँकि, उन्हें गिरफ़्तार करने के लिए सीबीआई को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि उन्होंने अपने घर का दरवाजा बंद कर रखा था। उनके घर के कम्पाउंड में घुसने के लिए सीबीआई अधिकारियों को दीवार लांघनी पड़ी। कॉन्ग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को ‘दिनदहाड़े लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है और कहा कि असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यह सब किया जा रहा है। कॉन्ग्रेस का दावा है कि चिदंबरम या उनके परिवार में किसी के ख़िलाफ़ इस मामले में कोई भी आरोप नहीं है।

भाजपा को कोसते-कोसते पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल एक क़दम और आगे बढ़ गए। उन्होंने हाईकोर्ट के उस जज पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, जिन्होंने पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज की थी। जस्टिस सुनील गौड़ ने यह कहते हुए उन्हें गिरफ़्तारी से राहत देने से मना कर दिया कि इस मामले में प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता (पी चिदंबरम) ही मुख्य साज़िश रचने वाला प्रतीत होता है। कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्होंने 25 जनवरी को ही फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था और जब उनकी रिटायरमेंट में 2 दिन बचे तो अपना निर्णय सुना दिया।

सिब्बल ने फैसले की टाइमिंग पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि 3.25 में जजमेंट सुनाया गया और जब वो लोग 4 बजे अग्रिम जमानत के लिए गए तो उनकी याचिका ख़ारिज कर दी गई। सिब्बल के अनुसार, ऐसा इसीलिए किया गया ताकि वे सुप्रीम कोर्ट न जा सकें। उन्होंने जज के ही तौर-तरीकों पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि ये पूरी प्रक्रिया चिंताजनक है। बता दें कि कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी के मामले में भी जस्टिस सुनील गौड़ ने अहम निर्णय सुनाया। इस मामले में उन्होंने आदेश दिया कि प्रभावशाली जाँच के लिए आरोपित को कस्टडी में लेकर पूछताछ करना ज़रूरी है।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

वहीं अगर कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल की बात करें तो वह हाईकोर्ट और जस्टिस सुनील गौड़ पर ही नहीं रुके बल्कि सुप्रीम कोर्ट को भी अपने लपेटे में ले लिया। उन्होंने कहा, “हमें बताया गया कि सीजेआई इस पर फैसला लेंगे। जबकि सुप्रीम कोर्ट हैंडबुक के अनुसार, अगर सीजेआई संवैधानिक पीठ में व्यस्त हैं तो नियमानुसार दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश इसकी सुनवाई करें। हमें अपना अधिकार नहीं मिला।

कपिल सिब्बल को रजिस्ट्रार ने कहा कि सीजेआई गोगोई उनकी अपील पर शाम 4 बजे सुनवाई करेंगे। सिब्बल ने नाराज़गी जताई कि शाम 4 बजे के बाद तो सुनवाई के लिए समय ही नहीं बचता है। इस मामले में अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं ने भी अपना गुस्सा बाहर निकाला है। जहाँ सिंघवी ने चिदंबरम को भगोड़ा बताने के लिए मीडिया को खरी-खोटी सुनाई तो सुरजेवाला ने केंद्र सरकार को निशाने पर रखा।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

गृह मंत्री रहते चिदंबरम ने हिंदी के पूरे देश की भाषा बनने की उम्मीद जताई थी। सरकारी दफ्तरों में संवाद के लिए हिंदी के इस्तेमाल पर जोर दिया था। लेकिन, अब जिस तरह उनकी पार्टी और गठबंधन के साथी अमित शाह के बयान पर जहर उगल रहे हैं उससे जाहिर है यह अंध विरोध के अलावा कुछ भी नहीं।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

शरद पवार

पाकिस्तान जैसा प्यार कहीं नहीं मिला, 370 हटाने से बढ़ेगा आतंकवाद: शरद पवार

"मैं पाकिस्तान गया हूँ। वहाँ के लोगों में मेहमाननवाजी कूट-कूट कर भरी है।पाकिस्तान के बारे में गलत चित्र पेश किया जा रहा है कि वहाँ लोग खुश नहीं हैं। यहाँ (भारत) सरकार राजनीतिक लाभ लेने के लिए पाकिस्तान के बारे में झूठी खबरें फैला रही है।”
हिना सिद्धू, मलाला युसुफ़ज़ई

J&K पाकिस्तान को देना चाहती हैं मलाला, पहले खुद घर लौटकर तो दिखाएँ: पूर्व No.1 शूटर हिना

2013 और 2017 विश्वकप में पहले स्थान पर रह कर गोल्ड मेडल जीत चुकीं पिस्टल शूटर हिना सिद्धू ने मलाला को याद दिलाया है कि ये वही पाकिस्तान है, जहाँ कभी उनकी जान जाते-जाते बची थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए कितने मौके हैं, इसे मलाला बेहतर जानती हैं।
सिंध, पाकिस्तान

मियाँ मिट्ठू के नेतृत्व में भीड़ ने हिन्दू शिक्षक को पीटा, स्कूल और मंदिर में मचाई तोड़फोड़

इस हमले में कट्टरपंथी नेता मियाँ मिट्ठू का हाथ सामने आया है। उसने न सिर्फ़ मंदिर बल्कि स्कूल को भी नुक़सान पहुँचाया। मियाँ मिट्ठू के नेतृत्व में भीड़ ने पुलिस के सामने शिक्षक की पिटाई की, मंदिर में तोड़फोड़ किया और स्कूल को नुक़सान पहुँचाया।
सुब्रमण्यम स्वामी: राजनीति के लिए free market/हिंदुत्व, या free market/हिंदुत्व के लिए राजनीति?

सियासत का स्वामी: जिसके कारण गॉंधी कठघरे में आए, वाजपेयी गए और रामसेतु बचा

स्वामी की ‘legacy’ के आकलन में पार्टी, विचारधारा और निष्ठा को एक ही चीज़ मानकर देखने पर वे शायद ‘मौकापरस्त’, नज़र आएँगे। लेकिन किसी नेता को आंकने के पैमाने के तौर पर उसके कर्म उसके शब्दों से अधिक सटीक होते हैं और स्वामी को इसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।
अखिलेश यादव-मुलायम सिंह यादव

लोहिया ट्रस्ट की बिल्डिंग यादव परिवार के कब्जे से मुक्त, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर योगी सरकार ने की कार्रवाई

लोहिया ट्रस्ट के मुलायम सिंह यादव अध्यक्ष और शिवपाल सिंह यादव सचिव हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और कई शीर्ष नेता ट्रस्ट के सदस्य हैं। यह बिल्डिंग शिवपाल यादव की पार्टी के कब्जे में थी और पिछले कुछ महीने से इसका बाजार दर पर किराया वसूला जा रहा था।
सरदार पटेल, ऑपरेशन पोलो हैदराबाद

जब सरदार पटेल ने हैदराबाद को कश्मीर बनने से रोका: कहानी निज़ाम को झुकाने वाले Operation Polo की

108 घंटे तक चले इस ऑपरेशन के दौरान 18 सितम्बर को भारतीय सेना हैदराबाद में घुसी। हैदराबाद की सरकार ने 17 सितम्बर को ही इस्तीफा दे दिया था। हाउस अरेस्ट में किए जाने का बाद निज़ाम अब ये कह कर भुलावा दे रहा था कि वह नई सरकार का गठन करेगा।
तीन तलाक

जेठ ने किया बलात्कार, पति से शिकायत करने पर पीड़िता को मिला तीन तलाक

पीड़िता के भाई का कहना है कि उसकी बहन ने जब अपने मायके वालों को इसकी शिकायत की, तो उसके पति ने उसे तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया। पीड़िता के भाई ने थाने में उसके पति, जेठ, सास और जेठानी के खिलाफ शिकायत दी है।
सुप्रीम कोर्ट, राम मंदिर

अगर राम जन्मस्थान को लेकर आस्था है तो इस पर सवाल नहीं उठा सकते: सुप्रीम कोर्ट

मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने अदालत में दावा किया कि पहले हिंदू बाहर के अहाते में पूजा करते थे, लेकिन दिसंबर 22-23, 1949 की रात रामलला की मूर्ति को अवैध तरीके से मस्जिद के अंदर शिफ्ट कर दिया गया।
बिहार, भागलपुर, ताजिया जुलूस

मुहर्रम: ताजिया जुलूस के सामने आए CISF जवान पर चाकू से हमला, 5 पुलिसकर्मी घायल

चिड़ैया गाँव के सीआइएसएफ के जवान बाइक से स्टेशन जा रहे थे, उनकी बाइक को रोका गया, उन पर हमला हुआ और मुहर्रम के जुलूस में शामिल एक युवक ने तो सीआईएसएफ के जवान पर चाकू से भी वार किया.......

शेख अब्दुल्ला ने लकड़ी तस्करों के लिए बनाया कानून, फॅंस गए बेटे फारूक अब्दुल्ला

फारूक अब्दुल्ला को जिस पीएसए एक्ट तहत हिरासत में लिया गया है उसमें किसी व्यक्ति को बिना मुक़दमा चलाए 2 वर्षों तक हिरासत में रखा जा सकता है। अप्रैल 8, 1978 को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल से इसे मंजूरी मिली थी। यह क़ानून लकड़ी की तस्करी रोकने के लिए लाया गया था।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

91,034फैंसलाइक करें
14,938फॉलोवर्सफॉलो करें
97,404सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: