Saturday, July 31, 2021
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कैबिनेट की मंजूरी, देश के सबसे पुराने कोलकाता पोर्ट का नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कैबिनेट में आज 'वन नेशन वन मार्केट' (One Nation One Market) को लेकर अध्यादेश पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि आज कैबिनेट में कृषि के बारे में 3 और अन्य अहम फैसले लिए गए हैं और किसान को कहीं भी उत्पाद बेचने और ज्यादा दाम देने वाले को बेचने की आजादी मिली है।

कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्र सरकार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने बताया कि कोलकाता बंदरगाह का नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर करने को मंजूरी दी गई है। जावड़ेकर ने कहा कि बैठक में कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलने का निर्णय भी लिया गया।

अब इस ट्रस्ट का नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी ट्रस्ट होगा। उल्लेखनीय है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीतिज्ञ, वकील और शिक्षाविद् थे। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में वह उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री थे। उनका जन्म वर्ष 1901 बंगाल में ही हुआ था।

इस साल फरवरी माह में कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की 150वीं वर्षगाँठ मनाई गई थी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य समारोह में भाग लेते हुए पोर्ट ट्रस्ट का नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखने का ऐलान किया था। भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दिन दयाल उपाध्याय को बीजेपी अपना वैचारिक पथ प्रदर्शक मानती है।

कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट देश का सबसे पुराना पोर्ट ट्रस्ट है। इसकी स्थापना वर्ष 1870 में हुई थी, जब भारत का शासन ईस्ट इंडिया कम्पनी से ब्रिटिश क्राउन के अधीन चला गया था।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कैबिनेट में आज ‘वन नेशन वन मार्केट’ (One Nation One Market) को लेकर अध्यादेश पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि आज कैबिनेट में कृषि के बारे में 3 और अन्य अहम फैसले लिए गए हैं और किसान को कहीं भी उत्पाद बेचने और ज्यादा दाम देने वाले को बेचने की आजादी मिली है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, अति आवश्यक वस्तु कानून को किसान हितैषी बनाया गया है और किसानों को लेकर ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। एसेंशियल कॉमोडिटी एक्ट (आवश्यक वस्तु अधिनियम) से प्याज तेल तिलहन आलू को बाहर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज कृषि उत्पादों की बहुतायत है, इसलिए ऐसे बंधनों वाले कानून की जरूरत नहीं थी।

एसेंशियल कॉमोडिटीज ऐक्ट से अनाज, तिलहन, दाल, प्याज आलू आदि बाहर किए गए हैं। किसान अब इनका भंडारण या निर्यात कर सकते हैं। विशेष परिस्थितियों को छोड़कर किसान अब भंडारण कर सकते हैं। ट्रेडर और किसान के बीच कोई विवाद होगा तो उसका तत्काल या तीन दिन में भुगतान करना होगा और इसे न्यायालय से बाहर रखा गया है। पहली शिकायत पर SDM तीस दिन में सुनवाई करेगा और इसकी अपील DM से की जा सकती है।

एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर मार्केट कमिटी के बंधन से किसान मुक्त हुआ है। किसान कहीं भी प्रॉडक्ट बेच सकेंगे। अब किसानों को ज्यादा दाम देने वाले को बेचने की आजादी मिली है। ज्यादा कीमतों की गारंटी पर कृषि ऊपज किसानो को बेचने की आजादी मिली है। 2022 तक किसान की आमदनी दोगुनी करने के लिए केंद्र सरकार लगातार काम कर रही है

केन्द्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि कॉमर्स मिनिस्ट्री के लिए प्रोजेक्ट डेवलपमेंट फंड बनाया गया है। साथ ही इस बात की जानकारी दी की श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर कोलकाता पोर्ट का नाम रखा गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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