Saturday, December 5, 2020
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लड़का तेजस्वी को, लड़की मोदी को… कुछ ऐसे जीती भाजपा मुस्लिम बहुल इलाकों को, ये वीडियो देखिए

चुनाव नतीजों के दिन शुरूआती रुझानों को देखकर विपक्ष बेहद खुश था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं पीएम मोदी ने इस बार पहले की तरह ज्यादा रैलियाँ तो नहीं की, लेकिन जितनी भी रैलियाँ की वो एनडीए के लिए फायदेमंद रही और विपक्ष के तोते उड़ गए।

बिहार में एक बार फिर एनडीए की अगुवाई में सरकार बनाने का जनादेश मिला है। तमाम एग्जिट पोल को पछाड़ते हुए नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए ने जीत दर्ज की और अपने दम पर बहुमत के आँकड़े को पार कर लिया। वहीं, लालू पुत्र युवा नेता तेजस्वी यादव की अगुवाई में महागठबंधन के हाथ निराशा लगी है।

एनडीए की जीत की नायक इस बार भारतीय जनता पार्टी रही है, जिसने जदयू से कहीं ज्यादा सीट अपने दम पर हासिल की। इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का बड़ा योगदान रहा है। बिहार में एनडीए की इस अप्रत्याशित जीत के लिए ‘तीन एम’ (3 M) फैक्टर सामने आया है, जिनके दम पर एनडीए फिर सरकार बनाती दिख रही है।

आइए देखते हैं क्या है बिहार चुनाव का ‘3M फैक्टर’ –

पहला फैक्टर: ‘एम’ से मोदी

तमाम सर्वे में इस बार दिख रहा था कि महागठबंधन एकतरफा जीत हासिल कर लेगा। वहीं, नीतीश कुमार के प्रति जनता में गुस्सा भी था। लेकिन जब बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए की ओर से मोर्चा सँभाला तो हवा का रुख बदलना शुरू हुआ। पीएम मोदी ने करीब एक दर्जन सभाएँ की, कई रैलियों में वो नीतीश कुमार के साथ भी नजर आए। पीएम ने लगातार नीतीश की तारीफ की, लोगों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें नीतीश सरकार की जरूरत है। 

इसके अलावा, केंद्र की योजनाओं का गुणगान हो, राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर विपक्ष पर वार करना हो या फिर राजद के जंगलराज का जिक्र कर तेजस्वी पर निशाना साधना हो, पीएम मोदी ने एनडीए के प्रचार को बखूबी आगे बढ़ाया, जिसने हार और जीत का अंतर तय कर दिया। नतीजों ने भी दिखाया कि जहाँ जदयू को सीटों में घाटा हुआ वहाँ पर बीजेपी की बढ़त ने एनडीए को बहुमत तक पहुँचा दिया।

दूसरा फैक्टर: ‘एम’ से महिलाएँ

एनडीए की जीत का एक अहम फैक्टर बिहार की महिला वोटर रहीं। बिहार में महिला वोटरों को नीतीश कुमार का पक्का मतदाता माना जाता रहा है, जो हर बार साइलेंट तरीके से नीतीश के पक्ष में वोट करता है। यही नतीजा इस बार के चुनाव में भी दिख रहा है। इसके अलावा महिलाओं का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कई योजनाओं पर विश्वास 2019 के लोकसभा चुनाव में भी दिखा और अब फिर इसका असर पहुँचा है।

केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना, शौचालयों का निर्माण, पक्का घर, मुफ्त राशन, तीन तलाक, महिलाओं को आर्थिक मदद जैसी कई ऐसी योजनाएँ हैं जिनका सीधा लाभ महिलाओं को होता है। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा की गई शराबबंदी के पक्ष में भी बिहार की महिलाएँ बड़ी संख्या में नजर आती हैं। ऐसे में फिर एक बार एनडीए की जीत में 50 फीसदी आबादी निर्णायक भूमिका निभाते नजर आए हैं।

खुद पीएम मोदी ने बिहार चुनाव के नतीजों के बाद महिला वोटरों को खास तौर पर धन्यवाद किया। पीएम मोदी ने लिखा, “बिहार की बहनों-बेटियों ने इस बार रिकॉर्ड संख्या में वोटिंग कर दिखा दिया है कि आत्मनिर्भर बिहार में उनकी भूमिका कितनी बड़ी है। हमें संतोष है कि बीते वर्षों में बिहार की मातृशक्ति को नया आत्मविश्वास देने का NDA को अवसर मिला, यह आत्मविश्वास बिहार को आगे बढ़ाने में हमें शक्ति देगा।”

तीसरा फैक्टर: ‘एम’ से मुस्लिम 

बिहार में मुस्लिम मतदाता मुख्य रूप से राजद के साथ जुड़ता रहा है और यही कारण है कि राजद का ‘M+Y समीकरण’ निर्णायक माना जाता रहा है। राज्य में करीब 17 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं, जो हार जीत का अंतर पैदा कर सकते थे, लेकिन इस बार यही वोटर अलग-अलग हिस्सों में बँटते हुए नजर आए, जिसका फायदा एनडीए को हो गया।

इस बार के चुनाव में मुस्लिम वोटरों के परिवार में भी वोट बँटते नजर आए। टीवी 9 भारतवर्ष की ग्राउंड रिपोर्टिंग का वीडियो सर्कुलेट हो रहा है। यह वीडियो पटना के मुराद शाह की मजार के पास की है। जहाँ रिपोर्टर मुस्लिम वोटर मोहम्मद तौफीक सवाल करते हैं कि वो किसको वोट देने वाले हैं। इस पर मोहम्मद तौफीक तेजस्वी का नाम लेते हैं, तो वहीं पास में खड़ी महिला जो शायद उनकी बेगम थी, ने बेहिचक पीएम मोदी को वोट देने की बात कही। 

महिला ने आगे यह भी कहा कि वो झूठ नहीं बोल रही, मोदी जी ही जीतेंगे। कारण पूछने पर वह कहती हैं कि पीएम मोदी ने लोगों के लिए कई सारे काम किए। यहाँ पर स्पष्ट है कि मुस्लिम महिलाओं का वोट बीजेपी के खाते में गया है।

वहीं ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं ने तेजस्वी यादव को वोट देने की बात कही थी। इसके अलावा, ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में पाया कि मुस्लिम बहुल केवटी में मोदी के नाम ने राजद के मुस्लिम-यादव समीकरण को नकार दिया। लोगों ने बताया कि लालू यादव ने 15 साल के शासन में सिर्फ लोगों को जातिवाद के नाम पर लड़ाया और अँगूठा दिखाया।

इस बार मुस्लिम मतदाताओं के सामने कई तरह के विकल्प थे, राजद की अगुवाई में महागठबंधन चुनाव लड़ रहा था तो वहीं बिहार में AIMIM ने भी बड़ी जीत हासिल की. इसके अलावा बसपा जैसी पार्टियाँ भी अपने क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों को नहीं लुभा पाईं। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM इस बार चुनाव में पाँच सीटों पर जीत हासिल कर पाई, जिसे राजद का बड़ा वोट माना जा रहा था और इन्हीं सीटों ने महागठबंधन की जीत में रोड़ा अटका दिया।

पीएम मोदी ने बिहार में अपने गठबंधन की जीत की इबारत लिख दी

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर मतगणना से पहले एक हवा बनाई गई थी कि एनडीए गठबंधन इस बार हारने वाला है, क्योंकि तेजस्वी यादव ने बड़ी ही आसानी के साथ अपना जनाधार मजबूत कर लिया, लेकिन सामने आए नतीजों ने एक बार फिर सारे गुब्बारे फोड़ दिए हैं, जिसकी बड़ी वजह प्रधानमंत्री की रैलियाँ हैं क्योंकि एनडीए के विपरीत चल रही चुनावी हवाओं का रुख पलटकर पीएम मोदी ने बिहार में अपने गठबंधन की जीत की इबारत लिख दी है।   

बिहार चुनावों नतीजों के दिन वो लोग चुपचाप बैठे थे, जो लगातार एनडीए की हार के दावे कर रहे थे। इस बड़ी जीत की भूमिका प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लिखी है। प्रधानमंत्री को लेकर ये कहा जाने लगा था कि वो इस बार कोरोना की वजह से चुनाव प्रचार में शायद रैलियाँ नहीं करेंगे।

चुनाव नतीजों के दिन शुरूआती रुझानों को देखकर विपक्ष बेहद खुश था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं पीएम मोदी ने इस बार पहले की तरह ज्यादा रैलियाँ तो नहीं की, लेकिन जितनी भी रैलियाँ की वो एनडीए के लिए फायदेमंद रही और विपक्ष के तोते उड़ गए।

ऐसा पहली बार नहीं है कि विरोध में चल रही हवा को पीएम मोदी ने अपनी रैलियों से बेअसर कर दिया। गुजरात चुनाव इसका सबसे बड़ा उदाहरण है जहाँ कॉन्ग्रेस के सारे बीजेपी विरोधी एजेंडे की पीएम मोदी ने हवा निकाल दी थी और चुनाव नतीजों में प्रधानमंत्री एक बड़े चुनावी गेम चेंजर बनकर उभरे थे।

कुछ ऐसा ही इस बार बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों में भी सामने आया है जिसमें बीजेपी राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी है, और उसे जिताने में सबसे बड़ी भूमिका है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की।

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