Homeराजनीतिमनीष सिसोदिया का OSD सहयोगी समेत गिरफ़्तार, कई बड़े नाम CBI की रडार पर

मनीष सिसोदिया का OSD सहयोगी समेत गिरफ़्तार, कई बड़े नाम CBI की रडार पर

दलाल धीरज गुप्ता को बुधवार (फरवरी 5, 2020) को गिरफ़्तार किया गया था। उससे पूछताछ के बाद गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया। फ़िलहाल उसे 14 दिनों के लिए रिमांड पर भेजा गया है।

दिल्ली में विधानसभा चुनाव से एक दिन पहले मनीष सिसोदिया की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सिसोदिया के ओएसडी जीके माधव को पहले ही गिरफ़्तार किया जा चुका है। जीके माधव वर्ष 2015 से दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ओएसडी के रूप में कार्यरत था। अब माधव के सहयोगी धीरज गुप्ता को गिरफ़्तार किया गया है, जो दिल्ली सरकार के कई अधिकारियों के लिए दलाली का काम करता था। दलाली की पहली किस्त के रूप में 2 लाख 26 हजार रुपए लिए जा रहे थे।

सिसोदिया के करीबी जीके माधव के पास से तलाशी के दौरान दिल्ली सरकार का एक जॉब कार्ड बरामद हुआ है। उसपर ‘ऑफिस ऑफ डिप्टी सीएम’ लिखा हुआ है। 1977 में जन्मा माधव 2000 के बाद से इस नौकरी में आया था। 2014 में उसकी तैनाती उप-मुख्यमंत्री के यहाँ की गई। माधव से पूछताछ के बाद गुप्ता को गिरफ़्तार किया गया। जीके माधव से इस सम्बन्ध में जानकारी ली जा रही है।

माधव से पूछताछ की जा रही है कि वो किसके कहने पर रुपए लेता था और उस रकम को कैसे और कहाँ आगे बढ़ाया जा रहा था। मीडिया में चल रही ख़बरों के अनुसार, सीबीआई माधव के अनेक ठिकानों पर छापेमारी की गई है और अब तक वहाँ से नगदी समेत कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। दलाल धीरज गुप्ता को बुधवार (फरवरी 5, 2020) को गिरफ़्तार किया गया था। उससे पूछताछ के बाद गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया। फ़िलहाल उसे 14 दिनों के लिए रिमांड पर भेजा गया है।

माधव को भी सीबीआई की विशेष कोर्ट में पेश किया जाना है। इस मामले में ख़ुद का बचाव करते हुए आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने कहा है कि भ्रष्टाचार को किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब मामले के तार कहाँ-कहाँ जुड़े हुए हैं, ये तो आगे की जाँच के बाद ही पता चलेगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -