Thursday, October 1, 2020
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कश्मीर: सरकार की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति ने मार गिराए 253 आतंकवादी

वर्ष 2017 में यह आँकड़ा 213 था, 2016 में 150 और 2015 में 108। सरकार ने यह भी कहा कि 2017 में 18 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया।

गृह मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 में 28 दिसंबर तक जम्मू और कश्मीर में मुठभेड़ों में 253 आतंकवादी मारे जा चुके हैं। वर्ष 2017 में यह आँकड़ा 213 था, 2016 में 150 और 2015 में 108। सरकार ने यह भी कहा कि 2017 में 18 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया।

आतंकवाद के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति और सुरक्षा बलों द्वारा दी गई प्रभावी प्रतिक्रिया, आतंकवादी गतिविधियों का मुकाबला करने में कारगार साबित हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में 300 से अधिक आतंकवादी सक्रिय हैं, जिनकी मदद कुछ स्थानीय लोग कर रहे हैं।

गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर द्वारा कल लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, सरकार ने युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए कई प्रयास किए हैं, जिनमें रोजगार के अवसर प्रदान करना और ‘यूथ एक्सचेंज’ कार्यक्रम शामिल हैं। विभिन्न विकास गतिविधियों के लिए पीएम विकास पैकेज, 2015 के तहत 80,068 करोड़ रुपये भी प्रदान किए गए हैं।

सरकार ने स्कूलों और कॉलेज छोड़ने वालों को विकल्प और अवसर प्रदान करने तथा स्नातकों, डिप्लोमा धारक युवाओं को दक्ष और रोजगार पाने योग्य बनाने के लिए विशेष उद्योग पहल (SII) जैसी कई अन्य पहल भी की हैं। सरकार ने जम्मू और कश्मीर से बाहर के राज्यों में अध्ययन करने के लिए 12 वीं कक्षा या समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना भी शुरू कर दिया है।

हमने पहले अपनी रिपोर्ट में बताया था कि वामपंथी आतंकवाद (LWT) से निपटने के लिए, आंतरिक सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए सरकार की पहल ने किस प्रकार से सकारात्मक परिणाम निकाले हैं। वर्तमान NDA सरकार क्षेत्र में आतंक को खत्म करने के लिए “कैरट एंड स्टिक” नीति के प्रयोग से ‘वामपंथी-आतंकवाद’ (LWT) की समस्या से सफलतापूर्वक लड़ रही है।

सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के गढ़ों में व्यापक और निर्धारित लक्षित अभियान चलाए हैं और आतंकवादियों का सफाया करने में सफल रहे हैं। राज्य सरकार के साथ-साथ सुरक्षा बलों ने भी पुनर्वास की पहल की है ताकि नक्सली बंदूकों को त्यागकर बिना किसी हिंसा के मुख्यधारा में शामिल हो सकें। इस दृष्टिकोण को सरकार की सफल पहलों में से एक माना जा रहा क्योंकि कई नक्सली अपने शिविरों से बाहर आ चुके हैं और अब सामाजिक जीवन का हिस्सा हैं।

सरकार ने इस क्षेत्र में सड़क, रेलवे, स्कूल, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय परिव्यय के साथ इसका समर्थन किया है। प्रौद्योगिकी और मोबाइल नेटवर्क तक पहुंच ने क्षेत्र में बड़े बदलाव लाए हैं, क्योंकि इसने स्वास्थ्य देखभाल और शैक्षिक लाभ प्रदान करने में सफलता हासिल की है और स्थानीय लोगों को अपनी आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में मदद की है।

दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा के साथ-साथ नक्सल विरोधी अभियान के दौरान तिमिनार और पुसनार के जंगलों में आठ नक्सलियों को मार गिराए जाने के बाद हाल ही में, कुछ नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें नक्सल शिविरों में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। प्रशासन, सरकार की विभिन्न नीतियों और पहलों के माध्यम से, आत्मसमर्पण करने वाले कई पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास में कामयाब रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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