Thursday, April 18, 2024
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‘केजरीवाल ने लागू किया केंद्र का कृषि कानून’ और AAP विधायक कर रहे ‘किसान आंदोलन’ का समर्थन: दोहरे रवैये पर सवाल

23 नवंबर को ही एक कृषि कानून को दिल्ली में AAP सरकार लागू कर देती है। लेकिन अरविंद केजरीवाल न सिर्फ इस कानून को किसान-विरोधी बता रहे हैं, बल्कि केंद्र सरकार पर इसे वापस लेने का दबाव भी बना रहे हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके विधायक जहाँ पंजाब से आए ‘किसान आंदोलनकारियों’ के समर्थन में लगे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने खुलासा किया है कि AAP सरकार ने तो मोदी सरकार द्वारा पारित कराए गए 3 कृषि कानूनों में से एक कानून को सोमवार (नवंबर 23, 2020) को ही प्रदेश में लागू कर दिया है। उन्होंने ‘दिल्ली राजपत्र’ के दस्तावेज की तस्वीरें शेयर कर सबूत भी दिखाया।

इस दस्तावेज के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद-123 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में, भारत के राष्ट्रपति ने ‘कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा)’ नामक अध्यादेश, 2020 प्रख्यापित किया है, जिसे विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार का राजपत्र असाधारण भाग-2, खंड-1 में प्रकाशित किया गया है। आगे लिखा है कि यह किसी भी राज्य की APMC अधिनियम या अन्य कानून के लागू होने के समय प्रवृत्त या प्रलेख के प्रभाव में आने वाले समय में लागू होगा।

इस राजपत्र का गौर करने लायक हिस्सा वो है, जिसमें लिखा है, “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली की विधानसभा ने ‘दिल्ली कृषि उपज विपणन अधिनियम, 1998’ (1999 का दिल्ली अधिनियम, संख्या-7) को अधिनियमित किया है, जो जून 2, 1999 से लागू है।” यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि सरकार ने APMC के कुछ क्षेत्रों को पुनः परिभाषित किया है, जहाँ ये कानून लागू होंगे। दस्तावेज के दूसरे पन्ने पर उन परिवर्तनों के बारे में बताया गया है।

वहीं दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल न सिर्फ इस कानून को किसान-विरोधी बता रहे हैं, बल्कि केंद्र सरकार पर इसे वापस लेने का दबाव भी बना रहे हैं। यानी, दिल्ली के किसान भी अब अपनी मंडियों से बाहर अपने उत्पाद बेच सकेंगे। इससे दिल्ली की मंडियाँ ख़त्म नहीं होंगी, वो ज्यों की त्यों बनी रहेगी – ऐसा सरकार ने साफ़ कर दिया है। साथ ही मंडी से बाहर उत्पाद बेचने पर कोई शुल्क या टैक्स नहीं भरना पड़ेगा।

वहीं आम आदमी पार्टी का कहना है कि दिल्ली में तो सब्जियों और फलों को पहले ही डीरेगुलेट किया जा चुका था, अब अनाजों को लेकर भी ये सुविधा लागू हो गई। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार, पार्टी ने कहा कि किसान बस इतना चाहते हैं कि MSP से छेड़छाड़ न हो और इस मामले में पार्टी उनके समर्थन में है। सांसद मनोज तिवारी ने पूछा कि जब अपने इस कानून को लागू कर दिया है तो इसके विरोध में आपके विधायक क्यों भाग-दौड़ कर रहे हैं?

बता दें कि दिल्ली में चल रहा ‘किसान आंदोलन’ अब खालिस्तानियों और इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों के कब्जे में चला गया है। राजधानी दिल्ली के गाजीपुर क्षेत्र का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों लोग बिरयानी के लिए पंक्ति बना कर खड़े हैं। इस नज़ारे ने शाहीन बाग़ की यादें ताज़ा कर दी, जिसने दिल्ली को 100 दिनों तक बंधक बना कर रखा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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