Homeराजनीति'किसानों और सरकार में होगी भयंकर लड़ाई, मैं खुद उतरूँगा मैदान में': राज्यपाल सत्यपाल...

‘किसानों और सरकार में होगी भयंकर लड़ाई, मैं खुद उतरूँगा मैदान में’: राज्यपाल सत्यपाल मलिक का ऐलान – अडानी का गोदाम उखाड़ फेंको

"जब किसान आंदोलन में हमारे लोग सड़कों पर मरने लगे, तब मैं अपना इस्तीफा जेब में लेकर प्रधानमंत्री जी से मिलने गया। मैंने उन्हें समझाया कि इन लोगों के साथ ज्यादती हो रही है।"

अपने विवादित बयानों के कारण अक्सर विवादों में रहने मेघालय के गवर्नर सत्यपाल मलिक (Satya Pal Malik) ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। सत्यपाल मलिक ने कहा, “किसानों का आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने सिर्फ धरना खत्म किया है। अगर समय रहते MSP पर कानून नहीं बनाया, तो देश में किसानों और सरकार के बीच भयंकर लड़ाई होगी। मैं खुद अपना इस्तीफा जेब में लेकर घूमता हूँ, किसानों के लिए 4 महीने बाद मैदान में उतर जाऊँगा।”

उन्होंने रविवार (12 जून 2022) को जयपुर में राष्ट्रीय जाट संसद को संबोधित करते हुए अंबानी-अडानी पर भी पर हमला बोला। मलिक ने किसानों को भड़काते हुए कहा, “अडानी ने किसानों की फसल सस्ते दाम पर खरीदने और महँगे दामों पर बेचने के लिए पानीपत में बड़ा गोदाम बनाया है। अडानी का ऐसा गोदाम उखाड़ फेंको। डरने की जरूरत नहीं है, मैं आपके साथ जेल चलूँगा। अडानी और अंबानी मालदार कैसे हो गए हैं, जब तक इन लोगों पर हमला नहीं होगा, तब तक ये लोग रुकेंगे नहीं।”

राज्यपाल सतपाल मलिक ने आगे कहा, “जब किसान आंदोलन में हमारे लोग सड़कों पर मरने लगे, तब मैं अपना इस्तीफा जेब में लेकर प्रधानमंत्री जी से मिलने गया। मैंने उन्हें समझाया कि इन लोगों के साथ ज्यादती हो रही है। कुछ ले-देकर इन्हें हटा दीजिए। उन्होंने कहा कि वे चले जाएँगे। इस पर मैंने उनसे कहा ये किसान समझौता करने वाली कौम नहीं है। बाद में उन्हें समझ में आया। तब उन्होंने माफी माँगकर कानून वापस लिए।”

गौरतलब है कि इससे पहले मार्च में सत्यपाल मलिक ने किसानों को हिंसा के लिए भड़काते हुए केंद्र की मोदी सरकार को धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर किसानों की माँगें नहीं मानी गईं तो वो उन्हें मनवाने के लिए हिंसा का रास्ता अपना सकते हैं। उन्होंने कहा था, “दिल्ली को मेरी सलाह है कि उनके साथ न भिड़े, वे खतरनाक लोग हैं। किसानों का मुद्दा उठाने के कारण मुझे अपना राज्यपाल का पद खोने का कोई डर नहीं है। किसान जो चाहते हैं, उसे हासिल कर के रहेंगे।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -