Homeराजनीति3 महीने में ही कॉन्ग्रेस के लिए सांप्रदायिक हुए कुमारस्वामी, सिद्धारमैया ने कहा- पूर्व...

3 महीने में ही कॉन्ग्रेस के लिए सांप्रदायिक हुए कुमारस्वामी, सिद्धारमैया ने कहा- पूर्व सीएम का असली रंग सामने आया

मई 2018 में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा बहुमत से दूर रह गई थी। उसे रोकने के लिए कॉन्ग्रेस ने जेडीएस से हाथ मिला लिया था। लेकिन जुलाई के अंत में दोनों दलों के विधायकों की बगावत के कारण यह सरकार गिर गई थी।

ज्यादा वक्त नहीं बीता है जब कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर भी जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक में अपनी सरकार नहीं बचा पाए थे। सरकार बचाने के लिए उस समय तमाम हथकंडे अपनाए गए थे। अब पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा है कि वे राज्य की भाजपा सरकार को गिरने नहीं देंगे। उन्होंने कहा, “मैं मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई वाली सरकार को गिरने नहीं दूँगा। कॉन्ग्रेस की मध्यावधि चुनाव कराने की मंशा को पूरा नहीं होने दूँगा।”

पत्रकारों से बात करते कुमारस्वामी यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार का कार्यकाल मेरे हाथों में है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में राज्य में बाढ़ के चलते हालत खराब है। राज्य सरकार जो धनराशि दे रही है उसका आवंटन बाढ़ प्रभावितों के पुनर्वास के लिए किया जाना चाहिए। जिन किसानों की फसल बाढ़ में तबाह हो गई है उन्हें मुआवजा दिया जाए और बेघरों को आवास मुहैया कराया जाए।

कुमारस्वामी ने कहा कि इस समय राज्य में मध्यावधि चुनाव कराने के लिए 250 करोड़ रुपए से अधिक की जरूरत होगी। इस पैसे के इस्तेमाल प्रभावित लोगों की मदद के लिए किया जा सकता है। उनका कहना है कि राज्य में फिर से चुनाव कराए जाने का यह सही समय नहीं है। भाजपा सरकार कुछ माह पहले ही सत्ता में आई है, उसे काम करने के लिए थोड़ा समय देना चाहिए।

हालाँकि कुमारस्वामी का यह बयान कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को रास नहीं आया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के प्रति समर्पण का भाव दिखा कर जेडीएस नेता सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “कुमारस्वामी पहले भी सांप्रदायिक भाजपा के समर्थन से सरकार बना चुके हैं। इसलिए मुझे उनके बयान से कोई आश्चर्य नहीं हो रहा है। जेडीएस नेता का असली रंग फिर सामने आ गया।”

सिद्धारमैया ने कहा, “मैंने राज्य में भाजपा सरकार को गिराने की कसम नहीं खाई थी, बल्कि विधानसभा उपचुनावों में भगवा पार्टी की हार के साथ भाजपा सरकार के गिरने का अनुमान जताया था।” गौरतलब है कि मई 2018 में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा बहुमत से दूर रह गई थी। उसे रोकने के लिए कॉन्ग्रेस ने जेडीएस से हाथ मिला लिया था। लेकिन जुलाई के अंत में दोनों दलों के विधायकों की बगावत के कारण यह सरकार गिर गई थी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘काफ़िर’ अब समंदर पार नहीं है.. कैसे 11वीं सदी का क्रूसेड बना नए पेंटागन की विचारधारा? डोनाल्ड ट्रंप और अमरीकी कल्चर वॉर

1095 में पोप अर्बन द्वितीय ने यरूशलम के लिए जिस धर्मयुद्ध का ऐलान किया था, आज डोनाल्ड ट्रंप के नए अमेरिका के पीछे वही विचार काम कर रहा है। ट्रंप के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और उनकी किताब 'The War on Warriors' से समझिए कि कैसे 1000 साल पुराना 'Deus Vult' का सिद्धांत आज अमरीकी राजनीति और कल्चर वॉर को चला रहा है।

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।
- विज्ञापन -